राशि अनुसार जाने क्या कमी है आप में जो रोक रही है आपको सफल इंसान बनने से !

ज्योतिष शास्त्र वास्तव में एक अनोखी विद्या है तथा इस विद्या का कोई अन्य तोड़ नहीं. इस विद्या के ज्ञान से सिर्फ कुंडली देख आप किसी अनजान व्यक्ति के विषय में एक-एक बात ज्ञात कर सकते हो.

ज्योतिष शास्त्र वैसे तो अविश्वसनीय प्रतीत होता है परन्तु जब ज्योतिष शास्त्र से वास्ता पड़ता है तो इसकी वास्तविकता तथा इसके परिणाम को देख हर कोई दंग रह जाता है.
ज्योतिष शास्त्र की हर बात एकदम सही और विश्वसनीय होती है.

किसी व्यक्ति के कुंडली तथा उसके जन्म के दिनाक व समय के आधार पर की गई भविष्यवाणी गलत नही सकती है. यह सिर्फ दो ही स्थिति में गलत हो सकती है एक तो यदि आपके जन्म का समय व दिनांक सही नही है तथा दूसरी यदि किसी व्यक्ति को ज्योतिष का अल्प ज्ञान है.

किसी व्यक्ति का स्वभाव उसके राशि के आधार पर आसानी से ज्ञात किया जा सकता है. ये राशिया व्यक्ति के जन्म पर आधारित होती है. आज हम आपको राशि के आधार पर ये बताने जा रहे है की किसी व्यक्ति के राशि के अनुसार उसकी कौन सी कमी होती है जो उसका जीवन भर पीछा करती है. जिसे त्यागने पर वह सब कुछ प्राप्त कर सकता है.

इस कारण से मिलता है किन्नर रूप में जन्म, शास्त्रो में किन्नरो से जुड़ा विचित्र रहस्य !

किन्नर होते तो हमारे जैसे ही परन्तु उनकी शारीरक बनावट कुछ इस प्रकार की होती है की समाज में उन्हें तिरछी नजरो से देखा जाता है. हमारे समाज में इन्हें उचित मान समान तो नहीं दिया जाता परन्तु हर सुख के कार्यो में इन्हें जरूर बुलाया जाता है.

इनके शरीरिक बनावट के कारण कितने ही लोग द्वारा इनका मजाक बनाया जाता है. परन्तु क्या आप जानते है की शास्त्रो के अनुसार किन्नरो को साक्षात् भगवान का आशीर्वाद माना गया है.

ये लोग जिस व्यक्ति पर खुश हो जाए अथवा जिनको ये अपना आशीर्वाद देदे उनकी सोई हुई किस्मत जाग जाती है.

फिर भी कहि न कहि आपके मन में यह सवाल उठता होगा की आखिर क्यों किन्नर मनुष्य के रूप में धरती में जन्म लेते है. आइये आज हम आपको किन्नरो से जुड़े इन रहस्यो के बारे में बताते है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि जब किसी की कुंडली में आठवे घर में शुक्र और शनि मौजूद हो व इन्हें गुरु व चंद्र नही देख रहे हो वह व्यक्ति नपुंसक हो जाता है.

कुंडली के जिस ग्रह में शुक्र बैठा हो या उसके आठवे व छठे ग्रह में शनि बैठा हो तो व्यक्ति में प्रजनन की क्षमता कम हो जाती है. अगर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो इससे बचा जा सकता है.

आश्चर्यजनक रूप से होगी धन में बढोत्तरी, यदि घर में हो ये 11 शक्ति यंत्र समान !

तन्त्र तथा यन्त्र हमारी ऋषि मुनियो ने जन कल्याण के लिए अपनी कठिन तपस्या अनुष्ठानों के बल पर उतपन्न किया था. तंत्र एवम यंत्रो में अत्यधिक एवम अलौकिक शक्तियां होती है जो अपना प्रभाव तुरन्त दिखाती है.

तन्त्र शक्तियों की सहायता से मनुष्य अपने हर प्रकार के दुखो से मुक्ति प्राप्त कर सकता है और अपनी हर समस्या का हल ज्ञात कर सकता है. तंत्र शास्त्र में 11 ऐसे वस्तुओ का वर्णन किया गया है जिनकी सहायता से व्यक्ति को कभी धन की कमी का समाना नहीं करना पड़ता.

यदि इन 11 अद्भुत वस्तुओ को एक शुभ समय में घर में स्थापित किया जाए तो माता लक्ष्मी की तुरन्त कृपा प्राप्त होती है तथा व्यक्ति की आय में वृद्धि होती है. अतः आज हम आपको इन 11 महत्वपूर्ण वस्तुओ के बारे में बताने जा रहे है जो आपकी आर्थिक स्थिति को पहले से बेहतर बना देंगे.

हत्था जोड़ी :-

तंत्र शास्त्रो में हत्था जोड़ी का एक विशेष स्थान है, इसे साक्षात् माँ कामाख्या देवी एवम माँ माहाकाली का रूप माना गया है. हत्था जोड़ी दिखने में किसी मनुष्य के पैर अथवा हाथ के समान लगता है परन्तु वास्तविकता में यह एक पौधे की जड़ है जो बहुत ही दुर्लभता से पाया जाता है.

सिर्फ इन तीन चीज़ों से बना ले दुरी, दुनिया होगी आपके कदमो में”चाणक्य नीति” !

चाणक्य से महान राजनीतिज्ञ एवम नीतिशास्त्र का लोहा पूरी दुनिया मानती है. उनकी हर बात आज भी उनती ही प्रांसगिक है जिनती की हजारो साल पहले थी. चाणक्य ने अपने जीवन से जुड़े अनुभवो के ज्ञान को जिस पुस्तक में वर्णित किया था उसी के चौदहवे अध्याय में बताई तीन महत्वपूर्ण बाते आज हम आपको बताएंगे.

इन बातो को यदि कोई अपने जीवन में अपनाले तो कोई भी बाधा एवम समस्या व्यक्ति को सफलता को प्राप्त करने से नहीं रोक सकता .

” ये अच्छा होगा यदि आप राजा, अग्नि और स्त्री से उचित दुरी बना कर रखे. और भी ध्यान रखे की आप इनसे कुछ ज्यादा ही दूर न हो जाए अन्यथा आप इनसे मलने वाले लाभ से वंचित रह जाएंगे.”

आइये इस बात को अब थोड़ी गहराई से समझते है और इसे आज के परिपेक्ष्य में स्थापित करने का प्रयास करते है.

पहले तो हम राजा, अग्नि एवम स्त्री का अर्थ समझते है :-

राजा से अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से है जिसके पास को बड़ा पद हो, कोई ऐसा व्यक्ति जिसके पास कुछ करने का विशेष अधिकार हो, जैसे की किसी कंपनी का बॉस या मैनेजर, देश का नेता, मंत्री इत्यादि.

तथा अग्नि का आशय ही रिश्क से, और अंत में स्त्री से अभिप्राय है भोग विलास या सुख सुविधाओ से भरी चीज़ों से.

आखिर क्यों बनाये राजा से उचित दुरी ?

जब दुर्योधन ने चली एक ऐसी चाल, जिससे पांडव भी हो गये थे चारो खाने चित्त !

जब महाभारत युद्ध आरम्भ हो रहा था तब कौरव और पांडवो दोनों ने अपने अपने दूत इधर उधर के राजाओ के पास सहायता के लिए भेजी. मद्रराज शल्य को भी जब इस सुचना मिली तो वे अपने पुत्रो एवम अक्षोहणी सेना के साथ पांडवो के पास चले.

शल्य की बहन माद्री पाण्डु की पत्नी थी इसी कारण नकुल एवम सहदेव उनके सगे भांजे थे. पांडवों को विश्वास था कि शल्य उनके पक्ष में ही रहेंगे.

शल्य की विशाल सेना दो-दो कोस पर पड़ाव डालती चल रही थीं. दुर्योधन को समाचार पहले ही मिल गया था. उसने मार्ग में जहां-जहां सेना के पड़ाव के उपयुक्त स्थानों पर कारीगर भेजकर सभा-भवन एवं निवास स्थान बनवा दिए.हर पड़ाव पर बेहतर भोजनादि की व्यवस्था करवा दी गई थी.

मद्रराज शल्य और उनकी सेना का मार्ग में सभी पड़ावों पर भरपूर स्वागत हुआ. शल्य यही समझते थे कि यह सब व्यवस्था युधिष्ठिर ने की है.

हस्तिनापुर के पास पहुंचने पर विश्राम स्थलों उसे देखकर शल्य ने पूछा-‘युधिष्ठिर के किन कर्मचारियों ने यह व्यवस्था की है? उन्हें ले आओ. मैं उन्हें पुरस्कार देना चाहता हूं.’

भूल से भी न रखे अपने पर्स में इन पाँच चीज़ों को, होता है धन का नाश ”वास्तु शास्त्र” !

हर किसी के जेब में पर्स तो अवश्य ही रहता है, आखिर पर्स में ही तो आप पैसे रखते है जिससे आप जरूरत अथवा पसन्द को चीज़ों को पूरा करते है. हर व्यक्ति की चाहत होती है की उसका पर्स रुपयो से भरा रहे.

परन्तु आपका पर्स तभी रुपयो से भरा हो सकता है जब उसमे रूपये टिके रहे. परन्तु अक्सर ऐसा होता है की आज आपका पर्स पैसो से भरा है तो कल उसमे कुछ चिल्लर के सिवाय कुछ नई रहता.
और ऐसा तभी सम्भव है जब आप पर माता लक्ष्मी की कृपा बनी हुई हो,

तथा ज्योतिष शास्त्र में अनेक ऐसी बाते बताई गई है जो बताती है की कैसे आप माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकते है तथा कौन सी चीज़ों से माता लक्ष्मी नाराज हो जाती है.

आज हम आपको पांच ऐसी चीज़ों को बारे में बताने जा रहे है जिन्हें आप आपको अपने पर्स में नही रखना चाहिए, क्योकि ये चीज़े दरिद्रता को न्योता देती है.

1 . ज्योतिष शास्त्रो के अनुसार सबसे पहली और बहुत ही महत्वपूर्ण चीज़ है की आपका पर्स फटा नही होना चाहिए. फ़टे हुए पर्स को लेकर यह मान्यता है की यह आर्थिक नुक्सान को लेकर आता है तथा पर्स में रूपये टिकते नहीं है. इसलिए यदि आपका भी पर्स फट रहा हो तो उसे शीघ्र अति शीघ्र बदल दे.

आखिर क्यों पति अपनी पत्नियों से डरते है, जाने पुराणों में छिपी इस राज से जुडी कथा !

पुलिस हो या मंत्री, कोई अफसर हो या अधिकारी सभी चाहे बाहर अपना प्रभाव क्यों न दिखाए परन्तु जब आप घर में आते है तो आपकी सारी शक्ति सारा सामर्थ्य छू मंतर अर्थात गायब हो जाता है क्योकि वहां आपकी पत्नी मौजूद होती है तथा उनके आगे आपकी एक भी नहीं चलती.

पति पत्नियों के ऊपर बहुत से जोक भी बनते है परन्तु आखिर इन सब के पीछे क्या वजह होगी आपने कभी सोचा है.

यदि नहीं तो आज हम आपको पौराणिक कहानियो के बारे में बताने जा रहे है जिसमे आपके पति पत्नी से जुड़े हर प्रश्नों के उत्तर छिपे हुए है.

संसार में स्त्री की उत्पत्ति का श्रेय महादेव शिव को जाता है उन्होंने अर्धनारीश्वर का रूप धारण कर सृष्टि में स्त्री को उत्पन किया तथा जब उस स्त्री को उन्होंने पत्नी में रूप में प्राप्त किया तब उन्हें स्त्री शक्ति का बोध हुआ.

स्त्री शक्ति का अंदाजा भगवान शिव को तब हुआ जब उन्होंने एक बार देवी सती को मायके जाने से मना कर दिया. देवी सती इस बात के लेकर बहुत क्रोधित हुई तथा उन्होंने विकराल रूप धारण कर 10 महाविद्याओ को उत्पन्न किया.

10 महाविद्याओ ने भगवान शिव पर आक्रमण कर दिया, अंत में भगवान शिव को उनसे बचते हुए माता सती के चरणों में आना पड़ा. यानी की देवी सती एवम भगवान शिव ने इस बात को तय कर लिया की पति एवम पत्नी में हमेसा पत्नी का वर्चस्व रहेगा.

भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु भी पत्नी के प्रभाव से अछूते नहीं है. वैसे तो अक्सर आपने चित्रो में देखा होगा की माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के चरणों को दबाती है परन्तु एक बार दुर्वाशा ऋषि के श्राप के कारण देवी लक्ष्मी वैकुंठ धाम छोड़कर अपने मायके सागर के अंदर चली गयी.

इसके बाद पुरे देवलोक के साथ ही वैकुण्ठलोक में भी अन्धेरा छा गया. वेकुंठ का सारा वैभव गायब हो गया तथा वहाँ अब चमक नही रही. इसके बाद सागर मंथन द्द्वारा लक्ष्मी पुनः प्रकट हुई तथा भगवान विष्णु ने फिर उन्हें नाराज करने का जोखिम नही लिया.

कहते है कि हर स्त्री में देवी लक्ष्मी का वास होता है और हर स्त्री गृहलक्ष्मी होती है. और यह जानती है की इन्ही के कारण घर में सुख शांति हो सकती है अतः यह अपना लोहा मनवाती है.

श‌िव और व‌िष्‍णु जब पत्नी की ताकत को स्वीकार करते हैं तो भला ब्रह्मा जी इससे कैसे बच सकते हैं. त्र‌िदेवों में सृष्ट‌ि कर्ता के पद पर व‌िराजमान ब्रह्मा जी देवी सरस्वती की सत्ता को स्वीकार करते हैं क्योंक‌ि एक बार पुष्कर में ब्रह्मा जी ने यज्ञ का आयोजन क‌िया और देवी सरस्वती के यज्ञ स्‍थल तक पहुंचने में समय लग गया तो गायत्री नाम की कन्या से व‌िवाह कर ल‌िया.

देवी सरस्वती ने जब ब्रह्मा के साथ गायत्री को देखा तो ब्रह्मा जी को शाप दे द‌िया क‌ि आपकी पूजा कहीं नहीं होगी और रुठकर रत्नाग‌िरी पर्वत पर चली गई. यहां देवी सरस्वती की साव‌ित्री रूप में पूजा होती है. यानी पत्‍नी रुठी तो सब रुठे इसल‌िए पत्‍नी को मनाए रखने में ही पत‌ि अपनी भलाई मानते हैं.

भगवान शनि देव के प्रकोप से समस्त दुनिया डरती है परन्तु शनि देव को भी अपनी पत्नी से भय लगता है. इसलिए ज्योतिषशास्त्र में भी शनि देव को प्रसन्न करने के लिए एक उपाय के अनुसार उनकी पत्नी की पूजा बताई गयी है. इनकी पत्नी के नाम का जाप शनि देव के कुदृष्टि से शीघ्र मुक्ति दिलाता है.

इसका एक कारण यह भी है की शनि देव की वर्क दृष्टि उनके पत्नी के श्राप के कारण ही हुई है. अतः शनि देव की पत्नी का जप लाभदायक है अर्थात जब पत्नी क्रोधित होती है तब वह विनाशकारी हो जाती है इसका एक उदाहरण माँ काली भी है.

माता सीता से जुड़ा यह अनोखा राज जो श्री राम ने सिर्फ हनुमान जी को ही बताया था !

रामायण की कथा तो आप बचपन से ही सुनते और पढ़ते आ रहे है परन्तु आज हम आपको रामायण से जुडी एक ऐसी कथा के बारे में बताने जा रहे है जिस से आप शायद ही परिचित हो.

तुलसीदास द्वारा प्रभु श्री राम की कथा का वर्णन करते हुए यह बात कहि गई देवी सीता के स्वयम्बर से पूर्व भगवान श्री राम माता सीता से जनकपुर के पुष्पवाटिका में मिल चुके थे.

जनकपुर वर्तमान में नेपाल में स्थित है, भगवान श्री राम गुरु वशिष्ठ के आज्ञा से पूजा के लिए पुष्प लाने पुष्प वाटिका में पहुचे थे. ठीक उसी समय माता सीता भी पुष्प वाटिका में पहुची. माता सीता भगवान श्री राम को देखकर उन पर मोहित हो गयी भगवान श्री राम भी उन्हें देखकर आकर्षित हो गए.

उसी समय भगवान श्री राम को माता सीता ने अपने पति के रूप में चुन लिया. परन्तु तभी माता सीता को एक चिंता सताने लगी और वह यह थी की उनके विवाह के लिए पिता जनक द्वारा रखा गया शिव धनुष.

शर्त यह थी की जो भी उस शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा उसी को माता सीता वरमाला डालेगी. अगर श्री राम इस शर्त को पूरा नही कर पाए तो राम उन्हें पति के रूप में प्राप्त नही हो पाएंगे.

देवी सीता अपनी इस शंका को दूर करने के लिए अपने आराध्य माता पार्वती के पास गयी.

आप भी हो सकते है धनवान, यदि इस श्रावण महादेव शिव को कराये इन 7 चीज़ो से अभिषेक !

रुद्राभिषेक से तात्पर्य है कि रुद्र मंत्रों से भगवान रुद्र का स्नान, यह स्नान भगवान मृत्युंजय शिव को कराया जाता है. इसे रुद्राभिषेक के रुप में ज्यादातर पहचाना जाता है. अभिषेक के कई प्रकार तथा रुप होते हैं. भगवान रुद्र का अभिषेक यानि कि शिवलिंग पर रुद्रमंत्रों के द्वारा स्नान कराना.

“रुद्राभिषेक” शिव आराधना का सर्वश्रेष्ठ विधान माना गया है. शास्त्रों में भगवान शिव को जलधारा अत्यन्त प्रिय है. भगवान सदाशिव का विभिन्न प्रकार से पूजन करने से विशिष्ठ लाभ की प्राप्ति होती हैं.यजुर्वेद में बताये गये विधि से रुद्राभिषेक करना अत्यंत लाभप्रद माना गया हैं.

लेकिन जो व्यक्ति पूर्ण विधि-विधान से पूजन को करने में असमर्थ हैं अथवा विधान से परिचित नहीं हैं वे लोग केवल भगवान सदाशिव के षडाक्षरी मंत्र- “ॐ नम:शिवाय” का जप करते हुए रुद्राभिषेक तथा शिव-पूजन कर सकते हैं, जो बिलकुल ही आसान है.

यह अभिषेक जल और दूध के अतिरिक्त कई तरल पदार्थों से किया जाता है. आइए जानते हैं किस धारा के अभिषेक से क्या फल मिलता है-

अगर नही हो रही मनोकामनाएं पूरी तो अपनाये ये 10 अचूक व सरल उपाय, तुरत दिखेगा असर !

इस संसार में हर किसी की कुछ न कुछ इच्छा होती है चाहे वह कोई गरीब हो या फिर कोई आमिर. हर कोई व्यक्ति अपनी इच्छा को पूरी करने के लिए हर वह प्रयास करता है जो वह कर सकता है परन्तु कभी कभी मनुष्य की कुछ ऐसी इच्छाये भी होती है जो मनुष्य के हाथो में नहीं होती.

इसके साथ ही मनुष्य की कुछ ऐसी भी इच्छाये होती है जिसे पूरी करने का समार्थ्य उसमे है परन्तु उसके बार बार प्रयास करने के बावजूद वह अपनी उस इच्छा को प्राप्त करने में सफल नही हो पाता.

अपनी इच्छा को प्राप्त करने के लिए मनुष्य कोई भी अवसर नही छोड़ना चाहता, चाहे उसे कितने ही तीर्थ जाना पड़े, चाहे उसे कितना ही धन खर्च क्यों न करना पड़े व चाहे उसे इसके लिए कितने ही कष्टो से गुजरना पड़े.

यदि इन सब प्रयासों के बाद भी जब मनुष्य की इच्छा पूर्ण नही हो पाती, तो वह उदास हो जाता है तथा उसे आपने समार्थ्य पर भी शक होने लगता है. इस प्रकार की अवस्था बहुत ही भयंकर होती है, जो मनुष्य को अंदर से तोड़ देती है.

परन्तु आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे है जिन्हें आप यदि पूरी श्रद्धा एवम विश्वास के साथ अपनाएंगे तो शीघ्र ही आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होगी.