इन 5 बातों का पूजा में रखें ध्यान, पैसों की होगी बारिश

माना जाता है जिस व्यक्ति पर मां लक्ष्मी की कृपा होती है, उसे कभी भी धन धान्य और सुख समृद्धि की कमी नहीं होती है। आज से महालक्ष्मी व्रत शुरू हो रहे हैं। आने वाले 16 दिनों तक हर घर में ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाएगी, लेकिन इन दिनों पूजा करते समय खास ध्यान रखना पड़ता है।

छोटी सी चूक भी आपकी पूरी मेहनत बर्बाद कर सकती है।इस समय मां लक्ष्मी के रूप श्रीधन लक्ष्मी, श्रीगज लक्ष्मी, श्रीवीर लक्ष्मी, श्री ऐश्वर्य लक्ष्मी मां, श्री विजय लक्ष्मी मां, श्री आदि लक्ष्मी मां, श्री धान्‍य लक्ष्मी मां और श्री संतान लक्ष्मी मां की पूजा करनी चाहिए।

घर के मंदिर में कभी भी न रखें इन चीजों को, आती है दरिद्रता

घर में बना हुआ मंदिर उस घर में रहने वाले सदस्यों के सकारात्मक ऊर्जा का प्रमुख केन्द्र बिन्दु होता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार पूजा का घर हमेशा ईशान कोण में होना चाहिए। इसके अलावा घर के मंदिर में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए।

घर के मंदिर में एक ही भगवान की दो तस्वीरें या मूर्तियां नहीं होनी चाहिए। शास्त्रों मे ऐसा होने से शुभ कार्य को करने में परेशानियां आती है,इसलिए जहां तक संभव हो एक भगवान की एक ही तस्वीर लगाएं।घर का पश्चिम और दक्षिण कोना वास्तुशास्त्र के नियम से अशुभ फल का कारण माना जाता है इसलिए पूजा घर पूर्व या उत्तर दिशा में ही होना चाहिए।

धारी माता का मंदिर – इस चमत्कारी मंदिर में देवी माँ की मूर्ति दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है .

भारत रहस्यमयी और चमत्कारिक मंदिरों का देश है.

भारत के हर क्षेत्र में एक प्राचीन मंदिर है और उससे जुड़े कई रहस्य व चमत्कार की बाते ,किस्से व कहानियाँ लोगो से सुनने को मिलती है.

आज हम बात करेंगे एक ऐसे ही चमत्कारिक मंदिर के बारे में, कहते हैं कि मां के चमत्कार से आए दिन लोग परिचित होते रहते हैं वह शक्तिशाली है और लोगों को अपने होने का अहसास कराती रहती है। जहाँ देवी की मूर्ति एक दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है.

इस देवी को पहाड़ों और तीर्थयात्रियों की रक्षक देवी माना जाता है। महा विकराल इस काली देवी की मूर्ति स्थापना और मंदिर निर्माण की भी रोचक कहानी है। मूर्ति जाग्रत और साक्षात है।

तो आइए जानते हैं कहाँ है यह मंदिर –

यह चमत्कारिक मंदिर धारी माता का है, जो भारत में बद्रीनाथ व केदारनाथ मार्ग में लगभग 15 किमी दूर अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है.
यहाँ धारी माता की मूर्ति एक दिन में तीन बार अपना रूप बदलती हैं.
ये मान्यता है कि धारी माता को उत्तराखंड क्षेत्र की रक्षक मानी जाती है और इस सिद्धपीठ में हर रोज अनेक चमत्कार और अद्भूत घटनाएं होने की बात कही जाती है.
इसी जगह पर महाकवि कालिदास को माता काली की कृपा और ज्ञान प्राप्त हुआ था.

इस शक्ति पीठ को प्राचीन समय में कालीमठ के नाम से पुकारा जाता था और इसका वर्णन पुराणों में भी किया गया है.
मान्यताओं के अनुसार कालीमठ के मंदिर में स्थापित मूर्ति का सिर वाला उपरी हिस्सा बाढ़ के कारण अलकनंदा नदी में बहते हुए धारी नामक गांव में चला आया था.
इस गांव में रहने वाले निवासी और धुनार जाति को यह सिर वाला हिस्सा मिला, जिसको इन लोगो ने पास स्थित एक ऊंची चट्टान पर रखकर स्थापित कर दिया.
धारी गाँव में देवी की स्थापना होने से इस देवी को धारी माता के नाम से पुकारा जाता है.

अलकनंदा नदी में जल-विद्ययुत परियोजना निर्माण के कारण धारी माता की मूर्ति को इस मंदिर के पुजारी द्वारा नदी के ऊपर दूसरा मंदिर बनवाकर स्थापित करा दिया गया .
कथा मान्यता और लोगो की बातों में सच क्या है ये बता पाना असंभव है लेकिन माता की मूर्ति का रूप बदलना और मंदिर में चमत्कारों का होना सत्य है.

सिमसा माता के मंदिर के फर्श पर सोने से होतीं है संतान की प्राप्ति !

सिमसा माता के मंदिर(simsa mata mandir) में सोने पर आते हैं सांकेतिक स्वप्न

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के लड़-भड़ोल तहसील के सिमस नामक खूबसूरत स्थान पर स्थित माता सिमसा मंदिर(simsa mata mandir) दूर दूर तक प्रसिद्ध है। माता सिमसा या देवी सिमसा को संतान-दात्री के नाम से भी जाना जाता है।

हर वर्ष यहां निसंतान दंपति संतान पाने की इच्छा ले कर माता के दरबार में आते हैं। नवरात्रों में होने वाले इस विशेष उत्सव को स्थानीय भाषा में सलिन्दरा कहा जाता है। सलिन्दरा का अर्थ है स्वप्न आना होता है।

नवरात्रों में निसंतान महिलायें मंदिर(simsa mata mandir) परिसर में डेरा डालती हैं और दिन रात मंदिर के फर्श पर सोती हैं ऐसा माना जाता है कि जो महिलाएं माता सिमसा के प्रति मन में श्रद्धा लेकर से मंदिर में आती हैं माता सिमसा उन्हें स्वप्न में मानव रूप में या प्रतीक रूप में दर्शन देकर संतान का आशीर्वाद प्रदान करती है।

स्वप्न में लकड़ी या पत्थर दिखने पर नहीं होती है संतान

मान्यता के अनुसार, यदि कोई महिला स्वप्न में कोई कंद-मूल या फल प्राप्त करती है तो उस महिला को संतान का आशीर्वाद मिल जाता है। देवी सिमसा आने वाली संतान के लिंग-निर्धारण का भी संकेत देती है।

जैसे कि, यदि किसी महिला को अमरुद का फल मिलता है तो समझ लें कि लड़का होगा। अगर किसी को स्वप्न में भिन्डी प्राप्त होती है तो समझें कि संतान के रूप में लड़की प्राप्त होगी। यदि किसी को धातु, लकड़ी या पत्थर की बनी कोई वस्तु प्राप्त हो तो समझा जाता है कि उसके संतान नहीं होगीकहते हैं कि निसंतान बने रहने का स्वप्न प्राप्त होने के बाद भी यदि कोई औरत अपना बिस्तर मंदिर परिसर से नहीं हटाती है तो उसके शरीर में खुजली भरे लाल-लाल दाग उभर आते हैं।

उसे मजबूरन वहां से जाना पड़ता है। संतान प्राप्ति के बाद लोग अपना आभार प्रकट करने सगे-सम्बन्धियों और कुटुंब के साथ मंदिर में आते हैं। यह मंदिर बैजनाथ से 25 किलोमीटर तथा जोगिन्दर नगर से लगभग 50 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।

Read more … कीजिए बजरंगबली के ये उपाय -होगी अचानक धन की प्राप्ति मिलेगी सभी कर्जो से मुक्ति |

भगवान शिव की पुत्री का चमत्कारी मंदिर, कोई नहीं गया आज तक यहां से खाली हाथ !

भगवान शिव की पुत्री - lord shiva daughter

भगवान शिव की पुत्री का चमत्कारी मंदिर

भगवान शिव को नीलकंठ एवम अनेको नाम से जाना जाता है, उनकी महिमा की गाथा निराली है. भगवान शिव के समान ही उनके सन्तान भी पराक्रमी एवम दिव्य है.

भगवान शिव के दो पुत्रो कार्तिकेय एवम उनसे छोटे गजानन गणेश के विषय में तो हर कोई परिचित होगा.

परन्तु आज हम आपको भगवान शिव की पुत्री के लीला के सम्बन्ध में बताने जा रहे है, भगवान शिव एवम माता पार्वती की अंश तथा अपने दोनों भ्राताओं की लाडली है यह देवी.

मान्यता है की मोक्ष की नगरी कहे जाने वाले हरिद्वार में भगवान शिव lord shiva की पुत्री का एक चमत्कारी मंदिर स्थापित है, यहां जिस किसी भी भक्त ने अपनी इच्छा भगवान शिव की पुत्री के समक्ष रखा है वह अवश्य ही पूरी हुई है.

आज तक यहां से कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं लोटा है. हरिद्वार में स्थिति माँ मनसा देवी का मंदिर यहां होने वाले चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है. माँ मनसा देवी अपने भक्तो की मुरादे अवश्य पूरी करती है.

माँ मनसा देवी भगवान शिव की मानस पुत्री कहलाती है. इनके पति का नाम जगत्कारु है तथा पुत्र आस्तिक है. माँ मनसा देवी को नाग देवता वासुकि की बहन के नाम से भी जाना जाता है.