अमावस्या की शाम पीपल के नीचे जलाएं एक दिया होगी मुँह मांगी इच्छा पूरी

आज 21 अगस्त सोमवार के दिन भाद्रपद सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी। मत्स्यपुराण के अनुसार पितृओं ने अपनी कन्या आच्छोदा के नाम पर आच्छोद नामक सरोवर का निर्माण किया था।

इसी सरोवर पर आच्छोदा ने पितृ नामक अमावस से वरदान पाकर अमावस्या पंचोदशी तिथि को पितृओं हेतु समर्पित किया। शास्त्रनुसार इस दिन कुश को बिना अस्त्र शस्त्र के उपयोग किए उखाड़ कर एकत्रित करने का विधान है।

 

अतः इस दिन एकत्रित किए हुए कुश का प्रभाव 12 वर्ष तक रहता है। शास्त्रनुसार इस दिन पितृ के निमित पिण्डदान, तर्पण, स्नान, व्रत व पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन तीर्थ तट पर नदी-सरोवर में तिल प्रवाहित करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। आज के विशेष पूजन से अमोघ फल और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

ज्योतिष पर विश्वास करें तो पितृ दोष एक ऐसा दोष है, जिसके कारण व्यक्ति अकारण और बेवजह की समस्याओं और परेशानियों से घिरा रहता है। इस दोष के निवारण के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है पितृ पक्ष। जिसमें आप मामूली खर्च या यूं कहें कि बिना किसी खर्च समस्या का समाधान कर सकते हैं।

 

 

यदि व्यक्ति की जन्म कुंडली नहीं है, तो लक्षणों के आधार पर पितृ दोष होने का अनुमान लगाया जा सकता है। संपन्नता होते हुए भी घर में अशांति और क्लेश। संतान प्राप्ति न होना। रोग, दुर्घटनाओं व शुभ कार्यों में लगातार विघ्न होते रहना।

Ordinary young sad family of four after quarrel

विशेष पूजन: दक्षिणमुखी होकर पितरों को कुशासन देकर उनके निमित पूजन करें। तिल के तेल का दीप करें, सुगंधित धूप करें, सफ़ेद तिल चढ़ाएं, दूध से तिलक करें व खीर का भोग लगाकर इसके बाद खीर गरीबों में बाटें।

इन 16 दिन में गीता के 18 अध्याय पढ़ने से पितरों को शांति मिलती है। जिससे पितृ दोष दूर होता है। इसलिए 16 दिन तक सुबह उठकर स्नान कर एक कलश जल का भरें। घी का दीपक जलाकर अपने पितरों का स्मरण कर गीता का पाठ करें।