इस एक काम को करने से हनुमान जी भागे भागे आएंगे आपके आपके घर

hanuman-ji ko prasan karne ke upay

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हनुमान भक्त अपने भगवान की कृपा पाने के लिए न जाने क्या क्या करते है hanuman-ji ko prasan karne ke upay मंदिर जाना, hanuman ji ki puja करना, मंगलवार को व्रत करना, तेल सिंदूर चढ़ाना, और भी बहुत कुछ करते है hanuman ji के भक्त. लेकिन ऐसा देखा गया है कि हनुमानजी फिर भी उन पर अपनी कृपा नहीं बरसाते.

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लेकिन एक काम ऐसा है, जो करोगे तो हनुमानजी को आपके पास आना ही पड़ता है.

रामायण में भी उल्लेख है कि hanumanji वही आते हैं जहाँ जहाँ यह एक काम होता है .

तो आइये जानते है hanuman kavach की कृपा पाने के लिए कौनसा कार्य करना चाहिए.

जानिए hanuman ji ko khush kaise kare

जहाँ भक्त वहां भगवान – यह बात तो आपने सुनी ही होगी. तो भक्त को बुलाने के लिए भगवान की पूजा करनी होती है.
जहाँ राम होंगे या राम की कथा होगी, वहां हनुमान जी आएंगे ही आएंगे. इसलिए हनुमान की कृपा चाहते है, हनुमान जी को बुलाना है तो आप हनुमान जी की पूजा नहीं बल्कि रामायण पाठ और राम कथा कराइये.

हनुमान को भगवान राम ने धरती पर इसलिए छोड़ा ताकि धर्म की रक्षा हो सके. इसलिए हनुमान ब्रह्माण्ड में हर तरह विचरते रहते है.

लेकिन उनको जहाँ राम कथा, रामायण पाठ सुनाई देता है, वहां जाने से अपने आपको रोक नहीं पाते. इसलिए जहाँ भी रामायण पाठ होता है वहां हनुमान पहुँच ही जाते है.

क्योकि रामायण में लिखा है – जहाँ जहाँ राम कथा होगी, वहां वहां हनुमान की उपस्थिति होगी.

इसलिए अगर आप हनुमान की कृपा चाहते है – हनुमानजी को घर बुलाना चाहते है, या दर्शन करना है तो बस रामकथा कराइए.

रामकथा सुनने हनुमान कभी भी कही भी पहुँच जाते हैं.

हनुमान जी हर रामकथा में सबसे पहले आते है और सबसे अंतिम में प्रसाद लेकर जाते है.

इसलिए हनुमान की कृपा और दर्शन के लिए राम कथा करे, रामायण पाठ करे, क्योकि जहाँ भगवान वहां भक्त आते ही है.

अगले पेज पर पढ़े  hanuman ji ki puja  and hanuman-ji ko prasan karne ke upay

हनुमान जी का सबसे शक्तिशाली शाबर मंत्र जिसके जाप से बन जाते है बिगड़े काम

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Shaktishali shidh shabar mantra – हनुमान शाबर मंत्र:

शाबर मन्त्र को को स्वयंसिद्धि मन्त्र के नाम से भी पुकारा जाता है यह मन्त्र अत्यन्त शक्तिशाली एवं अचूक है. अगर आप को लग रहा है की आप के दूकान अथवा घर आदि में किसी ने टोटका आदि कर रखा है अथवा घर में कोई व्यक्ति ज्यादा बीमार है, निर्धनता आपका पीछा नहीं छोड़ती, या कोई कार्य बनते बनते बिगड़ जाता हो

अथवा कोई तांत्रिक क्रिया द्वारा आपको बार बार परेशान कर रहा हो तो इन सब कष्टों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए शाबर मन्त्र को सबसे सिद्ध एवं प्रभावकारी माना गया है.

शाबर मन्त्र अन्य शास्त्रीय मंत्रो के भाँति उच्चारण में कठिन नहीं होते है, तथा इस अचूक मन्त्र को कोई भी बड़े आसनी प्रयोग कर अपने कायो को सिद्ध कर सकता है.

इन मंत्रो को थोड़े से जाप द्वारा सिद्ध किया जा सकता है तथा यह मन्त्र शीघ्र प्रभाव डालते है. इन मंत्रो का जो प्रभाव होता वह स्थायी है तथा शक्तिशाली हनुमान मन्त्र का कोई भी दुसरा काट नहीं है.

शाबर मंत्रो के सरल भाषा में होने के कारण इनका प्रयोग बहुत ही आसान है कोई भी इन्हे सुगमता से प्रयोग कर सकता है. यह मन्त्र दूसरे दुष्प्रभावी मंत्रो के काट में सहायक है.

शाबर मन्त्र के प्रयोग से प्रत्येक समस्या का निराकरण सहज ही जाता है. इस मन्त्र का प्रयोग कर व्यक्ति अपने परिवार, मित्र, संबंधी आदि की समस्याओं का निवारण करने में सक्षम है.

वैदिक, पौराणिक एवम् तांत्रिक मंत्रों के समान ‘शाबर-मंत्र’ भी अनादि हैं. सभी मंत्रों के प्रवर्तक मूल रूप से भगवान शंकर ही हैं, परंतु शाबर मंत्रों के प्रवर्तक भगवान शंकर प्रत्यक्षतया नहीं हैं, फिर भी इन मंत्रों का आविष्कार जिन्होंने किया वे परम शिव भक्त थे.

गुरु गोरखनाथ तथा गुरु मछन्दर नाथ शबरतंत्र के जनक माने जाते है. अपने साधन, जप-तप एवं सिद्धियो के प्रभाव से उन्होंने वह स्थान प्राप्त कर लिया जिसकी मनोकामना बड़े-बड़े तपस्वी एवं ऋषि मुनि करते है.

शाबर मंत्रो में ”आन शाप” तथा ”श्रद्धा और धमकी” दोनों का प्रयोग किया जाता है. साधक याचक होते हुए भी देवता को सब कुछ कहने का सामर्थ्य रखता है व उसी से सब कुछ करना चाहता है.

विशेष बात यह है कि उसकी यह ‘आन’ भी फलदायी होती है. आन का अर्थ है सौगन्ध. अभी वह युग गए अधिक समय नहीं बीता है, जब सौगन्ध का प्रभाव आश्चर्यजनक व अमोघ हुआ करता था.

शाबर मंत्रो में गुजराती, तम्मिल, कन्नड़ आदि भाषाओं का मिश्रण है. वैसे समान्यतः अधिकतर शाबर मन्त्र हिंदी में ही मिलते है.

प्रत्येक शाबर मंत्र अपने आप में पूर्ण होता है. उपदेष्टा ‘ऋषि’ के रूप में गोरखनाथ, सुलेमान जैसे सिद्ध पुरूष हैं. कई मंत्रों में इनके नाम का प्रवाह प्रत्यक्ष रूप से तो कहीं केवल गुरु नाम से ही कार्य बन जाता है.

इन मंत्रों में विनियोग, न्यास, तर्पण, हवन, मार्जन, शोधन आदि जटिल विधियों की कोई आवश्यकता नहीं होती. फिर भी वशीकरण, सम्मोहन, उच्चाटन आदि सहकर्मों, रोग-निवारण तथा प्रेत-बाधा शांति हेतु जहां शास्त्रीय प्रयोग कोई फल तुरंत या विश्वसनीय रूप में नहीं दे पाते, वहां ‘शाबर-मंत्र’ तुरंत, विश्वसनीय, अच्छा और पूरा काम करते हैं.

आइये अब हम आपको सिद्ध शाबर मन्त्र के प्रयोग के बारे में बताए तथा इससे जुडी कुछ विशेष तथा ध्यान रखने वाली बातो के विषय में बताए.