माँ दुर्गा की भक्ति पाने के लिए कुछ विशेष मंत्र

शक्ति अर्थात देवी ,हिन्दू धर्मशास्त्रों में देवी की तुलना परम शक्ति से की जाती हैं ,जो त्रिदेव ब्रह्मा,विष्णु,महेश की शक्ति से मिलकर बनी हैं. मार्कण्डेय पुराण में ब्रह्मा जी ने देवी कवच की सम्पूर्ण व्याख्या की हैं

 

जो जनमानस की रक्षार्थ हेतु बताया गया हैं. जिसमे सम्पूर्ण विश्व की रक्षा ,सभी मनुष्यो के कल्याण के लिए अनेक मंत्रो का उल्लेख हैं.

आज हम कुछ मंत्रो के बारे में बताएँगे जो देवी पूजा एवं देवी उपासना के लिए नवरात्रो में किये जाते हैं.

1-भक्ति की प्राप्ति के लिए माँ दुर्गा की आराधना इस मंत्र के द्वारा की जानी चाहिए:

नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे |

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ||

 

2-सर्व मंगल के लिए माँ दुर्गा की आरधना इस मंत्र के द्वारा की जानी चाहिए

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

 

3-सभी रोगो से रक्षा ओर सौभाग्य की कामना के लिए माँ दुर्गा की उपासना इस मंत्र के द्वारा की जानी चाहिए

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम् |

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ||

4-सम्पूर्ण विश्व के कल्याण के लिए मां दुर्गा की आराधना इस मंत्र के द्वारा करना चाहिए-

देव्या यया ततमिदं जग्दात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या |

तामम्बिकामखिलदेव महर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः||

जन्माष्ठमी के दिन गाय पर हाथ फेरते हुए करे इस मंत्र का जाप, होगी मुँह मांगी इच्छा पूरी

Janmashtami 2017: तिथि व मुहूर्त

जन्माष्टमी 2017 : 14 अगस्त
निशिथ पूजा: 12:03 से 12:47
निशिथ चरण के मध्यरात्रि के क्षण है: 12:25 बजे
15 अगस्त पराण: शाम 5:39 के बाद
अष्टमी तिथि समाप्त: 5:39

कृष्ण जन्माष्टमी 2017: व्रत-पूजन से जुड़ी मान्यताएं:

कृष्ण जन्माष्टमी के पूरा दिन भक्त निर्जल उपवास रखते हैं. ऐसे में जरूरी है कि आप कुछ खास बातों का ध्यान रखें. अपनी सेहत के लिए जरूरी है कि एक दिन पहले खूब लि‍क्व‍िड लें और जन्माष्टमी से पिछली रात को हल्का भोजन करें.

जन्माष्टमी के दिन अगर आप व्रत रखने वाले हैं या नहीं भी रखने वाले, तो सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. मन में ईश्वर के नाम का जाप करें.

जन्माष्ठमी से पहले घर ले आये ये एक चीज़, कमल से बनी माला

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में 14 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। भगवान श्री कृष्ण ने अपने अत्याचारी मामा कंस का विनाश करने के लिए धरती पर अवतार लिया था। उन्होंने भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आधी रात में मथुरा में अवतार लिया था।

इस शुभ मौके पर हम आपको एक ऐसी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे भगवान श्री कृष्ण को बेहद प्रेम था और यदि ये चीज अगर आप जन्माष्ठमी पर अपने घर लाते है इससमे भगवन श्रीकृष्ण बेहद खुश होते है. दोस्तों हम बात कर रहे है – कमल से बानी वैजन्ती माला

वैजयंती माला- भगवान श्री कृष्ण अपने गले में वैजयंती माला पहनते थे। यह माला कमल के बीजों से बनी हुई होती है। कमल के बीज ऐसे होते हैं, वे कभी ना सड़ते हैं और ना ही टूटते हैं। उनकी चमक हमेशा बरकरार रहती है। इससे सीधा-सीधा संदेश मिलता है कि आप जिंदगी भर सदाबहार रहें और जिस प्रकार कमल का फूल कीचड़ में खिलता है, लेकिन वह उससे अलग ही रहता है। इस फूल को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। कमल से हमें पवित्र रहने की सीख मिलती है।

इसके अलावा बांसुरी, माखन-मिश्री, गाय, मोर पंख शामिल हैं। इन सबके पीछे एक संदेश भी छुपा हुआ है।

गाय- भगवान श्रीकृष्ण को गायों से बहुत ज्यादा प्रेम था, वे उन्हें अपने सखे मानते थे। गाय का मूत्र, गोबर, दूध, दही और घी बहुत ही उपयोगी है। इन पाचों को पंचगव्य कहते हैं। इन्हें शुद्ध माना गाय है। गाय को सभी गुणों से संपन्न माना जाता है।

मिश्री- मिश्री भगवान श्रीकृष्ण को बेहद पसंद है। वे बड़े ही चाव से मिश्री का सेवन करते थे। मिश्री को जब माखन में मिलाया जाता है तो यह उसके हर हिस्से में समा जाती है। मिश्री अच्छे से घुल मिल जाने की सीख देती है।

बांसुरी- भगवान श्री कृष्ण को बांसुरी भी बेहद प्यारी थी। बताया जाता है कि बांसुरी में तीन गुण होते हैं, पहला यह कि इसमें कोई गांठ नहीं होती, जो यह संकेत देती है कि अपने मन में किसी तरह का मैल या गांठ ना रखें। दूसरा यह जब बजती है तो मीठी आवाज निकालती है, जो कि हमें बताता है कि कभी भी कड़वा बोल ना बोलें, हमेशा मधुर वाणी ही बोलें। वहीं तीसरा है कि यह बिना बजाए बजती नहीं है। इसका मतलब हुआ कि जब तक कहा ना जाए, तब तक बोले ना।

मोर पंख से प्रेम- भगवान श्री कृष्ण को मोर पंख भी पसंद था। वे प्रेम में ब्रह्राचर्य की भावना को समाहित करने के लिए प्रतीक के रूप में मोर पंख धारण करते थे।

अगर जन्माष्ठमी से पहले सपने में दिख जाये कान्हा तो ये है संकेत

अक्सर लोगों की यह शिकायत रहती है कि उन्हें अजीबोगरीब सपने आते हैं। कभी-कभी तो ऐसे सपने जिनके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होता। इतना ही नहीं, उनकी एक समस्या यह भी होती है कि यही सपने उन्हें बार-बार आते हैं। जब एक से अधिक बार वैसा ही सपना आए तो उन्हें यह चिंता सताने लगती है कि क्या वह सपना सच हो जाएगा या फिर सपने में कुछ ऐसी चीज़ हमें दिखती है जिसका मतलब समझना हमारे लिए मुश्किल हो जाता है?

सपनों का सामान्य अर्थ कुछ ऐसा लिया जाता है कि हम दिनभर में जो देखते हैं, जिन घटनाओं का सामना करते हैं और जो सोचते हैं वह हमारे मस्तिष्क के किसी कोने में जाकर बैठ जाता है और रात को वही सपनों के जरिए हमें नजर आने लगता है। सपने में इंसान, जानवर, बेजान वस्तुएं तो दिखती ही हैं, लेकिन देवी-देवताओं से जुड़े सपने का क्या अर्थ होता है? सपने में मंदिर का दिखना या फिर किसी भी धार्मिक स्थल का दिखना, देवी-देवताओं का आना या उनके किसी स्वरूप का दिखना, ऐसे सपने हमें क्या संदेश देते हैं?

दोस्तों जन्माष्ठमी का त्यौहार आने वाला है और हम सब इसकी तैयारी में लगे हुए है ऐसे में यदि सपने में भगवान् श्री कृष्ण दिखाई दे तो इसका क्या संकेत हो सकता है. आइये जानते है –

यदि कोई व्यक्ति सपने में भगवान श्रीकृष्ण को देखता है तो यह बहुत ही शुभ सपना माना जाता है। इसका मतलब यह ही की आपके प्रेम संबंध में सुधार आ सकता है और आपका प्यार आपके करीब आने वाला है और इसके साथ साथ यह सपना जिसे आता है उसे आने वाले कुछ ही दिनों में कोई बड़ी सफलता मिलती है। यह सपना ये बताता है की व्यक्ति के जीवन की कठिनाईया समाप्त होने वाली है. भगवान को सपने में देखने के समान ही किसी बुजुर्ग व्यक्ति या साधु को देखना भी शुभ संकेत मन जाता है.

यदि आप सपने में भगवान् श्रीकृष्ण की प्रिय राधा रानी को देखते है तो इसका मतलब ये है की आपको शारीरिक और मानशिक शान्ति मिलने वाली है और आने वाले समय में सारा तनाव दूर होने वाला है |

अगर पति पत्नी में रहता है झगड़ा तो बैडरूम में लगा ले ये एक तस्वीर, बरसेगा प्यार ही प्यार

कई बार छोटी छोटी बातो के कारन पति-पत्नी में बार-बार झगड़े की स्थिति आ जाती है तो यह चिंता का विषय होता है।

आइए जानते है क्यों होता है पति-पत्नी में झगड़ा और क्या है इसके पीछे के ज्योतिषीय कारण :

विवाह से पहले कुंडली मिलान बहुत जरुरी होता है। जब दो व्यक्ति जिंदगीभर विवाह बंधन में बंधकर एकसाथ रहने का फैसला करते हैं तो सामान्यतया वे एक-दूसरे के वास्तविक स्वभाव से अनजान रहते हैं। अत: कुंडली मिलान इसमें बड़ी सहायता करता है।

यदि वर-वधू की कुंडली में शास्त्र अनुसार 18 गुण से कम का गुण मिलान हुआ है, तो झगड़े की आशंका अधिक होती है। विवाह पूर्व कुंडली मिलान के साथ-साथ ही मंगल दोष भी देखा जाता है। यदि किसी एक की पत्रिका मंगली है और दूसरे की नहीं, तो ऐसी स्थिति में झगड़े की आशंका बनती है।

यदि आप भी इस परेशानी का समाधान ढूंढ रहे है तो ये जानकारी आपके लिए काफी उपयोगी है-

वास्तु शास्त्र कहता है की यदि राधा कृष्ण की सुन्दर तस्वीर अपने बैडरूम की दिवार पर लगायी जाये तो इससे पति पत्नी के बीच प्यार बढ़ता है. जैसा की आप सब जानते है अभी जन्माष्ठमी का त्यौहार आने वाला है और अगर इस दिन राधा रानी की तस्वीर लगायी जाये तो ये बहुत ही शुभ होगा और अगर तस्वीर लाल रंग की होगी तो बहुत अच्छा होगा .

जहा राधा कृष्ण की तस्वीर लगी हो उसके सामने वाली दीवार पर पति पत्नी अपनी तस्वीर लगाए .

राधा कृष्ण को अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है .इसलिए उनकी तस्वीर ऐसी जगह पर लगानी चाहिए की सीधे नज़र में आये.

इस बात का विशेष ध्यान रखे की राधा कृष्ण की जो तस्वीर आप बैडरूम में लगाते है उसमे एक भी गोपी न हो .

अगर सुबह शाम पति पत्नी इस तस्वीर के दर्शन करेगे तो आपसी प्यार बढ़ेगा .

गरीब को भी धनवान बना देता है श्रीकृष्ण का 2 शब्द का ये मंत्र

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार कहलाते है, श्री कृष्ण का जीवन अनेक प्रेरणाओं और मार्गदर्शन से भरा हुआ है इसलिए भगवान श्री कृष्ण के भक्त न केवल सिर्फ़ भारत में बल्कि पुरे संसार में फैले हुए है. उनके भक्तो की संख्या करोड़ो अरबो में है यही कारण है की माता यशोदा के लाला श्री कृष्ण के मंदिर भारत के अलावा विदेशो में भी स्थापित है.

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के सिर्फ दो ही अवतार थे जिन्होंने देश-दुनिया में प्रसिद्धि पायी थी जो थे सातवें अवतार श्री राम व आठवें श्री कृष्ण . इनके अलावा भगवान विष्णु के अन्य अवतारों को सिर्फ वे ही जानते है जिनके पास हिन्दू धर्म के धर्मिक गर्न्थो का ज्ञान हो.

आखिर क्या कारण है की भगवान श्री कृष्ण और श्री राम के देश-विदेशो में अनेक भक्त फैले है ? कारण तो अनेक है परन्तु जो मुख्य कारण है वह है दोनों के दवारा दिए गए जीवन उपयोगी संदेश जो भक्तो के जीवन में मार्गदर्शक का कार्य करते है. इसके साथ ही श्री राम और श्री कृष्ण का जीवन ही एक बड़ी मिसाल है जिनके उपदेश भक्तो के लिए संदेश का काम करते है.

सिर्फ उनके जीवन से जुड़े उपदेश ही नहीं बल्कि उनसे जुड़े मन्त्र भी उनके भक्तो के जीवन को सुखमय बना सकते है. इसलिए आज हम आपको भगवान श्री कृष्ण से संबंधित एक ऐसे मंत्र के बारे में बताने जा रहे है जिनसे भक्त अपने जिंदगी में सुख-समृद्धि और ऐशवर्य प्राप्त कर सकता है. यह मन्त्र काफी सरल है और सिर्फ 2 शब्दों से बना है

मंत्र इस प्रकार है –

”गोल्ल्भय स्वाहा” –

यह मन्त्र दिखने में तो सिर्फ दो शब्द लग रहे है परन्तु इन मंत्रो में सात अक्षरों का प्रयोग किया गया है. यदि इस मन्त्र के उच्चारण में थोड़ी सी भी चूक हो जाए तो यह मन्त्र सिद्ध नहीं होता है.

सिद्ध करने की विधि :- आप को बता दे की इस मन्त्र के जाप की लिए कोई समय तय नहीं किया गया है और इसके जापो की संख्या भी निर्धारित नहीं है फिर भी इस मन्त्र का सवा लाख बार जाप करना चाहिए.

यदि आप अति शीघ्र आर्थिक तंगी से छुटकारा पाना चाहते है इस मन्त्र का उपयोग चलते हुए, कुछ काम करते हुए या जगी हुई अवस्था में कभी भी कर सकते यही परन्तु इस मन्त्र का उच्चारण में भी कोई चूक नहीं होनी चाहिए.

96 साल बाद बना ऐसा सयोंग 12 अगस्त की रात नही होगी रात

इन दिनों इंटरनेट पर एक मैसेज जोरों-शोरों से वायरल हो रहा है। इसमें एक जानकारी लोगों तक पहुंचाई जा रही है कि 12 अगस्त की रात को रात नहीं होगी। आधे से ज़्यादा लोगों को चिंता है की अब रात नहीं होगी तो सोयेंगे कैसे. लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात तो ये है कि क्या ऐसा सचमुच होगा।

क्या प्रकृति का नियम उस एक दिन के लिए बदल जाएगा। क्या उस दिन सूरज ही नहीं डूबेगा। वैसे ऐसा होना तो असंभव है कि सूरज डूबे ही न। सोशल मीडिया पर ये दावा किया गया कि उस रात को दिन की तरह उजाला होगा। पूरा अंतरिक्ष उजाले से भरा रहेगा। यहाँ तक की नासा ने भी इस चमत्कार के इतिहास में पहली बार होने का दावा किया है।

आपको बता दें कि उस रात कोई चमत्कार नहीं होने वाला लेकिन ये जरूर होगा कि आपको आम रात से ज़्यादा रोशनी उस रात को देखने को मिले और ऐसा इसलिए की 12 अगस्त की रात को एक खगोलीय घटना होगी जिसे आम भाषा में तारों का टूटना, उल्कापात कहते हैं। वैसे साल में तीन बार होते हैं और 12 अगस्त उसी का एक हिस्सा है।

नासा की वेबसाइट के अनुसार 12 अगस्त की रात को उल्कापात होगा और इस साल गिरने वाले उल्का पिंड की मात्रा पहले के मुकाबले ज्यादा होगी। नासा के मुताबिक इस साल 11-12 अगस्त की मध्यरात्रि में प्रति घंटे 200 उल्का पिंड गिर सकते हैं। जिसके चलते रात में थोड़ा उजाला तो दिखेगा लेकिन इतना ज़्यादा भी नहीं होगा कि दिन वाली फीलिंग आए और वेबसाइट पर कहीं भी इस बात की कोई पुष्टि नहीं है कि ये इतिहास का सबसे ज़्यादा उजाला देने वाला उल्कापात होगा।

इसके अलावा एक अन्य वेबसाइट ऐस्ट्रोनॉमी फिजिक्स डॉट कॉम के मुताबिक 12 अगस्त की रात को उल्कापिंडों की बारिश होगी। इस वेबसाइट का मानना है कि इससे होने वाली रोशनी से उस रात में सबसे ज़्यादा उजाला होगा और ये अब तक की सबसे चमकीली रात होगी क्योंकि इस रात गिरने वाले उल्का पिंडों की संख्या ज़्यादा होगी।

12 अगस्त को लेकर जो भी तथ्य सामने आए है वो सिर्फ इसी बात को बताते हैं कि उस दिन उल्का पिंडों की बारिश होगी जिसके कारण उजाला होगा। इन्हें हम आम भाषा में तारों का टूटना कहते हैं और ये कुछ ज़्यादा मात्रा में होगी जिसके चलते ज़्यादा रोशनी होगी। हम इसे चमत्कार न मानकर एक खगोलीय घटना मान सकते हैं।

इन पांच राशियों के लोग होते हैं सबसे ज्यादा विश्वसनीय

भारतीय ज्योतिष में 12 राशियों में से 5 राशियां ऐसी बताई गईं हैं। जिन राशियों के लोगों पर भरोसा किया जा सकता है।

पहली राशि है ‘वृषभ’, इस राशि के जातक बेहद भरोसेमंद होते हैं। इस राशि के जातक अपने प्रिय की खुशियों का ख्याल तो रखते ही हैं, तो वहीं उनकी भावनाओं को भी बेहतर तरीके से समझते हैं।

दूसरी राशि है ‘कर्क’ इस राशि के जातक अमूमन किसी से ऐसी बातें नहीं कहते, जिससे किसी को हानि हो। यह भी बेहद भरोसेमंद व्यक्तित्व के माने जाते हैं। ऐसे लोगों से विवाह करना यानी अपनी जिंदगी में खुशियों को सदाबहार रखने जैसा ही है।

तीसरी राशि है ‘तुला’, इस राशि के जातक भावनात्मक रूप से अपने समवन के साथ हमेशा जुड़े रहते हैं। रोमांटिक व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति काफी विश्वसनीय होते हैं।

चौथी राशि है ‘वृश्चिक’, इस राशि के जातक छोटी-छोटी खुशियों को बड़ा बनाने की कोशिश में दिन-रात कार्यरत रहते हैं। यह अपने लोगों से काफी जुड़ाव महसूस करते हैं।

और पांचवीं राशि है ‘मकर’ इस राशि के जातक पूरी एकाग्रता से जुड़े रिश्ते को निभाते हैं। भरोसेमंद होने के साथ ये जातक रिश्ते को लेकर गंभीर होते हैं।

रक्षाबंधन के रंग में भद्रा नक्षत्र का भंग, होते हैं शुभ काम वर्जित

हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है कि किसी काम को शुभ मुर्हूत में करने पर उसका परिणाम भी शुभ होता है। कहते हैं कि अशुभ मुर्हूत में किये गये कामों का परिणाम बुरा ही आता है।

भद्रा के समय में किसी शुभ काम की शुरुआत या समाप्ति अशुभ मानी जाती है। इसलिए भद्रा काल की अशुभता को मानकर कोई भी आस्थावान व्यक्ति इस समय में शुभ काम नहीं करता। 7 अगस्त को रक्षाबंधन है और इस दिन भद्रा मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है यानी भद्रा का समय होने पर राखी नहीं बांधी जाती है।

अब सवाल है कि आखिर भद्रा नक्षत्र क्यों अशुभ है। पुराणों की माने तो भद्रा भगवान सूर्यदेव की पुत्री और शनि देव की बहन है। शनि की तरह ही इसका स्वभाव भी कठोर बताया गया है।

उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही भगवान ब्रह्मा ने उन्हें कालगणना या पंचांग के एक प्रमुख अंग विष्टि करण में स्थान दिया। भद्रा की स्थिति में कुछ शुभ कार्यों, यात्रा और उत्पादन आदि कामों को निषेध माना गया, लेकिन इस समय में तंत्र कार्य, अदालती और राजनीतिक चुनाव कार्य सफलता देने वाले माने गए हैं।

यूं तो भद्रा का शाब्दिक अर्थ है कल्याण करने वाली, लेकिन इस अर्थ के विपरीत भद्रा या विष्टि करण में शुभ कार्य निषेध बताए गए हैं। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार अलग-अलग राशियों के अनुसार भद्रा तीनों लोकों में घूमती है। जब यह मृत्युलोक में होती है, तब सभी शुभ कार्यों में बाधक या या उनका नाश करने वाली मानी गई है।

जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ व मीन राशि में विचरण करता है और भद्रा विष्टि करण का योग होता है, तब भद्रा पृथ्वीलोक में रहती है। इस समय सभी कार्य शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इसके दोष निवारण के लिए भद्रा व्रत का विधान भी धर्मग्रंथों में बताया गया है।

गौ का महत्व हिन्दुओ के लिए क्यों है

सनातन धर्म में गाय को बहुत ही पवित्र और पूजा योग्य माना जाता है सिर्फ गाय ही नहीं बल्कि गाय से मनुष्यों को मिलनेवाली हर चीज़ बेहद पवित्र होती है.

कहा जाता है कि गाय माता में तैंतीस कोटी देवी-देवताओं का वास होता है, और फिर कृष्ण भगवान् को तो कितनी प्रिय है गौ माता |
जो इंसान गौ सेवा करता है उसके जीवन से एक-एक करके सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं.

गाय माता जिस स्थान पर खड़े रहकर अपने आपको सुरक्षित महसूस करतीं है उस स्थान से सरे वास्तु दोष दूर हो जाते है |

गाय माता के गोबर से बने उपलो से रोजाना नियमित रूप से दुकानों में,घर में, मंदिर आदि में धुप करने से वातावरण शुद्ध हो जाता है और भगवान् स्वयं प्रसन्न होते है|

काली गाय की पूजा करने से नौ ग्रहों की पीड़ा शांत होती है. जो ध्यानपूर्वक धर्म के साथ गौ सेवा करता है उनको शत्रु दोषों से छुटकारा मिलता है और उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती हैं.

गाय को इस धरती पर साक्षात देव स्वरुप माना जाता है. गाय माता के खुर्र में नागदेवता, गोबर में लक्ष्मी जी, मुत्र में गंगाजी का वास होता है. जबकि गौ माता के एक आंख में सूर्य व दूसरी आंख में चंद्र देव का वास होता है.

गाय माता की पूंछ में हनुमानजी का वास होता है. किसी व्यक्ति को बुरी नज़र लग जाए तो गौ माता की पूंछ से झाड़ा लगाने पर नज़र उतर जाती है.

गाय माता की पीठ पर एक उभरा हुआ कुबड़ होता है. उस कुबड़ में सूर्य केतु नाड़ी होती है. रोजाना सुबह आधा घंटा गौ माता की कुबड़ में हाथ फेरने से रोगों का नाश होता है.

गाय को अन्नपूर्णा देवी और कामधेनु माना जाता है. मान्यता है कि गौ माता का दूध अमृत के समान है जो रोगों की क्षमता को कम करता है.

गाय माता से ही मनुष्यों के गौत्र की स्थापना हुई है. गौ माता चौदह रत्नों में एक रत्न है. कहा जाता है कि गाय को चारा खिलाने से उनका भोग लगाने से तैंतीस कोटी देवी देवताओं को भोग लग जाता है.

गाय माता के दूध, घी, मक्खन, दही, गोबर और गोमुत्र से बने पंचगव्य हजारों रोगों की दवा है. इसके सेवन से असाध्य रोग मिट जाते हैं. इन पंचगव्य के बिना पूजा पाठ हवन सफल नहीं होते हैं.

तन-मन-धन से जो मनुष्य गाय की सेवा करता है, उसे गौ लोकधाम में वास मिलता है. गौ माता को घर पर रखकर सेवा करने वाला इंसान सुखी आध्यात्मिक जीवन जीता है और उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती.

अगर आपकी भाग्य रेखा सोई हुई है तो अपनी हथेली में गुड़ को रखकर गाय को चटाये. गाय अगर अपने जीभ से आपकी हथेली पर रखे गुड़ को चाटती है तो इससे आपकी सोई हुई किस्मत खुल सकती है.

गाय को जगत जननी कहा जाता है उसे पृथ्वी का रुप भी माना जाता है इसलिए गाय के चारो चरणों के बीच से निकल कर परिक्रमा करने से इंसान भय मुक्त हो जाता है. गौ माता कि सेवा परिक्रमा करने से सभी तीर्थो के पुण्यों का लाभ मिलता है.

गाय एक चलता फिरता मंदिर है. हम रोजाना तैंतीस कोटि देवी-देवताओं के मंदिर जा कर उनके दर्शन नहीं कर सकते पर गौ माता के दर्शन से सभी देवी-देवताओं के दर्शन हो जाते हैं.

कोई भी शुभ कार्य अटका हुआ हो और बार-बार प्रयत्न करने पर भी सफल नहीं हो रहा हो, तो कहा जाता है कि गाय के कान में अपनी परेशानी कहने से रुका हुआ काम बनने लगता है.

मान्यता है कि जब गाय अपने बछड़े को जन्म देती है तब का पहला दूध बांझ स्त्री को पिलाने से उनका बांझपन मिट जाता है.

गाय माता के दूध से बने एक चम्मच घी को हवन में इस्तेमाल करें से हजारो टन ऑक्सीजन पैदा होती है |

गाय माता हमे अपना सब कुछ देकर भी हमसे किसी चीज़ की उम्मीद नही करती जो व्यक्ति गाय माता की इन सब कथनों को सत्य मानते है उनलोगों के लिए तो गाय माता पूजनीय है और जो नही मानते उनके लिए गाय माता एक जानवर से ज्यादा कुछ नही है | आज हम देखते है की इस संसार में गाय माता की हालात कितनी दैयनीय है इसके पीछे का कारण हम इंसान ही तो है |