शंकराचार्य जयंती 2018 – आदि शंकराचार्य

शंकराचार्य जयंती 2018 – आदि शंकराचार्य जिन्होंने हिंदू धर्म को दी एक नई चेतना
वैशाख मास का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। इस माह में अनेक धार्मिक गुरुओं, संत कवियों सहित स्वयं भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में अवतार धारण किया। वैशाख कृष्ण एकादशी वल्लाभाचार्य तो शुक्ल तृतीया जिसे अक्षय तृतीया कहते हैं कि दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ। इसी कड़ी में वैशाख शुक्ल पंचमी भी बहुत ही भाग्यशाली तिथि है। इसी दिन श्री नाथ जी के परम भक्त संत महाकवि सूरदास का जन्म हुआ तो यही दिन हिंदू धर्म की ध्वजा को देश के चारों कौनों तक पंहुचाने वाले, अद्वैत वेदांत के मत को शास्त्रार्थ द्वारा देश के हर कौने में सिद्ध करने वाले, भगवान शिव के अवतार माने जाने वाले आदि शंकराचार्य ने जन्म लिया। वैशाख शुक्ल पंचमी अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2017 में 20 अप्रैल को है। आइये शंकाराचार्य जयंती के अवसर पर जानते हैं आदि शंकराचार्य की जीवनी और उनके प्रयासों से हिंदू धर्म को मिली एक नई चेतना के बारे में।

आदि शंकाराचार्य संक्षिप्त जीवन परिचय
आदि शंकराचार्य एक ऐसे धर्मगुरु माने जाते हैं जिन्होंनें हिंदू धर्म की पुन:स्थापना की। जिन्होंने अद्वैत वेदांत मत का प्रचार किया। देश के चारों कौनों में शक्तिपीठों की स्थापना कर हिंदू धर्म की ध्वज़ा दुनिया भर में फहराई। उनका जीवन काल भले ही छोटा रहा हो लेकिन उनके जीवन एवं विचारों ने भारतीय धर्म दर्शन को एक नई चेतना प्राप्त की। इनका जन्म 788 ई.पू. माना जाता है। केरल का कालड़ी जो उस समय मालाबार प्रांत में होता था नामक स्थान पर एक नंबूदरी ब्राह्मण परिवार में आदि शंकराचार्य का जन्म माना जाता है। इनके जन्म की कथा कुछ इस प्रकार बताई जाती है।

वैशाख शुक्ल पंचमी के दिन दक्षिण के कालाड़ी ग्राम में शिवगुरु नाम के एक ब्राह्मण निवास करते थे। विवाह होने के कई सालों बाद भी उनके यहां कोई संतान नहीं हुई। शिवगुरु ने पत्नी विशिष्टादेवी के साथ संतान प्राप्ति हेतु भगवान शंकर की आराधना की। इनके कठिन तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन दिये और वर मांगने को कहा। तब शिवगुरु ने भगवान शिव से एक ऐसी संतान की कामना की जो दीर्घायु भी हो और जिसकी ख्याति विश्व भर में हो जो सर्वज्ञ बनें। तब भगवान शिव ने कहा कि या तो तुम्हारी संतान दीर्घायु हो सकती है या फिर सर्वज्ञ, जो दीर्घायु होगा वो सर्वज्ञ नहीं होगा और अगर सर्वज्ञ संतान चाहते हो तो वह दीर्घायु नहीं होगी। तब शिवगुरु ने दीर्घायु की बजाय सर्वज्ञ संतान की कामना की। कहा जाता है कि भगवान शिव ने फिर स्वयं शिवगुरु की संतान के रूप में जन्म लेने का वर दिया।

इसके पश्चात समय आने पर शिवगुरु और विशिष्टादेवी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। भगवान शंकर की तपस्या के प्रताप इस बालक का नाम भी माता-पिता ने शंकर रखा। कहते हैं पूत के पांव पलने में ही नज़र आने लगते हैं फिर वे तो स्वयं भगवान शंकर का वरदान थे अत: शैशव काल में ही यह संकेत तो माता-पिता को दिखाई देने लगे थे कि यह बालक तेजस्वी है, सामान्य बालकों की तरह नहीं है। हालांकि शैशवकाल में ही पिता शिवगुरु का साया सर से उठ गया। बालक शंकर ने भी माता की आज्ञा से वैराग्य का रास्ता अपनाया और सत्य की खोज में चल पड़े। मान्यता है कि मात्र सात वर्ष की आयु में उन्हें वेदों का संपूर्ण ज्ञान हो गया था। बारह वर्ष की आयु तक आते-आते वे शास्त्रों के ज्ञाता हो चुके थे। सोलह वर्ष की अवस्था में तो आप ब्रह्मसूत्र भाष्य सहित सौ से भी अधिक ग्रंथों की रचना कर चुके थे। इस आप शिष्यों को भी शिक्षित करने लगे थे। इसी कारण आपको आदि गुरु शंकाराचार्य के रूप में भी प्रसिद्धि मिली।

शंकराचार्य पीठों की स्थापना (SHANKARACHARAY PEETH)
देश के चारों कौनों में अद्वैत वेदांत मत का प्रचार करने के साथ ही आपने पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण चारों दिशाओं में मठों की स्थापना की इन्हें पीठ भी कहा जाता है।

वेदांत मठ – दक्षिण भारत में आपने वेदांत मठ की स्थापना श्रंगेरी (रामेश्वरम) में की। यह आप द्वारा स्थापित प्रथम मठ था इसे ज्ञानमठ भी कहा जाता है।

गोवर्धन मठ – इसे आपने पूर्वी भारत (जगन्नाथपुरी) में स्थापित किया। यह आदि शंकराचार्य जी द्वारा स्थापित दूसरा मठ था।

शारदा मठ – पश्चिम भारत (द्वारकापुरी) में आपने तीसरे मठ की स्थापना की इसे कलिका मठ भी कहा जाता है।

बद्रीकाश्रम – इसे ज्योतिपीठ मठ कहा जाता है। यह आप द्वारा उत्तर भारत में स्थापित किया गया।

इस प्रकार चारों दिशाओं में मठों की स्थापना कर आपने धर्म का प्रचार पूरे देश में किया। आप जहां भी जाते वहां शास्त्रार्थ कर लोगों को उचित दृष्टांतों के माध्यम से तर्कपूर्ण विचार प्रकट कर अपने विचारों को सिद्ध करते। आपने तत्कालीन विद्वान मिथिला के मंडन मिश्र को शास्त्रार्थ में पराजित किया लेकिन कहा जाता है कि मण्डन मिश्र की पत्नी भारती ने आपको शास्त्रार्थ में पराजित कर दिया। आपने पुन: रतिज्ञान प्राप्त किया और तत्पश्चात उन्हें भी शास्त्रार्थ में पराजित किया।

आदि शंकराचार्य जी के अनमोल विचार – (SHANKARACHARYA VALUABLE THOUGHTS)
आपने देश भर में भ्रमण कर देश की सभ्यता, संस्कृति, जन-जीवन को तो समझा ही साथ ही मानवता के कल्याण के लिये देश की बेहतरी के लिये देश में मौजूद विविधताओं का सम्मान करते हुए एक नई राह लोगों को दिखाकर उनका मार्ग दर्शन किया। भारतीय जीवन दर्शन को समझने की एक नई दृष्टि आदि शंकराचार्य जी ने अपनी अल्पायु में दी। आपके कुछ अनमोल विचार इस प्रकार हैं –

आपका मानना था कि स्वच्छ मन सबसे बड़ा तीर्थ है। यदि व्यक्ति अपने मन की शुद्धि कर ले तो उसे कहीं बाहर तीर्थ आदि पर जाने की आवश्यकता नहीं है।

आपका मानना था आत्मा स्वयं ज्ञान का स्वरूप है इसे किसी अतिरिक्त ज्ञान की आवश्यकता नहीं है जिस तरह जलते हुए दीपक को अन्य रोशनी के लिये अन्य दीप की आवश्यकता नहीं होती।

आपने संदेश दिया कि यह संसार एक स्वपन की तरह है जो मोह-माया से भरा पड़ा है जैसे ही हमारी अज्ञान रूपी निद्रा टूटती और ज्ञान रूपी प्रकाश हमें मिलता है उसी समय हम इस स्वप्न के सार को समझ जाते हैं।

आपने सत्य के बारे में बताया है कि जो सदा से था, सदा से है और सर्वदा रहेगा वही एकमात्र सत्य है।

गर्भवती महिलाओं के लिए श्राप है कॉफी का सेवन, भूलकर भी ना पीएं

गर्भवती महिलाएं कॉफी पिएं या नहीं, इसे लेकर डॉक्टरों के भी अलग-अलग विचार हैं। लंबे समय से यह धारणा चली आ रही है कि गर्भावस्था के दौरान प्रतिदिन दो कप कॉफी पीने में कोई हर्ज नहीं है। लेकिन एक हालिया रिसर्च ने इस दावे को पीछे धकेल दिया है। इस रिसर्च के मुताबिक दो कप काफी का मतलब है गर्भपात के खतरे को दोगुना बढ़ा देना। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रतिदिन 300 मिलीग्राम तक कॉफी का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक नहीं है लेकिन स्वीडन में हुए एक शोध के नतीजे इस बात को सिरे से नकारते हैं। स्वीडन के सल्ग्रेन्सका विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान अगर कोई महिला दिन में 100 ग्राम कैफीन का भी सेवन करती है तो उसके शिशु का वजन 21 से 28 ग्राम तक घट सकता है।

गर्भावस्‍था के पहले हफ्ते हो सकती है मितली की समस्‍या

आमतौर पर किसी नवजात बच्चे का आदर्श वजन 3.6 किलोग्राम होता है। शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि कैफीन के सेवन से न सिर्फ बच्चों के वजन बल्कि उनकी लंबाई पर भी प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि अभी तक इस बारे में वे कोई तथ्य नहीं जुटा पाए हैं। पूर्व के अध्ययनों में भी बताया गया था कि कॉफी में मौजूद कैफीन गर्भपात के खतरे को बढ़ा देता है। लेकिन यह निष्कर्ष कैफीन की ज्यादा मात्रा पर आधारित था। इसे लेकर विवाद भी काफी रहा। अन्य शोधकर्ताओं का मानना था कि इस अध्ययन में गर्भवती महिलाओं को सुबह-सुबह पेश आने वाली परेशानियों को नजरअंदाज किया गया है।

प्रेग्‍नेंसी कैलेंडर की मदद से जानें बच्‍चे की ग्रोथ का हाल
हार्मोन का स्तर बढ़े होने से सुबह जी मिचलाने या उल्टी होने को आम तौर पर गर्भपात के खतरे को कम करने वाला माना जाता है। काफी पीने से ये लक्षण दूर हो सकते हैं। इसलिए भी गर्भवती महिलाओं को सुबह में काफी या कैफीन से जुड़े अन्य पेय पदार्थो से परहेज करना चाहिए। इस मुद्दे की तह तक जाने के लिए आकलैंड के डा. डी-कुन लीके नेतृत्व में शोधकर्ताओं की एक टीम ने अध्ययन को अंजाम दिया। इसमें पहली बार सुबह की दिक्कतों को भी ध्यान में रखा गया। डा. ली की टीम इस नतीजे पर पहुंची कि प्रतिदिन 200 मिलीग्राम कैफीन पीने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। 200 मिलीग्राम कैफीन का मतलब दो कप काफी।

सोमवती अमावस्या: ये उपाय दूर करेंगे गरीबी और जीवन की हर परेशानी

सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह वर्ष में एक बार ही आती है। इस बार 15 अप्रैल को सुबह 8:37 बजे से 16 अप्रैल को 07:27 बजे तक अमावस्या है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजन करने से श्री हरि की कृपा बरसती है।
सोमवार के दिन आने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह अमावस्या साल में लगभग एक ही बार आती है। इस वर्ष ये अमावस्या 16 अप्रैल को पड़ रही है। हिन्दू धर्म में इस अमावस्या का विशेष महत्व है। विवाहित स्त्रियों द्वारा इस दिन अपने पती की लंबी उम्र के लिए व्रत रखने का विधान है। इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्र गोदान का फल प्राप्त होता है। शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत (यानि पीपल वृक्ष) की भी संज्ञा दी गई है। इस दिन विवाहित स्त्रियां पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा करती हैं और वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेटकर परिक्रमा करती हैं।

इस दिन भँवरी देने की भी परंपरा है। धान, पान और खड़ी हल्दी को मिला कर उसे विधान पूर्वक तुलसी के पेड़ पर चढ़ाया जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का भी विशेष महत्व है। कहा जाता है कि महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ्य और सभी दुखों से मुक्त होगा। ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों की आत्माओं को शांति मिलती है।
ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र दीक्षित बता रहे हैं उन उपायों के बारे में जो अापके जीवन की हर समस्या को दूर भगाएंगे।
जिसको पैसों की कमजोरी है वो तुलसी माता की 108 बार परिक्रमा करें। साथ ही श्री हरी नाम का जाप करें। एेसा करने से गरीबी से मुक्ति मिलेगी।
अमावस्या के दिन जो वृक्ष, लता आदि को काटता है और पत्तों को तोड़ता है उसे ब्रह्महत्या का पाप लगता है। इसका उल्लेख विष्णु पुराण में भी किया गया है।
शनि अौर पितृदोष से छुटकारा पाने के लिए उड़द या उड़द की छिकले वाली दाल, काला कपड़ा, तला हुआ पदार्थ और दूध गरीबों को दान करें।
धन-धान्य व सुख संपदा पाने के लिए हर अमावस्या को छोटा सा आहुति प्रयोग करें। जिसमें काले तिल, जौं, चावल, गाय का घी, चंदन पाउडर, गुड़, देशी कपूर, गै चंदन या कण्डा का प्रयोग कर सकते हैं। इसके बाद सभी चीजों का मिश्रण बनाकर हवन कुंड में देवताअों का ध्यान करते हुए आहुति डालें।
सोमवती अमावस्या को लेकर प्रचलित कथा

एक गरीब ब्राह्मण परिवार था जिसमें पति, पत्नी और उनकी एक बेटी थी। बेटी धीरे-धीरे बड़ी हो रही थी। समय के साथ-साथ उनकी बेटी सुंदर, संस्कारवान और गुणवान भी होती गई। तमाम गुण होने के बाद भी लड़की का विवाह नहीं हो पा रहा था, कारण था परिवार की गरीबी। एक दिन उस ब्राह्मण के घर एक साधु आए, जो कन्या के सेवाभाव से प्रभावित हुए और कन्या को लंबी आयु का आशीर्वाद देते हुए देखा कि कन्या के हाथ में विवाह योग्य रेखा ही नहीं थी। तब साधू ने कन्या के पिता को इसके लिए एक उपाय बताया कि कुछ दूरी पर एक गाँव में सोना नाम की धोबी जाति की एक महिला अपने बेटे और बहू के साथ रहती है, जो बहुत ही अच्छे आचार- विचार वाली और संस्कारवान तथा पति परायण है। यदि यह कन्या उसकी सेवा करे और वह महिला इसकी शादी में अपने मांग का सिन्दूर लगा दे, तो इस कन्या का वैधव्य योग मिट सकता है। साधू ने यह भी बताया कि वह महिला कहीं आती जाती नहीं है। यह बात सुनकर कन्या की मां ने अपनी बेटी से धोबिन की सेवा करने कि बात कही।

कन्या रोज प्रातःकाल ही उठ कर सोना धोबिन के घर जाकर, सफाई और अन्य सारे काम करके अपने घर वापस आ जाती। सोना धोबिन को लगता कि उसकी बहु सुबह जल्दी उठकर ये सारे काम करलेती है। एक दिन सोना धोबिन ने अपनी बहु से पूछा तुम इतनी जल्दी उठकर सारे काम कर लेती हो और पता भी नहीं चलता। तब बहू ने कहा कि मांजी मैंने तो सोचा कि आप सुबह उठकर सारे काम खुद ही कर लेती हैं। मैं तो देर से उठती हूँ। इस पर दोनों सोच में पड़ गईं, फिर दोनों योजना बनाकर निगरानी करने लगी कि कौन है जो इतनी सुबह घर का सारा काम करके चला जाता है। कई दिनों के बाद धोबिन ने देखा कि एक कन्या अंधेरे में घर में आती है और सारे काम करने के बाद चली जाती है। जब वह जाने लगी तो सोना धोबिन उसके पैरों पर गिर पड़ी, पूछने लगी कि आप कौन हैं और इस तरह छुपकर मेरे घर की चाकरी क्यों करती हैं। तब कन्या ने साधू की कही सारी बात उसे बताई, जिसे सुनकर सोना धोबिन साधू की बताई बात के लिए तैयार हो गई। सोना धोबिन कन्या के साथ जाने के लिए तैयार हो गई। उसने अपनी बहू से अपने लौट आने तक घर पर ही रहने को कहा। सोना धोबिन ने जैसे ही अपनी मांग का सिन्दूर कन्या की मांग में लगाया, उसका पति मर गया। उसे इस बात का पता चल गया। उस दिन सोमवती अमावस्या थी इसलिए वह घर से निर्जल ही निकली थी। ये सोचकर कि रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा तो उसे भंवरी देकर और उसकी परिक्रमा करने के बाद ही जल ग्रहण करेगी। ब्राह्मण के घर मिले पकवान की जगह उसने ईंट के टुकडों से 108 बार भंवरी देकर पीपल के पेड़ की परिक्रमा की और उसके बाद जल ग्रहण किया। ऐसा करते ही उसके पति के मुर्दा शरीर में कम्पन होने लगा।
माना जाता है कि पीपल के पेड़ में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए सोमवती अमावस्या के दिन से शुरू कर जो भी व्यक्ति हर अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ को भंवरी देता है, उसके सुख और सौभग्य में वृद्धि होती है। या सोमवती अमावस्या के दिन 108 वस्तुओं की भंवरी देकर सोना धोबिन और गौरी-गणेश की पूजा करता है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ऐसी परम्परा है कि पहली सोमवती अमावस्या के दिन धान, पान, हल्दी, सिन्दूर और सुपाड़ी की भंवरी दी जाती है। उसके बाद की सोमवती अमावस्या को अपने सामर्थ्य के हिसाब से फल, मिठाई, सुहाग सामग्री, खाने कि सामग्री इत्यादि की भंवरी दी जाती है। भंवरी पर चढ़ाया गया सामान किसी सुपात्र ब्राह्मण, ननद या भांजे को दिया जा सकता है। अपने गोत्र या अपने से निम्न गोत्र में वह दान नहीं देना चाहिए।

किन्नर के पैर छूने के बाद इस काम से गरीब भी बन जाता है राजा

दोस्तों आज हम आपको कुछ ऐसे वस्तु टिप्स देंगे जिससे आपके घर मे धन की कोई कमी नहीं रहेगी। आपको अपने घर के प्रवेश द्वार पर ये चीजें लगानी है।

कांच का बर्तन

घर के मुख्य द्वार पर एक कांच का बर्तन रख दे। कांच का बर्तन बर्तन रखने में अगर दिक्कत हो तो सजावट के लिए आप कांच का फूलदान रखें और उसमें कुछ ताजे फूल पानी भरकर रख दें। इससे घर में सकारात्मकता और खुशहाली आती है।

माला

बेलपत्र या आम के पत्तों की माला बनाएं और उसे घर के प्रवेश द्वार पर बांधे इससे घर में सकारात्मकता आती है और नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रवेश नहीं हो पाता। आपके घर की कोई अगर दुख या आशांति होगी तो वह भी दूर होगी। जब पत्तियां सूख जाए तो माला जरूर बदले।

लक्ष्मी जी के पैर

घर के प्रवेश द्वार पर लक्ष्मी जी के पैर के निशान बनाया जो अंदर की तरफ जाते हो।इसे घर में समृद्धि आते हैं।

शुभ लाभ
घर ,ऑफिस या दुकान के प्रवेश द्वार पर ये चिंह बनाए। इससे घर में सुख समृद्धि आती है।

स्वास्तिक
प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक बनाने से सुख और समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है नकारात्मक उर्जा नहीं आ पाती है घर में।

दहलीज
अगर आप चाहते हैं कि आपके घर में पैसे की कमी ना हो तो आप अपने घर के मुख्य द्वार पर दहलीज़ अवश्य बनवाएं और कोशिश करें कि मुख्य द्वार घर के अन्य दरवाजों से बड़ा होना चाहिए साथ ही यह जमीन से ऊंचा भी होना चाहिए।

अगर आप केवल सुबह ही जला दे इस तरह दीपक तो आपकी जो भी है प्राथना सीधे भगवान तक पहुंचेगी

जब कोई इंसान किसी मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए जाता है, तो उसके मन में किसी न किसी प्रकार की कामना जरूर होती है, जिसे पूूरा करने के लिए वह भगवान से प्रार्थना करता है।

और इसी प्रार्थना के द्वारा वह अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए भगवान की आराधना करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं, जब आप भगवान से अपनी किसी प्रकार की कामना करते है, तो उस दौरान कि गई प्रार्थना या फिर पूजा में आप कई तरह की गलतियां कर बैठते हैं, जिसकी वजह से आपकी प्रार्थना फलदायी नहीं होती। आज हम आपसे इसी विषय से जड़ी कुछ जरूरी बातों पर चर्चा करने वाले हैं। दरअसल जब हम भगवान शिव के स्वरूप शिवलिंग की आराधना करते हैं और उनकी परिक्रमा करते हैं, तो अंजाने में उस दौरान कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिसका हमें बिलकुल भी अंदाजा नहीं रहता। तो चलिए जानते हैं इन गलतियों के बारे में….

भगवान शंकर शिवलिंग के चारों ओर घूमने से नाराज हो जाते हैं। माना जाता है कि शिवलिंग के नीचे का हिस्सा, जहां से शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल बाहर आता है वो माता पार्वती का भाग होता है। यही वजह है कि शिवलिंग की परिक्रमा करने के दौरान आधी परिक्रमा ही की जाती है और दूसरी परिक्रमा वापस लौटकर पूरी की जाती है। शिवलिंग के चारों ओर घूमकर परिक्रमा से दोष लगता है और व्यक्ति पाप का भागी बन जाता है।

इसके साथ ही ध्यान रखें कि पूजा करते वक्त आप कभी भी जलधारी के सामने खड़े होकर शिवलिंग की पूजा ना करें। इसके साथ ही कभी भी पूजा के दौरान शिवलिंग पर हल्दी या फिर मेंहदी ना चढ़ाएं। ये सब आपकी पूजा के पुण्य को खत्म कर सकता है।

शाम को गुलाब की 1 पंखुड़ी इस तरह दे जला जो भी चाहिए आपको हाथो हाथ होगी पूरी

मां लक्ष्मी धन की देवी व सुख-समृद्धि प्रदान करने वाली देवी हैं। हिंदू शास्त्रों में इन्हें भगवान विष्णु की अर्धांगिनी बताया गया है। इसलिए विश्वभर में इनकी मान्यता अधिक मानी जाती है। यदि मनुष्य देवी लक्ष्मी का विधिवत पूजन करता है तो मां उस पर प्रसन्न होकर अपनी कृपा अवश्य बरसाती है। इतना ही नहीं व्यक्ति के धन-धान्य में वृद्धि के साथ-साथ समस्त प्रकार के ऋृणों से उसे छुटकारा मिलने लगता है।

यहां जानें धन-धान्य में वृद्धि हेतु मां लक्ष्मी का मंत्र-

मां लक्ष्मी मंत्र:-
“ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:”

इस मंत्र का उच्चारण करने से पूर्व मां लक्ष्मी का एकाग्रता से ध्यान करें। पूजा स्थान में मां लक्ष्मी के समक्ष बैठ कर 108 ऊपर दिए इस मंत्र का उच्चारण करें।

ध्यान रखें
मंत्र जपते समय केवल कमलगट्टे की माला का प्रयोग करना चाहिए व माला को गोमुखी में रखकर ही मंत्र जपें।

उपाय
प्रत्येक शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को खीर और मिश्री का भोग लगांए व किसी छोटी कन्या को भोजन कराएं। इस प्रकार मां लक्ष्मी के प्रति मन में पूर्ण निष्ठा, विश्वास और श्रद्धा भाव रखते हुए नियमित रूप से मंत्र का उच्चारण करें। जिससे मां लक्ष्मी की कृपा से शीघ्र ही आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगता है, धन-धान्य में वृद्धि होती है व कर्जों से छुटकारा मिलता है।

रोज बिस्तर के निचे रख कर सोये ये चीज़ अगले दिन जो शक्ति मिलेगी हर काम में दिलाएगी सफलता

हिन्दू धर्म में सिंदूर का एक खास महत्व है। सिंदूर को सुहागन का प्रतीक माना जाता है, इसलिए सभी सुहागन स्त्रियाँ इसे अपनी मांग में लगाती है। लेकिन क्या आप जानते है कि सिंदूर व तेल के कुछ आसान से उपायों को अपनाकर आप अपने जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या को आसानी से दूर कर सकते है तथा माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकते है।

# घर में सकारात्मकता के लिए सिंदूर व तेल के मिश्रण को अपने घर के मुख्य द्वार पर लगाते है। इससे घर में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है।

# अपने जीवन से धन की समस्या दूर करने के लिए घर के दरवाजों पर सिंदूर और तेल का तिलक लगाना शुभ होता है, ऐसा करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है।

आज है गुड फ्राइडे, जानिए ईसाई समुदाय के लोग क्यों और कैसे मनाते हैं यह त्योहार?
# यदि आप अक्सर आर्थिक समस्या से जूझते रहते है, तो एक एकाक्षी नारियल पर सिंदूर लगाकर उसकी पूजा करके अपनी तिजोरी में रखने से आपकी आर्थिक समस्या समाप्त हो जाती है।

# यदि सुहागन स्त्री प्रातः उठकर स्नान करने के बाद प्रतिदिन माता गौरी को सिंदूर अर्पित करती है व उसी सिंदूर में से थोड़ा अपनी मांग में लगाती है, तो इससे उनके वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है।

# मंगल व सूर्य दशा से पीड़ित व्यक्ति यदि किसी प्रवाहित नदी के जल में सिंदूर अर्पित करते है, तो इससे मंगल व सूर्य दशा शांत होती है।

सूर्य देव को खाली जल न दे मिला दे ये 2 चीज़ फिर देखे अगले दिन से दिखेगा ये चमत्कार

नमस्कार दोस्तों हर दिन की तरह फिर से स्वागत है इस चैनल में .दोस्तों लोग मान-सम्मान पाने के लिए क्या-क्या नही करते हैं.लेकिन कई प्रयासों के बाबजूद उन्हें गर-परिवार में,समाज में ऑफिस आदि जगहों पर मान-सम्मान नही मिलता है.

अगर शास्त्रों की माने तो यदि सूर्य ग्रह शुभ स्थिति में नही है तो व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में अपमानित होना पद सकता है.इस अपमान से बचने के लिए और सूर्यदेव के शुभफल पाने के लिए आप ये उपाय करके इस स्थिति से बच सकते हैं.

*दोस्तों,प्रतिदिन सुबह उठाकर नित्यकर्म से निबृत होने के बाद स्नान आदि कामों को करके एक ताम्बे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमे चावल यानि अक्षत,फूल,कुमकुम आदि डालकर सूर्य बागवान को जल चढ़ावे जल चढाते समय सूर्य मन्त्र का जप करना चाहिए.इस उपाय को करने से घर-परिवार,समाज,ऑफिस आदि में आपके मान-सम्मान,और प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी होगी.

*दोस्तों सूर्य को जल चढाते समय जो जल जमीन पर गिरती है उसमे भगवान सूर्य को देखने से आखों की ज्योति बढती है.

*दोस्तों आप सूर्य को जल अर्पित करने के लिए सुबह जल्दी उठेंगे तो सुबह की ताज़ी हवा आपके स्वास्थ को भी ठीक रखने में मदद करेगा.

घर के मंदिर में रविवार की रात सिर्फ 2 कपूर सुबह देखे चमत्कार

धर्म ग्रथों में एेसी कई चीजों का वर्णन किया गया है, जिन्हें प्रभु के पूजन में उपयोग किया जाना अधिक अनिवार्य माना जाता है। उनमें से सबसे महत्वपूर्ण स्थान कर्पूर को प्राप्त है। मान्यताओं के अनुसार कर्पूर जलाकर आरती करने से भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही कर्पूर जलाने से घर-दुकान में से कई सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों व वास्तु दोषों का नाश होता है। तो आईए जानें कर्पूर से जुड़े कुछ खास उपाय, जिनसे घर की गरीबी का नाश होता है।

नहाने के पानी में गंगाजल के साथ मिलाएं कर्पूर
बुरी नजर व बुरे समय से मुक्ति पाने के लिए रोज सुबह जल्दी उठें और नहाने के पानी में गंगगजल के साथ ही थोड़ा सा कर्पूर भी मिलाएं। इस पानी से नहाएं, साथ ही देवी-देवताओं के मंत्रों का या नामों का जाप करें।

घर के द्वारों पर छिड़के कर्पूर वाला पानी
घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए रोज सुबह नहाने के बाद गंगाजल में कर्पूर मिलाकर घर के मुख्य द्वार पर छिड़कें। ऐसा करने से आपके घर में किसी भी नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होगा और आपका घर हमेशा बुरी नजर से बचा रहेगा।

भगवान की कृपा पाने हेतु
सूर्यास्त के समय भगवान की आरती में कर्पूर जरूर जलाएं। कर्पूर जलाकर घर में घुमाएं। ऐसा करने पर भगवान की कृपा हमारे घर पर बनी रहती है।

बुधवार को करें ये उपाय
बुधवार को थोड़ा सा घी, कर्पूर और मिश्री को मिलाकर दान करें। इस उपाय कुंडली में बुध ग्रह के दोष दूर हो सकते हैं।

बैडरूम में भी जलाएं कर्पूर
रोज शाम को कर्पूर जलाकर भगवान की आरती करें और इसके बाद थोड़ा सा कर्पूर बैडरूम में भी जलाएं। ऐसा करने से आपकी सेहत हमेशा अच्छी रहती है और पति-पत्नी के बीच प्रेम भी बना रहता है।

अक्षय तृतीया से पहले यदि घर आगे ये 1 चीज़ तो खुद माता लक्ष्मी भी दौड़ी चले आएगी आपके घर

18 अप्रैल 2018 को अक्षय तृतीया है। शास्त्रों में अक्षय तृतीया को अक्षय पुण्य माना गया है। इस दिन पर किया गया जप, तप, ज्ञान और दान करना अक्षय फलदायक माना जाता है। जो व्यक्ति इस दिन देवी लक्ष्मी को खुश कर देता है उसके घर में हमेशा से देवी लक्ष्मी का निवास स्थान हो जाता है। अगर अक्षय तृतीया पर कुछ उपाय किया जाय तो देवी लक्ष्मी जरूर प्रसन्न होती हैं।

ऐसी मान्यता है अक्षय तृतीया पर सोने-चांदी की वस्तुएं खरीदना शुभ होता है। इसलिए इस दिन सोने या चांदी से बनी माता लक्ष्मी की चरण पादुका लानी चाहिए और इसकी नियमित पूजा करना चाहिए।

देवी लक्ष्मी को कौड़ी बहुत प्रिय होती है। इसलिए इस दिन से नियमित रूप से केसर और हल्दी के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से आर्थिक परेशानियों से निजात मिल जाती है।

अक्षय तृतीया पर एकाक्षी नारियल अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। एकाक्षी नारियल को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है।

अक्षय तृतीया पर पारद की देवी लक्ष्मी को घर लाएं और उनकी नियमित पूजा करने से घर में कभी धन का अभाव नहीं रहता है।

अक्षय तृतीया पर घर में श्रीयंत्र और स्फटिक का बना कछुआ लाने से घर से धन संबंधी तमाम तरह की परेशानियों का अंत हो जाता है।

अपने घर में अक्षय तृतीया पर माता का सबसे ज्यादा प्रिय चीज दक्षिणवर्ती शंख को लाना चाहिए। इससे घर में धन का इजाफा होता है।