कीजिए बजरंगबली के ये उपाय -होगी अचानक धन की प्राप्ति मिलेगी सभी कर्जो से मुक्ति |

क्या आप किन्ही कारणों से कर्ज में डूबे हुए है या फिर कर्ज से परेशान है तो आप हनुमान भक्ति से कर्ज से छुटकारा पा सकते है कर्जो से मुक्त होना आसान नही है पर कठिन भी नही | हनुमान जी की कृपा हुई तो आप कर्जो से जल्द ही मुक्ति पा सकते है अगर आप पर किसी तरह का कर्ज नहीं है तो यह उपाय आपको अपार धन, सुख, समृद्धि और संपन्नता का शुभ वरदान देंगे।

मंगलवार का दिन हनुमान जी का माना गया है| यह दिन कर्जो से मुक्ति पाने का सबसे अच्छा दिन है | मंगलवार के दिन हनुमान चालीस का पाठ करना चाहिए और पाठ करके हनुमान मंदिर में नारियल चढ़ाना अच्छा माना जाता है

मंगलवार को हनुमान मंदिर के बाहर इन चीजों के प्रयोग व दान का विशेष महत्व है- तांबा, सोना, केसर, कस्तूरी, गेहूं, लाल चंदन, लाल गुलाब, सिन्दूर, शहद, लाल पुष्प, शेर, मृगछाला, मसूर की दाल, लाल कनेर, लाल मिर्च, लाल पत्थर, लाल मूंगा।

आटे से पंचमुखी दीपक बनाये और उस दीपक को बढ़ के पत्ते पर रख कर जलाये | इसी प्रकार पांच पत्तो पर पांच दीपक रखे और इन्हें हनुमान जी के मंदिर में रख दे ऐसा कम से कम ११ मंगलवार तक करे |

इस एक काम को करने से हनुमान जी भागे भागे आएंगे आपके आपके घर

hanuman-ji ko prasan karne ke upay

हनुमान भक्त अपने भगवान की कृपा पाने के लिए न जाने क्या क्या करते है hanuman-ji ko prasan karne ke upay मंदिर जाना, hanuman ji ki puja करना, मंगलवार को व्रत करना, तेल सिंदूर चढ़ाना, और भी बहुत कुछ करते है hanuman ji के भक्त. लेकिन ऐसा देखा गया है कि हनुमानजी फिर भी उन पर अपनी कृपा नहीं बरसाते.

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लेकिन एक काम ऐसा है, जो करोगे तो हनुमानजी को आपके पास आना ही पड़ता है.

रामायण में भी उल्लेख है कि hanumanji वही आते हैं जहाँ जहाँ यह एक काम होता है .

तो आइये जानते है hanuman kavach की कृपा पाने के लिए कौनसा कार्य करना चाहिए.

जानिए hanuman ji ko khush kaise kare

जहाँ भक्त वहां भगवान – यह बात तो आपने सुनी ही होगी. तो भक्त को बुलाने के लिए भगवान की पूजा करनी होती है.
जहाँ राम होंगे या राम की कथा होगी, वहां हनुमान जी आएंगे ही आएंगे. इसलिए हनुमान की कृपा चाहते है, हनुमान जी को बुलाना है तो आप हनुमान जी की पूजा नहीं बल्कि रामायण पाठ और राम कथा कराइये.

हनुमान को भगवान राम ने धरती पर इसलिए छोड़ा ताकि धर्म की रक्षा हो सके. इसलिए हनुमान ब्रह्माण्ड में हर तरह विचरते रहते है.

लेकिन उनको जहाँ राम कथा, रामायण पाठ सुनाई देता है, वहां जाने से अपने आपको रोक नहीं पाते. इसलिए जहाँ भी रामायण पाठ होता है वहां हनुमान पहुँच ही जाते है.

क्योकि रामायण में लिखा है – जहाँ जहाँ राम कथा होगी, वहां वहां हनुमान की उपस्थिति होगी.

इसलिए अगर आप हनुमान की कृपा चाहते है – हनुमानजी को घर बुलाना चाहते है, या दर्शन करना है तो बस रामकथा कराइए.

रामकथा सुनने हनुमान कभी भी कही भी पहुँच जाते हैं.

हनुमान जी हर रामकथा में सबसे पहले आते है और सबसे अंतिम में प्रसाद लेकर जाते है.

इसलिए हनुमान की कृपा और दर्शन के लिए राम कथा करे, रामायण पाठ करे, क्योकि जहाँ भगवान वहां भक्त आते ही है.

अगले पेज पर पढ़े  hanuman ji ki puja  and hanuman-ji ko prasan karne ke upay

हनुमान जी के जन्म स्थान के रहस्य का खुलासा

भगवान हनुमान के जन्म स्थान को लेकर शुरुआत से ही विवाद रहा है.

रामायण में भी इनके जन्म स्थान का कहीं विश्वसनीय जिक्र नहीं है. कोई कहता है कि हनुमान का जन्म स्थान नागपुर में है तो कोई कर्नाटक के कोप्पल को हनुमान का जन्म स्थान मानता है.

तो आइये आज हम आपको बताते हैं कि आखिर हनुमान का जन्म स्थान कहाँ हैं-

पहले किष्किन्धा को जान लीजिये-

कर्नाटक के कोप्पल और बेल्लारी में एक जगह है जो अंजनी पर्वत के नाम से विख्यात है. इस जगह को किष्किन्धा भी बोला जाता है. यह अंजनी पर्वत इसीलिए ज्यादा मशहूर है क्योकि यहाँ हनुमान जी की माता जी ने हनुमान जन्म के लिए तपस्या की थी. अब जानकार लोग बताते हैं कि यह हनुमान का जन्म स्थान इसीलिए है क्योकि माता अंजनी जी ने यहाँ ही भगवान के जन्म की नींव रखी थी. किन्तु यह स्थान हनुमान का जन्म स्थान नहीं है.

तो यहाँ हुआ है हनुमान जन्म-

बड़े दुःख की बात है कि हनुमान का जन्म स्थान आज गुमनामी में दफ़न हो रहा है. झारखंड के गुमला जिला के पास एक पर्वत है जिसे हनुमान का जन्म स्थान बताया गया है. गुमले जिले से यह पर्वत कुछ 21 किमी दूर है इसे आंजन धाम बोला जाता है. गाँव का नाम ही आंजन है जो माता अंजनी के नाम पर रखा गया है. पर्वत के नीचे एक बड़ी गुफा है और बोला जाता है कि यहाँ पर हनुमान का जन्म हुआ है. माता अंजनी जी यहीं पर निवास करती थीं.

आप अगर यहाँ हनुमान जन्म के सबूत खोजना शुरू करेंगे तो आपको एक नहीं कई सबूत प्राप्त हो जायेंगे.

पहला सबूत है कि ऐसा बताया जाता है कि हनुमान जन्म से पहले माता अंजनी काफी सारे शिवलिंग की पूजा किया करती थीं. यह शिवलिंग नदी में स्थापित बताये जाते थे. आप अंजनी माता का इतिहास जब पढेंगे तो आपको इस तरह की जानकारी प्राप्त हो पायेगी. जब आप झारखण्ड के इस मंदिर में आते हैं तो आप देखेंगे कि गुफा के पास जो नदी है, वहां पर प्राचीन समय के कुछ 300 शिवलिंग मौजूद हैं.

माता अंजनी की गोद में हैं हनुमान-

यहाँ पर जो मंदिर है उसकी यही सबसे बड़ी खासियत है कि इस मंदिर में माता अंजनी की गोद में हनुमान हैं.

हनुमान का जन्म स्थान

आज भी यहाँ कई साधू छुपकर तपस्या कर रहे हैं. गुफा की रखवाली एक सर्प कर रहा है. यह सर्प लोगों को गुफा के अन्दर जाने से रोकता है. वैसे यह गुफा आज बंद है. ऐसा कहा जाता है कि यहाँ के आदिवासी लोगों ने एक बार माता को बकरे की बली दे दी थी इस बात से माता अंजनी क्रोधित हो गयी थीं. तभी से यह गुफा बंद है ऐसा बताया जाता है.

हनुमान का जन्म स्थान

आप यदि कभी यहाँ जाते हैं तो इस जगह की सकारात्मक शक्ति को महसूस करते ही समझ जायेंगे कि यह जगह कोई आम जगह नहीं है.

किन्तु दुःख इस बात का है कि हनुमान की इस जन्म स्थली की स्थिति वाकई दयनीय हो गयी है.

सुन्दर कांड से जुड़े ये रहस्य आपको भी बना देंगे हनुमान भक्त, जाने सुन्दर काण्ड से जुडी अनुसनी बाते !

हनुमानजी की सफलता के लिए सुंदरकाण्ड को याद किया जाता है. श्रीरामचरित मानस के इस पांचवें अध्याय को लेकर लोग अक्सर चर्चा करते हैं कि इस अध्याय का नाम सुंदरकाण्ड ही क्यों रखा गया है? यहा जानिए इस प्रश्न का उत्तर…

श्रीरामचरित मानस में हैं 7 काण्ड

श्रीरामचरित मानस में 7 काण्ड हैं. सुंदरकाण्ड के अतिरिक्त सभी अध्यायों के नाम स्थान या स्थितियों के आधार पर रखे गए हैं. बाललीला का बालकाण्ड, अयोध्या की घटनाओं का अयोध्या काण्ड, जंगल के जीवन का अरण्य काण्ड, किष्किंधा राज्य के कारण किष्किंधा काण्ड, लंका के युद्ध का लंका काण्ड और जीवन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर उत्तरकाण्ड में दिए गए हैं.

सुंदरकाण्ड का नाम सुंदरकाण्ड क्यों रखा गया?

हनुमानजी, सीताजी की खोज में लंका गए थे और लंका त्रिकुटाचल पर्वत पर बसी हुई थी. त्रिकुटाचल पर्वत यानी यहां 3 पर्वत थे. पहला सुबैल पर्वत, जहां के मैदान में युद्ध हुआ था. दूसरा नील पर्वत, जहां राक्षसों के महल बसे हुए थे और तीसरे पर्वत का नाम है सुंदर पर्वत, जहां अशोक वाटिका निर्मित थी.

इसी अशोक वाटिका में हनुमानजी और सीताजी की भेंट हुई थी. इस काण्ड की यही सबसे प्रमुख घटना थी, इसलिए इसका नाम सुंदरकाण्ड रखा गया है.

अक्सर शुभ अवसरों पर गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ किया जाता है. शुभ कार्यों की शुरुआत से पहले सुंदरकांड का पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है.

यदि आप है हनुमान जी के भक्त, तो भूल से भी न लगाए उनकी फोटो घर के इस जगह पर !

प्रभु श्री राम के भक्त हनुमान जी जाग्रत देव है, हनुमान जी की भक्ति जितनी सरल एवं शीघ्र फल देने वाली है उतनी ही कठिन भी. कठिन इसलिए की हनुमान जी की भक्ति के दौरान मनुष्य को अपना चरित्र उत्तम तथा मंदिर में पवित्रता रखनी अनिवार्य होती है अन्यथा इसके दुष्परिणाम सहने पड़ते है.

बजरंगबलि की भक्ति के प्रभाव से व्यक्ति चमत्कारिक रूप से अपने समस्त दुखो से मुक्ति प्राप्त कर लेता है और उसे सुख शांति की प्राप्ति होती है.

शास्त्रो एवं वेदों में भी यह बात कहि गई है की एक बार हनुमान जी की कृपा किसी पर हो गई तो वह सब कुछ पा जाता है. जिंदगी में कभी भी उसे हार का समाना नहीं करना पड़ता.

हनुमान जी के ऐसे भक्त का कोई शत्रु नहीं होता तथा बुरी शक्तियां उसके पास तक नहीं भटकती.

भगवान श्री राम के वरदान के प्रभाव से अंजनी पुत्र हनुमान जी को अमरता का वरदान प्राप्त हुआ. हनुमान जी की भक्ति कलयुग में तुरंत फल देने वाली मानी गई है. अतः दिन प्रतिदिन हनुमान जी के भक्तो की संख्या बढ़ती जा रही है.

हनुमान जी के असंख्य भक्तो में से कई भक्तो के घर में हनुमान जी की मूर्ति एवं फोटो आसानी से देखने को मिल जायेगी.

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में देवी देवताओ की फोटो लगाना शुभ माना जाता है, यह घर की सभी परेशनियों एवं नकरात्मकता को दूर करता है व घर में सुख एवं शांति बनाये रखता है. घर में बाहर से आने वाले लोगो पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है.

इससे घर में भी परिवार के बीच आपसी प्रेम बना रहता है. वास्तु शास्त्र में हनुमान जी की फोटो घर में लगाने के सम्बन्ध में अनेक नियम बताये गए है जिन्हे घर के किसी निश्चित स्थान पर ही लगाना चाहिए नहीं तो वह विपरीत परिणाम देते है.

हनुमान जी का चित्र जिस घर में होता है वहां मंगल, शनि, भूतादि आदि किसी का भी दोष नहीं होता है.यदि आप हनुमान जी के भक्त है घर में हनुमान जी के चित्र किस जगह और कहाँ लगाए यह जानना आपके लिए आवश्यक है.

हनुमान जी का सबसे शक्तिशाली शाबर मंत्र जिसके जाप से बन जाते है बिगड़े काम

Shaktishali shidh shabar mantra – हनुमान शाबर मंत्र:

शाबर मन्त्र को को स्वयंसिद्धि मन्त्र के नाम से भी पुकारा जाता है यह मन्त्र अत्यन्त शक्तिशाली एवं अचूक है. अगर आप को लग रहा है की आप के दूकान अथवा घर आदि में किसी ने टोटका आदि कर रखा है अथवा घर में कोई व्यक्ति ज्यादा बीमार है, निर्धनता आपका पीछा नहीं छोड़ती, या कोई कार्य बनते बनते बिगड़ जाता हो

अथवा कोई तांत्रिक क्रिया द्वारा आपको बार बार परेशान कर रहा हो तो इन सब कष्टों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए शाबर मन्त्र को सबसे सिद्ध एवं प्रभावकारी माना गया है.

शाबर मन्त्र अन्य शास्त्रीय मंत्रो के भाँति उच्चारण में कठिन नहीं होते है, तथा इस अचूक मन्त्र को कोई भी बड़े आसनी प्रयोग कर अपने कायो को सिद्ध कर सकता है.

इन मंत्रो को थोड़े से जाप द्वारा सिद्ध किया जा सकता है तथा यह मन्त्र शीघ्र प्रभाव डालते है. इन मंत्रो का जो प्रभाव होता वह स्थायी है तथा शक्तिशाली हनुमान मन्त्र का कोई भी दुसरा काट नहीं है.

शाबर मंत्रो के सरल भाषा में होने के कारण इनका प्रयोग बहुत ही आसान है कोई भी इन्हे सुगमता से प्रयोग कर सकता है. यह मन्त्र दूसरे दुष्प्रभावी मंत्रो के काट में सहायक है.

शाबर मन्त्र के प्रयोग से प्रत्येक समस्या का निराकरण सहज ही जाता है. इस मन्त्र का प्रयोग कर व्यक्ति अपने परिवार, मित्र, संबंधी आदि की समस्याओं का निवारण करने में सक्षम है.

वैदिक, पौराणिक एवम् तांत्रिक मंत्रों के समान ‘शाबर-मंत्र’ भी अनादि हैं. सभी मंत्रों के प्रवर्तक मूल रूप से भगवान शंकर ही हैं, परंतु शाबर मंत्रों के प्रवर्तक भगवान शंकर प्रत्यक्षतया नहीं हैं, फिर भी इन मंत्रों का आविष्कार जिन्होंने किया वे परम शिव भक्त थे.

गुरु गोरखनाथ तथा गुरु मछन्दर नाथ शबरतंत्र के जनक माने जाते है. अपने साधन, जप-तप एवं सिद्धियो के प्रभाव से उन्होंने वह स्थान प्राप्त कर लिया जिसकी मनोकामना बड़े-बड़े तपस्वी एवं ऋषि मुनि करते है.

शाबर मंत्रो में ”आन शाप” तथा ”श्रद्धा और धमकी” दोनों का प्रयोग किया जाता है. साधक याचक होते हुए भी देवता को सब कुछ कहने का सामर्थ्य रखता है व उसी से सब कुछ करना चाहता है.

विशेष बात यह है कि उसकी यह ‘आन’ भी फलदायी होती है. आन का अर्थ है सौगन्ध. अभी वह युग गए अधिक समय नहीं बीता है, जब सौगन्ध का प्रभाव आश्चर्यजनक व अमोघ हुआ करता था.

शाबर मंत्रो में गुजराती, तम्मिल, कन्नड़ आदि भाषाओं का मिश्रण है. वैसे समान्यतः अधिकतर शाबर मन्त्र हिंदी में ही मिलते है.

प्रत्येक शाबर मंत्र अपने आप में पूर्ण होता है. उपदेष्टा ‘ऋषि’ के रूप में गोरखनाथ, सुलेमान जैसे सिद्ध पुरूष हैं. कई मंत्रों में इनके नाम का प्रवाह प्रत्यक्ष रूप से तो कहीं केवल गुरु नाम से ही कार्य बन जाता है.

इन मंत्रों में विनियोग, न्यास, तर्पण, हवन, मार्जन, शोधन आदि जटिल विधियों की कोई आवश्यकता नहीं होती. फिर भी वशीकरण, सम्मोहन, उच्चाटन आदि सहकर्मों, रोग-निवारण तथा प्रेत-बाधा शांति हेतु जहां शास्त्रीय प्रयोग कोई फल तुरंत या विश्वसनीय रूप में नहीं दे पाते, वहां ‘शाबर-मंत्र’ तुरंत, विश्वसनीय, अच्छा और पूरा काम करते हैं.

आइये अब हम आपको सिद्ध शाबर मन्त्र के प्रयोग के बारे में बताए तथा इससे जुडी कुछ विशेष तथा ध्यान रखने वाली बातो के विषय में बताए.