शिवलिंग के पास चुपचाप बोल दे ये एक मन्त्र आपकी जिंदगी में दुःख का नामोनिशान नहीं रहेगा

भगवान शिव की पूजा में कटे-फटे बिल्व पत्र नहीं चढ़ाने चाहिए।शिवपुराण में बिल्व वृक्ष को शिवजी का ही रूप बताया गया है। इसलिए इस पेड़ की पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और हमारी सभी परेशानियां दूर करते हैं। इसे श्रीवृक्ष भी कहते हैं। श्री देवी लक्ष्मी का ही एक नाम है। इस कारण बिल्व की पूजा से लक्ष्मीजी की कृपा भी मिलती है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों से संबंधित दोष हो या गरीबी दूर नहीं हो रही हो तो बिल्व की पूजा से शुभ फल मिल सकते हैं। जानिए बिल्व वृक्ष की पूजा विधि और मंत्र…
इस विधि से करें बिल्व वृक्ष की पूजा

– सुबह स्नान के बाद सफेद कपड़े पहनकर बिल्व वृक्ष की पूजा करनी चाहिए। ये पूजा सोमवार को की जाए तो ज्यादा शुभ रहता है।

– पूजा में चंदन, फूल, फल, वस्त्र, तिल, अनाज आदि चीजें चढ़ाएं। धूप और दीप जलाकर नीचे लिखा मंत्र बोलें। इस मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से करें। मंत्र जाप की संख्या 108 होनी चाहिए।

मंत्र:

श्रीनिवास नमस्तेस्तु श्रीवृक्ष शिववल्लभ।

ममाभिलषितं कृत्वा सर्वविघ्रहरो भव।।

ये हैं बिल्व के कुछ और उपाय
1. बिल्व के पत्ते शिवलिंग पर चढ़ाने से शिवजी की कृपा बनी रहती है और हर मनोकामना पूरी हो सकती है। शिवलिंग पर बिल्व के पत्ते चढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखें कि वह कहीं से कटे-फटे न हो।

2. रोज सुबह बिल्व वृक्ष पर जल चढ़ाने से सभी ग्रहों के दोष दूर हो सकते हैं। साथ ही पितृ दोष का अशुभ असर भी कम होता है।

पूजा का नारियल निकल जाए खराबतो भगवान ने दिया है आपको ये संकेत

नारियल को हर शुभ काम करने के लिए शुभ मानते हैं। उससे सारे काम शुभ तरीके से हो जाते हैं। नारियल को मां लक्ष्मी का भी प्रतीक माना जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि हर पूजा में नारियल का होना बहुत जरूरी है इससे मां लक्ष्मी खुश हो जाती हैं। नवरात्रों में कई लोग माता रानी को प्रसाद में नारियल चढ़ाते हैं। ऐसा कई बार देखा गया है कि जो नारियल आप पूजा में माता के सामने चढ़ाते हैं वह अंदर से खराब निकलता है। और आपको यह बिल्कुल अच्छा नहीं लगता है कि नारियल खराब निकला है।

लोगों के मन में यह बात आ जाती है कि भगवान जी उनसे नाराज हो गए हैं और उनके साथ कोई हादसा हो जाएगा। यहीं सारी बातें आप सबके दिमाग में घूमना शुरू हो जाती हैं। आज हम आपको इसी बारें में कुछ खास बात बतांएगे। अगर आपका पूजा का नारियल खराब निकला है तो इसका यह मतलब नहीं होता है कि आपके साथ कुछ अशुभ होने वाला है।

या फिर ऐसा भी ख्याल आता है कि आपके साथ कुछ अनिष्ट होने वाला है। आपको बताते हैं कि जब भी आपका पूजा का नारियल खराब निकलता है तो इसे शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इसमें भी भगवान जी आपको कुछ संकेत दे रहे हैं। आज हम आपको नारियल के इनी संकेतों के बारे में बताएंगे।

नारियल के खराब होने का संकेत

यही छोटी-छोटी बातें हमारे जीवन में कर्ई बार एक बड़ा असर डालते हैं। जब हमें इन बातों के बारे में पूरी अच्छी तरह से जानकारी नहीं होती है तो हम अपने ही मन में अनेक प्रकार के भ्रम पैदा कर लेते हैं। ऐसा ही कुछ हाल पूजा के नारियल के साथ होता है जब भी नारियल अंदर से खराब निकलता है तो लोगों के मन में ऐसे ही अलग-अलग तरह की आशंका पैदा हो जाती है। और वह इन्हीं आशंकाओं में ग्रसित हो जाते हैं।

जब ऐसा होता है तो आपको दुकानदार पर भी गुस्सा आता होगा लेकिन आज के बाद आपको इस बातों पर गुस्सा नहीं आएगा। हम सबको ही पता है कि हिंदू धर्म एक सनातन धर्म भी है। इस धर्म की अपनी ही मान्यताएं हैं। इस धर्म में हर बात का अपना ही अभिप्राय होता है और पूजा के नारियल के खराब होने का अपना ही एक अर्थ होता है।

यहां पर यह मान्यता है कि अगर आपके पूजा का नारियल खराब निकलता है तो उसका ऐसा माना जाता है कि भगवान ने अपना प्रसाद खुद ही ग्रहण कर लिया है। और यही वजह होती है कि नारियल अंदर से पूरा ही सूखा हुआ निकलता है। नारियल के खराब होने का यह भी संकेत होता है कि आपकी जो भी मनोकामना होती है वह जल्द ही पूरी होनी वाली है।

खराब नारियल मतलब मनोकामना पूरी

जब भी पूजा का नारियल खराब निकलता है तो इसका यह मतलब होता है कि आपकी मनोकामना पूरी होने वाली है। आप उस समय जो भी कामना करते हैं वह जरूर पूरी होती है। अब आपका जब भी अगली बार पूजा का नारियल खराब निकले तो आप दुखी मत होना और यह समझना कि यह भगवान का आपके लिए आशीर्वाद है। और इस समय आप भगवान के सामने जो भी इच्छा बताएंगे वह आपकी इच्छा जरूर पूरी होगी।

अगर नारियल सही निकला तो क्या करना चाहिए

अब आप यह सोच रहे होंगे कि जो पूजा का नारियल ठीक निकलता है तो तब क्या होता है। वह सही होता है या नहीं। तब हमें क्या करना चाहिए और उसका क्या अर्र्थ होता है। जब भी पूजा का नारियल सही निकलता है तो उस प्रसाद को अपने पास नहीं रखना चाहिए और उसे सब में प्रसाद की तरह बांट देना चाहिए। ऐसा करने से पूजा का फल सबको मिल जाता है।

रात सोने से पहले बोले ये मन्त्र करोड़ो का कर्ज भी हो जाएगा खत्म

लाचारी और व्यक्ति की जरुरत ऐसी होती हैं जो उसे किसी दूसरे व्यक्ति के सामने झुकने पर मजबूर कर देती हैं. हर कोई इंसान एक ऐसी स्थिति में आकर खड़ा हो जाता हैं जब उसे किसी से उधार पैसे लेने की जरूरत पड़ ही जाती हैं. कर्ज लेने के बाद उसे चुकाने के दौरान एक कर्ज़दार कितना परेशान होता हैं ये सिर्फ वो ही समझ सकता हैं.

अगर आप भी क़र्ज़ से डूबे हुए और इस दलदल से नहीं निकल पा रहें हैं तो आज हम आपको बताने जा रहें हैं कुछ ऐसे आसान से उपाय जिनकी मदद से आप कर्ज़ जैसे समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं. अपने तय समय में क़र्ज़ से मुक्ति पाने के लिए आप इस मन्त्र का जाप करें. मंत्र –“ॐ ऋण-मुक्तेश्वर महादेवाय नमः” “ॐ मंगलमूर्तये नमः। ॐ गं ऋणहर्तायै नमः”.

किसी एक माला पर 108 बार इस मंत्र का जाप करें. यकीनन आप जल्द ही क़र्ज़ से छुटकारा पा सकते हैं. इसके अलावा अगर आप किसी को लाल मसूर को दान करते हैं तो आपको जल्द ही क़र्ज़ से मुक्ति मिल जाएगी. कर्ज से छुटकारा के लिए ‘रिनमोचन मंगल स्तोत्र ‘ का जाप किया जाना चाहिए.

इसके अलावा ये भी बताया गया हैं कि कभी ऋण मंगलवार को ना ले, लेकिन सुनिश्चित करें कि आपकी पहली किस्त पुनर्भुगतान मंगलवार को दे दिया जाना चाहिए. माना गया हैं कि हमेशा घर के उत्तर-पूर्व कोने को साफ रखने से भी क़र्ज़ से मुक्ति मिल सकती हैं.

यदि आप भी अपने जेब में रखते है पैसे तो बहुत जल्द आपको मिलेगा ये

जीवन सुख-दुख का संगम है और हमें अपने जीवन में कई तरह की मुश्किलें और सुख देखना पड़ता है।

भगवान ने किसी को बहुत अमीर बनाया है तो किसी को अत्‍यंत निर्धन लेकिन फिर भी हर किसी के मन में धन की लालसा है।

धन है तो सब कुछ है और अगर आप दरिद्र हैं या धन की कामना रखते हैं तो ज्‍योतिष की मदद से अपने जीवन को संपन्‍न और सुखी बना सकते हैं। शास्‍त्रों में हर काम को करने का एक निर्धारित समय होता है। जैसे सूरज के निकलने से लेकर सूर्यास्‍त का समय निर्धारित है सकी प्रकार दिन के पाचंवे और छठे पहर को कामदेव की पत्‍नी रति को समर्पित किया गया है और इस समय को रात्रि माना जाता है।

पैसों की कमी –

शास्‍त्रों की मानें तो रात के समय कुछ काम करने से आप अपने घर में फैली हुर्द दरिद्रता और नकारात्‍मक एनर्जी को दूर कर सकते हैं। इस काम को अपन अपने रोज के कामों के साथ भी कर सकते हैं।

पूजन घर या देव स्‍थान में रात के समय में दीपक जलाने से घर में लक्ष्‍मी का वास होता है और मां लक्ष्‍मी की कृपा सदैव बनी रहती है।
अगर आपके घर में तनाव और प्रेम की कमी रहती है तो बेडरूम में कपूर जलाने से सकारात्‍मक ऊर्जा आती है जिससे पति-पत्‍नी के संबंध भी मधुर रहते हैं।
धन प्राप्‍ति के अन्‍य उपाय

घर के बड़े-बुजुर्गों और माता-पिता के सोने के बाद सोना चाहिए। इससे घर का वातावरण अच्‍छा बनता है।
रात के समय घर के दक्षिण और पश्चिम के कोने में दीपक या बल्‍ब जलाएं। इससे पितरों का मार्ग प्रशस्‍त होता है और घर में संपन्‍नता आती है।
किसी भी शुभ दिन सुबह जल्‍दी उठकर स्‍नान करें और इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। घर के मंदिर में महालक्ष्‍मी के समक्ष आसन लगाकर बैठ जाएं।

अक्षत के 21 दानों को हल्‍दी में थोड़ा जल मिलाकर पीला कर लें। इस बात का ध्‍यान रखें कि इनमें से एक भी दाना खंडित ना हो। अब इन दोनों को किसी लाल रंग के रेशमी कपड़े में बांध दें और छोटी सी पोटली बना लें। इसके पश्‍चात् इस पोटली को मां लक्ष्‍मी के आगे रखकर विधिपूर्वक लक्ष्‍मीजी का पूजन करें। पूजन के बाद पोटली को अपने घर में धन रखने के स्‍थान पर एवं तिजोरी में रख दें। इस उपाय से धन से संबंधित सभी तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं।
घी के दीपक के सम्मुख महालक्ष्मी सूक्त का पाठ करते हुए महालक्ष्मी को पुष्प अर्पित करें। इस उपाय से निश्चित ही आपको लाभ होगा।
21 पत्तों पर राम का नाम लिखकर उन्हें बहते जल में प्रवाहित कर दें। धन का अपव्यय रूकेगा और आपको धन लाभ होगा।
देवी-देवताओं के पूजन में कई तरह की चीज़ों का प्रयोग किया जाता है और इनमें चावल यानि अक्षत का भी मुख्‍य स्‍थान है। अक्षत का अर्थ होता है जो टूटा हुआ ना हो। किसी भी पूजा में हल्‍दी, अबीर या कुमकुम अर्पित करने के बाद अक्षत चढ़ाए जाते हैं। इनके बिना कोई भी पूजन संपूर्ण नहीं होता है। ज्‍योतिष में अक्षत को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।

तुलसी के पास जाकर बोले 1 शब्द का मन्त्र सातो पुस्ते भी करेंगी पैसो में राज

दोस्तों सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश कर चुके है, जिस कारण सूर्य और बुध अब एक साथ आ चके है जिस कारण एक महाचमत्कारी योग घट रहा है. और दोस्तों इस राशि में बुद्ध पहले से होने के कारण बुध्दादित्य योग बन रहा है. ये योग बहुत ही अधिक शुभ कहा गया. शास्त्रों में ऐसा कहा गया है की इस योग में कुछ भी कामना करने पर वह तुरंत पूर्ण होती है.

बुध्दादित्य योग में करि कोई भी उपाय और पूजा 1000 कन्यदानो के बराबर फल देता है. दोस्तों 25 जून का यह दिन बहुत ही विशेष है इसलिए इस मोके को आप हाथ से ना जाने दे. बुध्दादित्य योग के दिन यानी 25 जून के दिन आप सुबह जल्दी उठ स्नान आदि कर सर्वप्रथम अपने इष्ट देव को याद करे. यानी की जो भी आपके घर के देवता कहे जाते है.

अब अपने घर के मंदिर में थोड़ा सा गंगा जल लेकर झिड़क दे. इसके भगवान विष्णु की पूजा कर एक ताम्बे के लोटे में गंगा जल लेकर अपने घर के आंगन में आ जाए जहा तुलसी का पौधा रखा है. अब आपको तुलसी के पास शालिग्राम शिला रखनी है. दोस्तों आपको बता दू की शालिग्राम शिला को साक्षात् भगवान विष्णु का ही रूप कहा जाता है. तथा जो भी व्यक्ति तुलसी और शालिग्राम की साथ साथ पूजा करता है उसके घर भगवान विष्णु के साथ साथ माता लक्ष्मी निवास करने लगती है.

यानी की उस घर में धन बढ़ने लगता है. दोस्तों शालिग्राम शिला का छुआ केवल जल अपने ऊपर झिड़क लेने मात्र से व्यक्ति को सारे तीर्थो के स्नान के बराबर फल मिल जाता है. दोस्तों आपको तुलसी के सामने शालिग्राम शिला रख कर इस मन्त्र का केवल 21 बार जप कर लेना है. मन्त्र है दोस्तों महाप्रसाद जननी सर्वसौभाग्यवर्धिनी। आधि व्याधि जरा मुक्तं तुलसी त्वाम नमोस्तुते मन्त्र बोलने के बाद अब आप तुलसी एवं शालिग्राम शिला में जल डाले जो आपने ताम्बे के लोटे में लिया था.

और फिर अपनी मनोकमना तुलसी के पत्तो को छूते हुए बोल दे. दोस्तों आपकी मनोकमना बहुत शीघ्र पूरी हो जायेगी. घर में साक्षात् माँ लक्ष्मी का निवास होगा और घर में सुख समिर्धि बढ़ती जायेगी. दोस्तों यदि आप ओरिजनल शालिग्राम शिला खरीदना चाहते है तो आप इस नंबर पर हमे कॉल या व्हाट्सप्प कर सकते है. 9999474433

घर के दरवाजे से हटा दे सिर्फ ये चीज़ घर में पैसे आने के सारे रास्ते खुल जाएंगे

रोजमर्रा की जिंदगी में कई छोटी-मोटी चीजें अपनाकर आप अपने घर में बरकत ला सकते हैं।

https://youtu.be/SPKGXHCz5tQ

वास्तु और ज्योतिष के हिसाब से अगर हम कुछ चीजें अपनी जिंदगी में आजमाएं तो आपके लिए काफी फलदायक हो सकती हैं।

घर के मुख्यद्वार के पास कभी भी कूड़ेदान ना रखें, कहा जाता है कि इससे आपके पड़ोसी शत्रु बन सकते हैं।

सूर्यास्त के बाद किसी को भी प्याज, दूध, दही मांगने पर भी ना दें कहा जाता है कि इससे आपके घर की बरकत समाप्त हो जाती है।

अपने छत पर कभी भी अनाज या बिस्तर ना धोएं, इससे ससुराल से संबंध खराब हो सकता है।

फल तो आप रोज ही खाते हैं, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि फल के छिल्के कभी भी कूड़ेदान में ना डालें।

महीने में एक बार अपने घर में मिस्री की खीर बनाएं और पूरे परिवार के साथ खाएं, इससे लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी।

रात में सोने से पहले रसोई में एक बाल्टी पानी भरकर रखें, इससे कर्ज से मुक्ति मिलती है।

पैर की बिछिया गलती से भी ना पहने इस तरह वरना आपके पति डूब जायेंगे कर्जे में

भारतीय संस्कृति के अनुसार एक शादीशुदा महिला को मांग में सिंदूर, गले में मंगलसूत्र और पैर में बिछिया पहनना सबसे जरुरी माना गया है क्योंकि ये सुहाग की निशानी होती है जो ये संकेत देती है कि आप एक सुहागन स्त्री है, जिस तरह मांग में सिंदूर लगाने से पति की उम्र लम्बी होती है उसी तरह गले में मंगलसूत्र पहनने से पति हमेशा बुरी नज़रों से बचा रहता है.

https://youtu.be/EEdSdSij4HM

ठीक इसी तरह पैर में बिछिया पहनना भी शुभ माना गया है. वहीं भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बिछिया चन्द्रमा का प्रतीक है. यही वजह है कि अक्सर शादीशुदा महिलाओं को चांदी की बिछिया पहनने की सलाह दी जाती है ताकि उन पर चन्द्रमा की कृपा द्रष्टि हमेशा बनी रही है. ज्योतिष्य के मुताबिक़ ये बताया गया है कि कभी भी पैर से बिछिया गुम नहीं होना चाहिए इसे अशुभ माना गया है. माना जाता है कि अगर ऐसा होता है तो पति बीमार पड़ सकता है.

इसके अलावा अपने पैरो की बिछिया किसी दूसरी स्त्री को भी नहीं देना चाहिए इससे पति पत्नी के रिश्तो में खटास आती है. पंडितों की माने तो विवाहित महिलाओं को बिछिया दाहिने तथा बाएं पैर की दूसरी अंगुली में पहनना चाहिए. अगर आप चांदी की पायल और बिछिया पहनेंगे तो ज्यादा शुभ रहता है लेकिन ध्यान रहें ये खोने न पाए, इन्हें लक्ष्मी का रूप माना जाता है.

इसके अलावा औरतों की पैर की दूसरी अंगुली की तन्त्रिका का सीधा संबध गर्भाशय से होता है जो कि हृदय से होकर गुजरती है इसी कारण से दाहिने तथा बाएं पैर की दूसरी अंगुली में इन्हें पहनने की सलाह दी जाती है. अगर आप इस तरिके से पहनते है तो गर्भाशय स्वस्थ और ब्लड प्रेशर नॉर्मल रहता है.

अगर आपको आ चुकी है बहुत ही ज्यादा परेशानी तभी करे ये उपाय तुरंत दीखता है फल

https://youtu.be/DdZsa4fBQn0

कई लोग ऐसे हैं जो मानसिक तनाव, बुरे सपने और अनजाने डर की वजह से रात में ठीक से सो नहीं पाते हैं। तनाव दूर करने के लिए व्यक्ति को रोज कुछ देर मेडिटेशन करना चाहिए। इसके अलावा अनजाने डर और बुरे सपनों से बचने के लिए ज्योतिष के उपाय करने से लाभ मिल सकता है।

पुरानी परंपराओं के अनुसार सुबह उठने से रात में सोने तक, हर समय के लिए शुभ काम बताए गए हैं। देवी-देवताओं की कृपा मिल सकती है और दुर्भाग्य भी दूर हो सकता है।

रात में सोने से पहले कमरे में तिल के तेल का दीपक जलाने से वातावरण की और हमारे विचारों की नकारात्मकता खत्म हो सकती है। हनुमानजी कलियुग में सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं। इनकी पूजा से सभी प्रकार के भय दूर होते हैं।

शरीर के इस अंग पर बांध ले ये धागा दुश्मन चोट पहुंचना तो दूर आपको छू भी नहीं पायेगा

हिंदू धर्म में हर चीज का अपना एक अलग ही महत्व होता है और बहुत सारी चीजें हमारे लिए किसी न किसी रूप में शुभ मानी जाती है। इनमें से काला धागा पहनना भी एक है जिसे हिंदू धर्म में शुभ माना जाता है। आपने बहुत से लोगों को गर्दन, पैर के टखने आदि में काला धागे पहने हुए देखा होगा क्योंकि हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है और कहते हैं कि यह भगवान “शनि” का पसंदीदा रंग है।

लोग टखने, कमर, पैर की मध्य उंगली और कलाई में भी काला धागा पहनते हैं। साथ ही कुछ लोग गर्दन में भी देवताओं के लोकेट के साथ काला धागा पहनते हैं। वैसे यह आजकल एक फैशन बन गया है और लड़कियां स्टाइलिश दिखने के लिए एक काला धागा पहनती है। अब, काला धागा एक फैशन स्टेटमेंट बन गया है।

चलिए आज हम आपको बताते हैं कि लोग काले धागे क्यों पहनते हैं:

माना जाता है कि काला धागा आपको बुरी नजर से बचाता है इसलिए छोटे बच्चों से लेकर जवानों को भी काला धागा पहने हुए देखा जाता है।

काला धागा नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। इसके साथ ही दुष्ट आत्मा और तंत्र मंत्र से दूर रखता है।

यदि रात को किसी को डरावने सपने आते है और इस वजह से सो नहीं पाते है तो काला धागा पहनना लाभकारी होता है। इससे आपको डरावने सपने आना बंद हो जााएंगे और रात को अच्छी नींद आएगी।

काले धागे पहनते समय याद रखने वाली बातें

काला धागा मंगलवार और शनिवार को ही पहनना चाहिए। शनिवार को इसलिए क्योंकि यह शनि देव का दिन होता है।

काला धागा पहनने से पहले इसे हनुमान मंदिर में उनके आगे रखे जिससे की धागा और भी अधिक प्रभावी बन जाए।