रात में भूल कर भी महिलाये न करे यह ६ काम

घर की सुख- शांती के लिये रात को सोने से पहले महिलायें ना करे ये काम
घर की महिलाएं कई ऐसे काम करती है जो जाने अनजाने में पूरे घर-परिवार को नकुसान पहुंचा जाती है। इसका सीधा असर परिवार के लोगों के स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। तो आपको बताते है कि घर की महिलाओं को ऐसे कौनसे काम करने चाहिए और कौनसे काम नही करने चाहिए-

पहला काम
सूरज डूबने के बाद नही दें दूध-दहीं
सूरज डूबने के बाद यदि कोई बाहर का व्यक्ति आप से दूध या दही मांगे तो उस समय आपको ये नही देना चाहिए। ऐसा करने से उस घर की लक्ष्मी चली जाती है। रात को सोने से पहले किचन को साफ करके सोना चाहिए। इससे घर में वैभव और लक्ष्मी दोनों की प्राप्ति होती है।
दुसरा काम
रात को सोने से पहले करें बर्तन साफ
रात को सोने से पहले महिलाओं को खाने के बर्तन साफ करके सोना चाहिए। गन्दे बर्तन रात भर किचन में छोड़ना , घर में अशान्ति और बिमारी को दावत देता है। यही नही रात भर झूठे बर्तन घर की लक्ष्मी को भी घर में प्रवेश करने से रोकते है।

और लक्ष्मी को स्थाई नही होने देते है। इसलिए रात को सोने से पहले सारे गंदे बर्तन साफ करके सोना चाहिए। आज के समय में स्त्रियां घर में नौकरों से काम करवाती है, तो उस परिस्थिति के अनुसार ही घर के बर्तन की सफाई होती है, अगर ये समस्या आपके साथ भी है तो आप कोशिश करे कि बर्तनों को आप खुद ही धोकर रखे और बाद में सोये।

तीसरा काम
बाल खोलकर नही सोना चाहिए
रात को सोते समय अक्सर महिलायें स्वंय की सुविधा के लिए बाल खोल कर सोती है। ऐसा करना घर में नेगटिव एनर्जी को आमंत्रित करता है। इसलिए घर की सभी महिलाओं को रात में बाल खोलकर नही सोना चाहिए।

चौथा काम
रात को पूरे घर में रखे नमक
हफ्ते में एक बार रात को सोने से पहले घर के सभी कमरों में थोड़ा -थोड़ा सेंधा नमक या काला नमक एक अखबार के ऊपर रखकर फर्श पर रखें। सबसे पहले सुबह उठते ही किसी से बिना बात किए इस नमक को इक्ट्टा करके किसी गंदे नाले में फेंक दें। इससे घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाएगी। और यदि घर में किसी ने जादू टोना टोटका करवा रखा है तो वो भी बेअसर हो जाएगा।

पांचवा काम
झाडू की सही दिशा
सभी महिलाओं को सोने से पहले झाडू को दक्षिण दिशा में रखना चाहिए। इससे धन लक्ष्मी का भण्डार होता है।

छठा काम
पानी ना रखें
अगर रात को आप पानी साथ रख कर सोती है तो पानी को हमेशा साथ में यानि की बराबर में रखें। बेड के सिरहाने भूलकर भी पानी ना रखें। वरना आपके घर की लक्ष्मी रूठ सकती है।

तो महिलाओं के लिए जो हमने काम बताये है उनको ये काम कभी ना करना चाहिए। तरक्की अपने आप आपके दरवाजे पर आएगी ।

”इसलिए नहीं लेनी चाहिए किन्नरो की बद्दुआ”, पुराण में छुपा हे यह रहस्य !

हमारे देश और समाज में किन्नरों को मुख्यधारा से जहाँ अलग माना जाता है और देखा जाये तो उन्हें सम्मान भी दिया जाता है. और दूसरी तरफ से देखा जाये तो उन्हें कई प्रकार की सामाजिक कुरीतियों तथा बुराइयों के बंधनों में बांधकर समाज से बिलकुल अलग भी रखा जा रहा है.

हकीकत में हमारा समाज विशेषकर सनातन धर्म हिन्दू धर्म में किन्नरों को बहुत ही अत्यधिक सम्मान दिया जाता है. इतना ही नहीं यह भी कहा जाता है कि किन्नर जिसको भी अपना आशीर्वाद दें, उसका भाग्य एकदम से चमक उठता है और जिसको भी बद्दुआ दे, उसके दुखों का फिर कोई अंत नहीं होता. ऐसे ही हम यहाँ जानेंगे किन्नर समाज से जुड़ी हुयी कुछ ऐसी ही अनोखी परंपराएं…

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के अनुसार वीर्य की बहुत अधिकता से पुत्र तथा रज की बहुत अधिकता से कन्या का उत्पन्न होना है. यदि होने वाली संतान के समय वीर्य और रज दोनों की समान मात्रा हो तो इन किन्नरों की उत्पत्ति होती है.

पुराने शास्त्र और ग्रंथों में भी किन्नरों का पूर्ण वर्णन किया गया है. रामायण के समकालीन ग्रंथों में इन्हें स्वर्गलोक के अंदर रहने और नृत्य, गायन, संगीत इत्यादि कलाओं में महारथी कहकर प्रशंसा की जाती रही है. महाभारत के अंदर भी अर्जुन के अज्ञातवास के दौरान किन्नर बनने का संदर्भ दिया हुआ है.

हमारे समाज में किन्नरों को मंगलमुखी भी कहा जाता है. इसीलिए घर में केसा भी शुभ अवसर जैसे शादी ब्याव , जन्म या अन्य किसी भी प्रकार के शुभ कामों में किन्नरों को सम्मान स्वरूप आमंत्रित कर इनसे आशीर्वाद लेते है. लेकिन घर में कोई भी मातम या घटना होने पर इन्हें बिलकुल नहीं बुलाया जाता.

मृत्यु के पश्चात् किस रास्ते से ले जाते है यमराज आत्माओ को|

मृत्यु के बाद स्‍थूल शरीर तो जहां का तहां रह जाता है लेक‌िन सूक्ष्म शरीर यमदूतों के द्वारा यमलोक ले जाया जाता है। ज‌िसके बारे में गरुड़ पुराण, कठोपन‌िषद, व‌िष्‍णु पुराण में उल्लेख म‌िलता है। गरुड़ पुराण में तो भगवान व‌िष्‍णु अपने वाहन गरुड़ को यमलोक के मार्ग, यमराज, नर्क लोक की रूप रेखा, नर्क में म‌िलने वाली सजा और पुनर्जन्म के बारे में भी बताते हैं। लेक‌िन इन सबसे हटकर कुछ ऐसे रहस्य भी हैं ज‌िसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

मरने के बाद तो हर व्यक्त‌ि और जीव की आत्मा यमलोक में पहुंचती है लेक‌िन आप चाहें तो यमलोक जाने वाले मार्ग पर जीते जी अपने शरीर के साथ जा सकते हैं और अगर आपका कलेजा मजबूत है तो आप उस स्‍थान को भी देख सकते हैं।ह‌िमाचल प्रदेश ज‌िसे देवभूम‌ि के रूप में जाना जाता है यहां चंबा ज‌िले के भारमौर नामक स्‍थान पर यमराज का एक मंद‌िर है। कहते हैं यमदूत मरने के बाद आत्माओं सबसे पहले यहीं पर लेकर आते हैं।
घर की तरह द‌िखने वाला यह मंद‌िर रहस्‍यों से भरा पड़ा है। कुछ लोग यहां आकर भी अंदर जाने का साहस नहीं जुटा पाते हैं। मंद‌िर में एक खाली कमरा है ज‌िसे यमराज के सच‌िव च‌ित्रगुप्त का कमरा कहा जाता है।

इस मंदिर का सातवां दरवाज़ा खुला तो आ सकता है प्रलय हो जाएगा विनाश.. अब तक छः दरवाजे खुल चुके हैं

हर प्राचीन मंदिर रहस्यों और दिलचस्प कहानी से जुड़ा रहता है.

एक मंदिर ऐसा भी है, जिससे कई रहस्य जुड़े हुए है और उन रहस्यों के साथ कुछ मान्यताएं भी जुड़ी हुई है. उन मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का सातवा यानी आखरी दरवाजा खुलते ही प्रलय आ सकता है

यह मंदिर केरल राज्य के तिरुवनन्तपुरम में स्थापित है.
इस मंदिर को पद्मनाभस्वामी मंदिर के नाम से जाना जाता है.
यह मंदिर भगवान विष्णु को पूर्णरूप से समर्पित किया गया है.
भगवान विष्णु की प्रतिमा इस मंदिर के गर्भगृह में स्थापित की गई है.
भगवान विष्णु शेषनाग के ऊपर शयन अवस्था में विराजमान है .
इस मंदिर की दिलचस्प बात यह है कि इस मंदिर से जुड़े अनेक रहस्य है.
यह दुनिया का सबसे धनी मंदिर भी माना जाता है.
इस मंदिर की कुल संपत्ति लगभग 1,32,000 करोड़ है.
त्रावणकोर में 1947 तक राजाओं का शासन काल चलता था. भारत आज़ाद होने के बाद इसको भारत में मिलाया गया था.
विलय के पश्चात् भी भारत सरकार द्वारा इस धनी मंदिर पर अधिकार नहीं जमाया गया था. त्रावणकोर का यह मंदिर यहाँ के शाही परिवार के हाथो में ही था.
मंदिर की देखभाल व अन्य बाकी व्यवस्था यह शाही परिवार एक निजी संस्था के माध्यम से करवाते है.
इस मंदिर की संपत्ति को देखते हुए और रहस्य को सुनकर इस मंदिर के दरवाज़े खोलने की मांग जनता द्वारा की जाने लगी.
जनता की मांग को सुनकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा 7 सदस्यों की देखरेख में 6 द्वार खोल दिए गए.
इन 6 द्वार के अंदर से लगभग 1,32,000 करोड़ के सोने के जेवर और संपत्ति निकली है.
इस मंदिर की सबसे रहस्यमय चीज यहाँ का सातवा दरवाजा है. जिसको खोलने और ना खोलने पर विचार विमर्श हो रहा है.
यह मंदिर का सातवाँ दरवाज़ा इसलिए रहस्यमय बना हुआ है, क्योंकि मान्यताओं के अनुसार इसके खुलने पर प्रलय आने की बात कही जाती है.
इस सातवें द्वार पर किसी तरह की कुंडी या नट वोल्ट नहीं लगा है.
इस दरवाजे पर सिर्फ दो सर्पों का प्रतिबिंब बना हुआ है, जिसको इस द्वार का रक्षक बताया जाता है. यही दोनों सर्प इस द्वारा पर पहरा देते हैं और रक्षा करते हैं.
इस द्वार की विशेषता यहाँ है कि यह द्वार सिर्फ मंत्रोच्चारण से खुल सकता है. उसके अलावा इसको खोलने का और कोई रास्ता नहीं है.
इस द्वार को खोलने के लिए ‘गरुड़ मंत्र’ का प्रयोग स्पष्ट व साफ़ शब्दों में किसी सिद्ध पुरूष के माध्यम से कराना होगा.
मंत्रोच्चारण साफ़ और स्पष्ट न होने पर उस पुरुष की मृत्यु भी हो सकती है.
त्रावणकोर राजपरिवार के मुखिया तिरुनल मार्तंड वर्मा जो 90 वर्ष के है. उन्होंने एक अंग्रेज़ी समाचार पत्र में दिए गए साक्षात्कार में कहा है कि उनका पूरा जीवन इस मंदिर की देखभाल में बिता है.
साथ ही सातवें द्वार को खोले जाने पर देश में प्रलय आ सकता है. इसलिए इस द्वार को ना खोलें. इसका रहस्य रहस्य ही बना रहने देना सही है.
ज्यादातर प्राचीन चीजो का निर्माण रहस्यमय तरीकों से करवाया जाता था और उन वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए उससे मंत्रो से बांधकर रखा जाता था, ताकि उसका रहस्य बना रहे और उस जगह से जुड़ी वस्तुओं का दुरूपयोग न हो.

ऐसे में सातवे द्वार के अंदर की चीजें जानने की इच्छा सबको है, लेकिन अगर किसी चीज को तांत्रिक शक्ति व सिद्ध मंत्रों द्वारा रहस्यमय ढंग से बंद करके रखा गया है तो उससे छेड़खानी करना अनुचित ही होगा.

मंदिर का सातवाँ दरवाज़ा अगर बंद है, तो किसी का अहित नहीं हो रहा. लेकिन मंदिर का सातवाँ दरवाज़ा खुलने पर अहित होने की संभावना है. इसलिए इसको बंद रखना ही उचित है

यह है साक्षात् दुर्लभ चमत्कारी वनस्पति, इस उपाय द्वारा शीघ्र हो जाएंगे आप धनवान !

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अद्भुत एवं चमत्कारी वनस्पति ‘‘हत्था जोडी’’ (Hatha jodi) एक वनस्पति है एक विशेष जाति के पौधे की जड़ खोदने पर उसमे मानव भुजा जैसी दो शाखाये दिखाई पड़ती है इसके सिरे पर पंजा जैसा बना होता है,

उंगलियों के रूप में उस पंजे की आकृति ठीक इस तरह होती है जैसे कोई मुट्ठी बांधे हो, जड़ निकलकर उसकी दोनों शाखाओं को मोडकर परस्पर मिला देने से यह हाथो के जैसी दिखने लगती हे यही हत्ता जोड़ी है. इसकी पौधे प्रायः मध्यप्रदेश में होते हैं.

हत्था जोडी (Hatha jodi) बहुत ही शक्तिषाली व प्रभावकारी वस्तु है यह एक जंगली पौधे की जड़ होती है. इसका चमत्कार मुकदमा, शुत्रु संघर्ष, दरिद्रता को दूर करने व दुर्लभ व्याधियों आदि के निवारण में इसकी जैसी चमत्कारी वस्तु आज तक देखने में नही आई इसमे वशीकरण को भी अद्भुत शक्ति है.

इसको पास मे रखने से भूत, प्रेत आदि का भय नहीं रहता है यदि इसे तांत्रिक विधि से सिद्ध कर दिया जाए तो साधक निश्चित पद्यमावति का कृपा पात्र हो जाता है. यह जिसके पास होती है उसे हर कार्य मे सफलता मिलती है धन संपत्ति देने वाली यह बहुत चमत्कारी साबित हुई है.

तंत्र मे इसका महत्वपूर्ण स्थान है. हत्था जोड़ी – Hatha jodi में अद्भुत प्रभाव निहित रहता है, यह साक्षात पद्यमावति का प्रतिरूप है यह जिसके पास भी होगा वह अद्भुत रूप से प्रभावकारी होगा, सम्मोहन, वशीकरण, अनुकूलन, सुरक्षा मे अत्यंत गुणकारी होता है, इससे प्रयोग से भी शीघ्र ही धन लाभ होने लगता है.

हिन्दू देवी-देवताओ के वे साक्षात व वास्तविक चमत्कार, जिन्हें जान नास्तिक भी लेगा प्रभु का नाम !

भारत को चमत्कारों का देश कहा जाता है, क्योकि वैसे भी चमत्कारों को ही नमस्कार किया जाता है. आज इस कलयुग में ऐसा भी कई भक्त है जो भगवान पर ही प्रश्न उठाने लगते है. कई बार आपने भी यह सूना होगा की भगवान में ताकत है तो वे चमत्कार करके दिखाए.

इसी कारण कलयुग में भी भगवान ने कई ऐसे चमत्कार उतपन्न किये है जिसे देख कर हर कोई यह कहता है की आखिर यह कैसे सम्भव हुआ यह तो चमत्कार है.

ऐसे ही कुछ चमत्कारों से आज हम आपको परिचित कराने जा रहे है जो किसी नास्तिक को तक यह विशवास दिलाने के लिए काफी है की भगवान कण कण में व्याप्त है.

देवी माता का चमत्कार :-

हिमांचल के कांगड़ा घाटी के दक्षिण में 30 किलो मीटर की दुरी पर ज्वाला देवी का मंदिर स्थापित है. मान्यता है की इस स्थान पर देवी सती की जीभ गिरी थी. ऐसा कहा जाता है की इस मंदिर में हजारो वर्षो से देवी माता के मुह से अग्नि निकल रही है, आज तक किसी को यह नहीं पाता चला की यह ज्योति कब से जल रही थी.

बिना किसी तेल बाती के जलती यह ज्योति निरन्तर प्रकाशमान रहती है.

मुगल बादशाहो से लेकर अंग्रेजो ने तक इस ज्योति के बारे में जानना चाहा की आखिर यह ज्योत जलती कैसे है मगर वे इस रहस्य को नहीं जान पाए. आज तक देवी ज्वाला माता का राज वेज्ञानिको के लिए एक पहेली बना हुआ है.

इस कारण से मिलता है किन्नर रूप में जन्म, शास्त्रो में किन्नरो से जुड़ा विचित्र रहस्य !

किन्नर होते तो हमारे जैसे ही परन्तु उनकी शारीरक बनावट कुछ इस प्रकार की होती है की समाज में उन्हें तिरछी नजरो से देखा जाता है. हमारे समाज में इन्हें उचित मान समान तो नहीं दिया जाता परन्तु हर सुख के कार्यो में इन्हें जरूर बुलाया जाता है.

इनके शरीरिक बनावट के कारण कितने ही लोग द्वारा इनका मजाक बनाया जाता है. परन्तु क्या आप जानते है की शास्त्रो के अनुसार किन्नरो को साक्षात् भगवान का आशीर्वाद माना गया है.

ये लोग जिस व्यक्ति पर खुश हो जाए अथवा जिनको ये अपना आशीर्वाद देदे उनकी सोई हुई किस्मत जाग जाती है.

फिर भी कहि न कहि आपके मन में यह सवाल उठता होगा की आखिर क्यों किन्नर मनुष्य के रूप में धरती में जन्म लेते है. आइये आज हम आपको किन्नरो से जुड़े इन रहस्यो के बारे में बताते है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि जब किसी की कुंडली में आठवे घर में शुक्र और शनि मौजूद हो व इन्हें गुरु व चंद्र नही देख रहे हो वह व्यक्ति नपुंसक हो जाता है.

कुंडली के जिस ग्रह में शुक्र बैठा हो या उसके आठवे व छठे ग्रह में शनि बैठा हो तो व्यक्ति में प्रजनन की क्षमता कम हो जाती है. अगर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो इससे बचा जा सकता है.

सिर्फ इन तीन चीज़ों से बना ले दुरी, दुनिया होगी आपके कदमो में”चाणक्य नीति” !

चाणक्य से महान राजनीतिज्ञ एवम नीतिशास्त्र का लोहा पूरी दुनिया मानती है. उनकी हर बात आज भी उनती ही प्रांसगिक है जिनती की हजारो साल पहले थी. चाणक्य ने अपने जीवन से जुड़े अनुभवो के ज्ञान को जिस पुस्तक में वर्णित किया था उसी के चौदहवे अध्याय में बताई तीन महत्वपूर्ण बाते आज हम आपको बताएंगे.

इन बातो को यदि कोई अपने जीवन में अपनाले तो कोई भी बाधा एवम समस्या व्यक्ति को सफलता को प्राप्त करने से नहीं रोक सकता .

” ये अच्छा होगा यदि आप राजा, अग्नि और स्त्री से उचित दुरी बना कर रखे. और भी ध्यान रखे की आप इनसे कुछ ज्यादा ही दूर न हो जाए अन्यथा आप इनसे मलने वाले लाभ से वंचित रह जाएंगे.”

आइये इस बात को अब थोड़ी गहराई से समझते है और इसे आज के परिपेक्ष्य में स्थापित करने का प्रयास करते है.

पहले तो हम राजा, अग्नि एवम स्त्री का अर्थ समझते है :-

राजा से अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से है जिसके पास को बड़ा पद हो, कोई ऐसा व्यक्ति जिसके पास कुछ करने का विशेष अधिकार हो, जैसे की किसी कंपनी का बॉस या मैनेजर, देश का नेता, मंत्री इत्यादि.

तथा अग्नि का आशय ही रिश्क से, और अंत में स्त्री से अभिप्राय है भोग विलास या सुख सुविधाओ से भरी चीज़ों से.

आखिर क्यों बनाये राजा से उचित दुरी ?

आखिर क्यों पति अपनी पत्नियों से डरते है, जाने पुराणों में छिपी इस राज से जुडी कथा !

पुलिस हो या मंत्री, कोई अफसर हो या अधिकारी सभी चाहे बाहर अपना प्रभाव क्यों न दिखाए परन्तु जब आप घर में आते है तो आपकी सारी शक्ति सारा सामर्थ्य छू मंतर अर्थात गायब हो जाता है क्योकि वहां आपकी पत्नी मौजूद होती है तथा उनके आगे आपकी एक भी नहीं चलती.

पति पत्नियों के ऊपर बहुत से जोक भी बनते है परन्तु आखिर इन सब के पीछे क्या वजह होगी आपने कभी सोचा है.

यदि नहीं तो आज हम आपको पौराणिक कहानियो के बारे में बताने जा रहे है जिसमे आपके पति पत्नी से जुड़े हर प्रश्नों के उत्तर छिपे हुए है.

संसार में स्त्री की उत्पत्ति का श्रेय महादेव शिव को जाता है उन्होंने अर्धनारीश्वर का रूप धारण कर सृष्टि में स्त्री को उत्पन किया तथा जब उस स्त्री को उन्होंने पत्नी में रूप में प्राप्त किया तब उन्हें स्त्री शक्ति का बोध हुआ.

स्त्री शक्ति का अंदाजा भगवान शिव को तब हुआ जब उन्होंने एक बार देवी सती को मायके जाने से मना कर दिया. देवी सती इस बात के लेकर बहुत क्रोधित हुई तथा उन्होंने विकराल रूप धारण कर 10 महाविद्याओ को उत्पन्न किया.

10 महाविद्याओ ने भगवान शिव पर आक्रमण कर दिया, अंत में भगवान शिव को उनसे बचते हुए माता सती के चरणों में आना पड़ा. यानी की देवी सती एवम भगवान शिव ने इस बात को तय कर लिया की पति एवम पत्नी में हमेसा पत्नी का वर्चस्व रहेगा.

भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु भी पत्नी के प्रभाव से अछूते नहीं है. वैसे तो अक्सर आपने चित्रो में देखा होगा की माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के चरणों को दबाती है परन्तु एक बार दुर्वाशा ऋषि के श्राप के कारण देवी लक्ष्मी वैकुंठ धाम छोड़कर अपने मायके सागर के अंदर चली गयी.

इसके बाद पुरे देवलोक के साथ ही वैकुण्ठलोक में भी अन्धेरा छा गया. वेकुंठ का सारा वैभव गायब हो गया तथा वहाँ अब चमक नही रही. इसके बाद सागर मंथन द्द्वारा लक्ष्मी पुनः प्रकट हुई तथा भगवान विष्णु ने फिर उन्हें नाराज करने का जोखिम नही लिया.

कहते है कि हर स्त्री में देवी लक्ष्मी का वास होता है और हर स्त्री गृहलक्ष्मी होती है. और यह जानती है की इन्ही के कारण घर में सुख शांति हो सकती है अतः यह अपना लोहा मनवाती है.

श‌िव और व‌िष्‍णु जब पत्नी की ताकत को स्वीकार करते हैं तो भला ब्रह्मा जी इससे कैसे बच सकते हैं. त्र‌िदेवों में सृष्ट‌ि कर्ता के पद पर व‌िराजमान ब्रह्मा जी देवी सरस्वती की सत्ता को स्वीकार करते हैं क्योंक‌ि एक बार पुष्कर में ब्रह्मा जी ने यज्ञ का आयोजन क‌िया और देवी सरस्वती के यज्ञ स्‍थल तक पहुंचने में समय लग गया तो गायत्री नाम की कन्या से व‌िवाह कर ल‌िया.

देवी सरस्वती ने जब ब्रह्मा के साथ गायत्री को देखा तो ब्रह्मा जी को शाप दे द‌िया क‌ि आपकी पूजा कहीं नहीं होगी और रुठकर रत्नाग‌िरी पर्वत पर चली गई. यहां देवी सरस्वती की साव‌ित्री रूप में पूजा होती है. यानी पत्‍नी रुठी तो सब रुठे इसल‌िए पत्‍नी को मनाए रखने में ही पत‌ि अपनी भलाई मानते हैं.

भगवान शनि देव के प्रकोप से समस्त दुनिया डरती है परन्तु शनि देव को भी अपनी पत्नी से भय लगता है. इसलिए ज्योतिषशास्त्र में भी शनि देव को प्रसन्न करने के लिए एक उपाय के अनुसार उनकी पत्नी की पूजा बताई गयी है. इनकी पत्नी के नाम का जाप शनि देव के कुदृष्टि से शीघ्र मुक्ति दिलाता है.

इसका एक कारण यह भी है की शनि देव की वर्क दृष्टि उनके पत्नी के श्राप के कारण ही हुई है. अतः शनि देव की पत्नी का जप लाभदायक है अर्थात जब पत्नी क्रोधित होती है तब वह विनाशकारी हो जाती है इसका एक उदाहरण माँ काली भी है.

तिरुपति बालाजी से जुड़ा एक बहुत ही विचित्र रहस्य

जिसे जान आश्चर्यकित हो जाओगे आप !

वैंकटेश भगवान को कलियुग में बालाजी नाम से भी जाना गया है. पौराणिक गाथाओं और परम्पराओं से जु़डा संक्षिप्त इतिहास यहां प्रस्तुत है :-

प्रसिद्ध पौराणिक सागर-मंथन की गाथा के अनुसार जब सागर मंथन किया गया था तब कालकूट विष के अलावा चौदह रत्न निकले थे. इन रत्नों में से एक देवी लक्ष्मी भी थीं. लक्ष्मी के भव्य रूप और आकर्षण के फलस्वरूप सारे देवता, दैत्य और मनुष्य उनसे विवाह करने हेतु लालायित थे, किन्तु देवी लक्ष्मी को उन सबमें कोई न कोई कमी लगी. अत: उन्होंने समीप निरपेक्ष भाव से खड़े हुए विष्णुजी के गले में वरमाला पहना दी. विष्णु जी ने लक्ष्मी जी को अपने वक्ष पर स्थान दिया.

यह रहस्यपूर्ण है कि विष्णुजी ने लक्ष्मीजी को अपने ह्वदय में स्थान क्यों नहीं दिया? महादेव शिवजी की जिस प्रकार पत्नी अथवा अर्धाग्नि पार्वती हैं, किन्तु उन्होंने अपने ह्वदयरूपी मानसरोवर में राजहंस राम को बसा रखा था उसी समानांतर आधार पर विष्णु के ह्वदय में संसार के पालन हेतु उत्तरदायित्व छिपा था. उस उत्तरदायित्व में कोई व्यवधान उत्पन्न नहीं हो इसलिए संभवतया लक्ष्मीजी का निवास वक्षस्थल बना.

एक बार धरती पर विश्व कल्याण हेतु यज्ञ का आयोजन किया गया. तब समस्या उठी कि यज्ञ का फल ब्रम्हा, विष्णु, महेश में से किसे अर्पित किया जाए. इनमें से सर्वाधिक उपयुक्त का चयन करने हेतु ऋषि भृगु को नियुक्त किया गया. भृगु ऋषि पहले ब्रम्हाजी और तत्पश्चात महेश के पास पहुंचे किन्तु उन्हें यज्ञ फल हेतु अनुपयुक्त पाया. अंत में वे विष्णुलोक पहुंचे.