भगवान् श्रीकृष्ण जी ने क्यों पिया राधा रानी जी के पैरो का चरणामृत

जब गोपियों ने कृष्ण द्वारा बताया गया उपाय राधा रानी को बताया तो राधा ने एक क्षण भी व्यर्थ करना उचित ना समझा और जल्द ही स्वयं के पांव धोकर चरणामृत तैयार कर श्रीकृष्ण को पिलाने के लिए आगे बढ़ी।

राधा जानतीं थी कि वे क्या कर रही हैं। जो बात अन्य गोपियों के लिए भय का कारण थी ठीक वही भय राधा को भी मन में था लेकिन कृष्ण को वापस स्वस्थ करने के लिए वह नर्क में चले जाने को भी तैयार थीं।

आखिरकार कान्हा ने चरणामृत ग्रहण किया और देखते ही देखते वे ठीक हो गए। क्योंकि वह राधा ही थीं जिनके प्यार एवं सच्ची निष्ठा से कृष्णजी तुरंत स्वस्थ हो गए। अपने कृष्ण को निरोग देखने के लिए राधाजी ने एक बार भी स्वयं के भविष्य की चिंता ना की और वही किया जो उनका धर्म था|

इसीलिए कहा जाता है की राधे बिना श्याम अधूरे है श्याम का आधार ही राधा है
राधा नाम बिना इस संसार की कल्पना भी नही की जा सकती क्योंकि राधा संसार जगत के कण कण म वास करती है

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