अगर नही हो रही मनोकामनाएं पूरी तो अपनाये ये 10 अचूक व सरल उपाय, तुरत दिखेगा असर !

इस संसार में हर किसी की कुछ न कुछ इच्छा होती है चाहे वह कोई गरीब हो या फिर कोई आमिर. हर कोई व्यक्ति अपनी इच्छा को पूरी करने के लिए हर वह प्रयास करता है जो वह कर सकता है परन्तु कभी कभी मनुष्य की कुछ ऐसी इच्छाये भी होती है जो मनुष्य के हाथो में नहीं होती.

इसके साथ ही मनुष्य की कुछ ऐसी भी इच्छाये होती है जिसे पूरी करने का समार्थ्य उसमे है परन्तु उसके बार बार प्रयास करने के बावजूद वह अपनी उस इच्छा को प्राप्त करने में सफल नही हो पाता.

अपनी इच्छा को प्राप्त करने के लिए मनुष्य कोई भी अवसर नही छोड़ना चाहता, चाहे उसे कितने ही तीर्थ जाना पड़े, चाहे उसे कितना ही धन खर्च क्यों न करना पड़े व चाहे उसे इसके लिए कितने ही कष्टो से गुजरना पड़े.

यदि इन सब प्रयासों के बाद भी जब मनुष्य की इच्छा पूर्ण नही हो पाती, तो वह उदास हो जाता है तथा उसे आपने समार्थ्य पर भी शक होने लगता है. इस प्रकार की अवस्था बहुत ही भयंकर होती है, जो मनुष्य को अंदर से तोड़ देती है.

परन्तु आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे है जिन्हें आप यदि पूरी श्रद्धा एवम विश्वास के साथ अपनाएंगे तो शीघ्र ही आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होगी.

यदि आप है हनुमान जी के भक्त, तो भूल से भी न लगाए उनकी फोटो घर के इस जगह पर !

प्रभु श्री राम के भक्त हनुमान जी जाग्रत देव है, हनुमान जी की भक्ति जितनी सरल एवं शीघ्र फल देने वाली है उतनी ही कठिन भी. कठिन इसलिए की हनुमान जी की भक्ति के दौरान मनुष्य को अपना चरित्र उत्तम तथा मंदिर में पवित्रता रखनी अनिवार्य होती है अन्यथा इसके दुष्परिणाम सहने पड़ते है.

बजरंगबलि की भक्ति के प्रभाव से व्यक्ति चमत्कारिक रूप से अपने समस्त दुखो से मुक्ति प्राप्त कर लेता है और उसे सुख शांति की प्राप्ति होती है.

शास्त्रो एवं वेदों में भी यह बात कहि गई है की एक बार हनुमान जी की कृपा किसी पर हो गई तो वह सब कुछ पा जाता है. जिंदगी में कभी भी उसे हार का समाना नहीं करना पड़ता.

हनुमान जी के ऐसे भक्त का कोई शत्रु नहीं होता तथा बुरी शक्तियां उसके पास तक नहीं भटकती.

भगवान श्री राम के वरदान के प्रभाव से अंजनी पुत्र हनुमान जी को अमरता का वरदान प्राप्त हुआ. हनुमान जी की भक्ति कलयुग में तुरंत फल देने वाली मानी गई है. अतः दिन प्रतिदिन हनुमान जी के भक्तो की संख्या बढ़ती जा रही है.

हनुमान जी के असंख्य भक्तो में से कई भक्तो के घर में हनुमान जी की मूर्ति एवं फोटो आसानी से देखने को मिल जायेगी.

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में देवी देवताओ की फोटो लगाना शुभ माना जाता है, यह घर की सभी परेशनियों एवं नकरात्मकता को दूर करता है व घर में सुख एवं शांति बनाये रखता है. घर में बाहर से आने वाले लोगो पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है.

इससे घर में भी परिवार के बीच आपसी प्रेम बना रहता है. वास्तु शास्त्र में हनुमान जी की फोटो घर में लगाने के सम्बन्ध में अनेक नियम बताये गए है जिन्हे घर के किसी निश्चित स्थान पर ही लगाना चाहिए नहीं तो वह विपरीत परिणाम देते है.

हनुमान जी का चित्र जिस घर में होता है वहां मंगल, शनि, भूतादि आदि किसी का भी दोष नहीं होता है.यदि आप हनुमान जी के भक्त है घर में हनुमान जी के चित्र किस जगह और कहाँ लगाए यह जानना आपके लिए आवश्यक है.

”5 अत्यधिक शक्तिशाली महामंत्र” जिन के जाप से बदल जाएगा आपका जीवन !

आज के दौड़ती भागती जिंदगी में इंसान अपने मन की शांति को खोते जा रहा है. भोग विलाश एवं सुख सुविधाओं से आकर्षित होकर मनुष्य इन सब चीज़ो को पाने की लालसा में अपने आपको डुबोते जा रहा है, जितना वह प्राप्त करता है उससे कहि अधिक पाने की लालसा उसे चैन की नींद सोने नहीं देती.

कई बार मनुष्य की ये इच्छा इतनी प्रबल होती है की वह जाने अनजाने में कई प्रकार के मुसीबतों से घिर जाता है तथा फिर वह उन मुसीबतों में धस्ता ही जाता है. लेकिन सुख शांति एवं हर प्रकार की बाधाओं का विनास कुछ विशेष मंत्रो के माध्यम से हो सकता है.

क्योकि मंत्रो के प्रभाव का आधार केवल आध्यत्मिक कारण ही नहीं बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है. आइये आज हम आपको बताते है की विभिन्न प्रकार की विपदा के समय किन मंत्रो का जाप करना चाहिए.

इन सिद्ध 5 मंत्रो को शास्त्र में विशेष महत्वता दी गई है इनके जाप के माध्यम से न केवल आप चारो और से घिरे नकरात्मक ऊर्जा से मुक्त होगे बल्कि ये प्रभावकारी मन्त्र आपका जीवन बदलने में भी सहायक होंगे.

जिंदगी में गाँठ बाढ़ ले इन 5 बातो को, सफलता चूमेगी आपके कदम चाणक्य नीति !

यदि धरती में कोई महान राजनीतिज्ञ हुआ तो वह थे आचार्य चाणक्य, चाणक्य को केवल भारत में ही नहीं बल्कि समस्त संसार में महान व कुशल राजनीतिज्ञ एवं पारंगत नीतिशास्त्रों के रूप में जानते है.

आज हम आपको चाणक्य के 5 उन सूत्रों के बारे में बताने जा रहे है जिन्हे जीवन में अपनाने से व्यक्ति वह सब कुछ हासिल कर सकता है जिसकी उसे कामना है.

1 . किसी भी व्यक्ति हद से ज्यादा ईमानदार नहीं होना चाहिए क्योकि सीधे पेड़ तथा इमानदर व्यक्ति पर सबसे पहले प्रहार किया जाता है.

कभी व्यक्ति को हद से ज्यादा न तो ईमानदार होना चाहिए ना ही मुंहफट. जहां यदि कोई बात आपको गलत लगती हो उसके लिये वहां अपनी बात हलके से सलाह के रूप में रखने की कोशिश करे.

यदि आपको लग रहा हो आपकी कही बात पर तीखी चर्चा हो रही है तो आगे चर्चा से बचे.

अपनी बात किसी व्यक्ति के सामने रखते समय उसे गलत ठहराने की कोशिश ना करें चाहे आप सही क्यों न हो. विशेषकर आफिस में अपने सीनियर और बॉस की आलोचना करने से बचे.

आफिस में अपने आइडियाज को लागू करने का अवसर तब है जब आप खुद आफिस के चार्ज में हो. जब तक आप जूनियर है तब तक अपने आइडिया को घुमा फिरा कर कहे.

अगर आप बनना चाहते हो धनवान, तो तुरंत अपने घर से हटाए इन 8 चीज़ को !

वास्तु शास्त्र के अनुसार, ज्ञान के अभाव में हम कुछ ऐसी चीज़े अपने घर में रखते है जो घर में दरिद्रता को निमंत्रण देती है तथा आपकी आर्थिक स्थिति को गिराती है.

यदि आप अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना चाहते है तो आपको तुरंत अपने घर से इन चीज़ो को हटा देना चाहिए.

आज हम आपको उन चीज़ो को बताने जा रहे जिन्हे घर से हटा देने में आप अपनी आर्थिक स्थित में बदलाव देखेंगे. आपकी आर्थिक स्थिति पहले से और अधिक मजबूत हो जायेगी.

1 . कबूतर का घोसला :-

शास्त्रों के अनुसार कबूतर का किसी घर में अपना घोसला बनाना आर्थिक स्थिति से सही नहीं माना जाता, यह घर में आर्थिक समस्या उतपन्न करता है. अतः यदि आपके घर के अंदर, दरवाजे खिड़की अथवा छत के ऊपर किसी कबूतर का घोसला है तो उसे वहां से हटाकर घर के बाहर किसी अन्य जगह पर रख दे.

2 . मधुमक्खी का छत्ता :-

मधुमक्खी का छत्ता न सिर्फ आपके परिवार के लिए खतरा साबित हो सकता है बल्कि इसके साथ ही यह घर में दरिद्रता और दुर्भाग्य लेकर आता है. अतः यदि आपके घर में मुधमक्खियों ने अपना छत्ता बनाया है तो तुरंत किसी एक्सपर्ट की सहायता से उसे हटा दे.

बद्रीनाथ एवं केदारनाथ से जुडी एक भविष्यवाणी सुन, आप भी रह जाएंगे हैरान !

गंगा, जाह्नवी और भागीरथी कहलानी वाली ‘गंगा नदी’ भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है। यह मात्र एक जल स्रोत नहीं है, बल्कि भारतीय मान्यताओं में यह नदी पूजनीय है जिसे ‘गंगा मां’ अथवा ‘गंगा देवी’ के नाम से सम्मानित किया जाता है.

मरने के बाद लोग गंगा में अपनी राख विसर्जित करना मोक्ष प्राप्ति के लिये आवश्यक समझते हैं, यहाँ तक कि कुछ लोग गंगा के किनारे ही प्राण विसर्जन या अंतिम संस्कार की इच्छा भी रखते हैं। इसके घाटों पर लोग पूजा अर्चना करते हैं और ध्यान लगाते हैं। गंगाजल को पवित्र समझा जाता है तथा समस्त संस्कारों में उसका होना आवश्यक है। पंचामृत में भी गंगाजल को एक अमृत माना गया है।

लेकिन आज जिस रफ़्तार से धरती पर विकास हो रहा है उसमे प्राकृतिक संसाधनों की बहुत अनदेखी की जा रही है और अगर ऐसा चलता रहा तो भविष्य में गंगा नदी पुन: स्वर्ग चली जाएगी फिर गंगा किनारे बसे तीर्थस्थलों का कोई महत्व नहीं रहेगा और वे नाममात्र के तीर्थ स्थल होंगे.

केदारनाथ(kedarnath) को जहां भगवान शंकर का आराम करने का स्थान माना गया है वहीं बद्रीनाथ को सृष्टि का आठवां वैकुंठ कहा गया है, जहां भगवान विष्णु 6 माह निद्रा में रहते हैं और 6 माह जागते हैं.

पूरा देश गंगा का हत्यारा है: मान्यताओं के अनुसार, जब गंगा नदी धरती पर अवतरित हुई, तो यह 12 धाराओं में बंट गई. इस स्थान पर मौजूद धारा अलकनंदा के नाम से विख्यात हुई और यह स्थान बद्रीनाथ, भगवान विष्णु का वास बना.

अलकनंदा की सहचरणी नदी मंदाकिनी नदी के किनारे केदार घाटी है, जहां बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक सबसे महत्वपूर्ण केदारेश्वर है. यह संपूर्ण इलाका रुद्रप्रयाग जिले का हिस्सा है. रुद्रप्रयाग में भगवान रुद्र का अवतार हुआ था.

लेकिन 12 धाराओं में से अब अलकनंदा और उसकी सहयोगी मंदाकिनी का ही अस्तित्व बचा हुआ है. तीसरी आगे चलकर वह नदी जिसे गंगा कहा जाता है. लगातार हो रहे खनन, जंगल कटाई और नदी किनारे बढ़ रही जनसंख्या और धार्मिक क्रियाकांड के चलते जहां नदी का जलस्तर घटा है वहीं ये नदियां प्रदूषित भी हो गई है.

केदार घाटी में दो पहाड़ हैं- नर और नारायण पर्वत. विष्णु के 24 अवतारों में से एक नर और नारायण ऋषि की यह तपोभूमि है. उनके तप से प्रसन्न होकर केदारनाथ में शिव प्रकट हुए थे.

पुराणों अनुसार गंगा स्वर्ग की नदी है और इस नदी को किसी भी प्रकार से प्रदूषित करने और इसके स्वाभाविक रूप से छेड़खानी करने का परिणाम होगा संपूर्ण जंबूखंड का विनाश और गंगा का पुन: स्वर्ग में चले जाना.

वर्तमान में गंगा पूर्णत: प्रदूषित हो गई है और इसके जल की गुणवत्ता में भी परिवर्तन होने लगा है.

पुराणों अनुसार भूकंप, जलप्रलय और सूखे के बाद गंगा लुप्त हो जाएगी और बद्रीनाथ में नहीं होंगे भगवान के दर्शन, क्योंकि मान्यता अनुसार जोशीमठ में स्थित नृसिंह भगवान की मूर्ति का एक हाथ साल-दर-साल पतला होता जा रहा है.

भविष्यवाणी :-

माना जाता है कि जिस दिन नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे, बद्रीनाथ का मार्ग पूरी तरह बंद हो जाएगा. भक्त बद्रीनाथ के दर्शन नहीं कर पाएंगे.

Kedarnath aapda 2013 –
उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा इस बात की ओर इशारा करती है कि मनुष्य ने विकास के नाम पर तीर्थों को विनाश की ओर धकेला है और तीर्थों को पर्यटन की जगह समझकर मौज-मस्ती करने का स्थान समझा है तो अब इसका भुगतान भी करना होगा.

पुराणों अनुसार आने वाले कुछ वर्षों में वर्तमान बद्रीनाथ धाम और केदारेश्वर धाम लुप्त हो जाएंगे और वर्षों बाद भविष्य में भविष्यबद्री नामक नए तीर्थ का उद्गम होगा.

अलकनंदा और मंदाकिनी इन दोनों नदियों का पवित्र संगम रुद्रप्रयाग में होता है और वहां से ये एक धारा बनकर पुन: देवप्रयाग में ‘भागीरथी-गंगा’ से संगम करती हैं.

देवप्रयाग में गंगा उत्तराखंड के पवित्र तीर्थ ‘गंगोत्री’ से निकलकर आती है. देवप्रयाग के बाद अलकनंदा और मंदाकिनी का अस्तित्व विलीन होकर गंगा में समाहित हो जाता है तथा वहीं गंगा प्रथम बार हरिद्वार की समतल धरती पर उतरती है.

भगवान केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद बद्री क्षेत्र में भगवान नर-नारायण का दर्शन करने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे जीवन-मुक्ति भी प्राप्त हो जाती है. इसी आशय को शिवपुराण के कोटि रुद्र संहिता में भी व्यक्त किया गया है-

तस्यैव रूपं दृष्ट्वा च सर्वपापै: प्रमुच्यते.
जीवन्मक्तो भवेत् सोऽपि यो गतो बदरीबने..

दृष्ट्वा रूपं नरस्यैव तथा नारायणस्य च.
केदारेश्वरनाम्नश्च मुक्तिभागी न संशय:..

बद्रीनाथ की कथा अनुसार सतयुग में देवताओं, ऋषि-मुनियों एवं साधारण मनुष्यों को भी भगवान विष्णु के साक्षात दर्शन प्राप्त होते थे. इसके बाद आया त्रेतायुग- इस युग में भगवान सिर्फ देवताओं और ऋषियों को ही दर्शन देते थे,

लेकिन द्वापर में भगवान विलीन ही हो गए. इनके स्थान पर एक विग्रह प्रकट हुआ. ऋषि-मुनियों और मनुष्यों को साधारण विग्रह से संतुष्ट होना पड़ा.

शास्त्रों अनुसार सतयुग से लेकर द्वापर तक पाप का स्तर बढ़ता गया और भगवान के दर्शन दुर्लभ हो गए. द्वापर के बाद आया कलियुग, जो वर्तमान का युग है.

पुराणों में बद्री-केदारनाथ (kedarnath) के रूठने का जिक्र मिलता है. पुराणों अनुसार कलियुग के पांच हजार वर्ष बीत जाने के बाद पृथ्वी पर पाप का साम्राज्य होगा. कलियुग अपने चरम पर होगा तब लोगों की आस्था लोभ, लालच और काम पर आधारित होगी. सच्चे भक्तों की कमी हो जाएगी.

ढोंगी और पाखंडी भक्तों और साधुओं का बोलबाला होगा. ढोंगी संतजन धर्म की गलत व्याख्या कर समाज को दिशाहीन कर देंगे, तब इसका परिणाम यह होगा कि धरती पर मनुष्यों के पाप को धोने वाली गंगा स्वर्ग लौट जाएगी.

http://www.mereprabhu.com/2016/05/mahabharat-ke-shraap-kalyug-ka-arambh/

जब देव राज इंद्र के आगे फीकी पड़ी शकुनि की हर चाल, महाभारत से जुड़ा अनोखा तथ्य !

शकुनी ने युधिष्ठिर को कई बार चौपड़ के खेल में हराया और जिसका परिणाम द्रौपदी का चीर हरण और पांडवों को वनवास फिर अज्ञातवास मिला. लेकिन शकुनी की चाल का जवाब देवराज इंद्र ने ऐसा दिया कि शकुनी चारो खाने चित्त हो गए.

महाभारत युद्ध के दौरान कर्ण को हराना अर्जुन के लिए कठिन था. इंद्र को अंदेशा था कि सूर्य के कवच के कारण कर्ण अर्जुन को पराजित न कर दे.

इसलिए इंद्र ब्रह्मण बनकर इंद्र के पास दान मांगने पहुंच गए. दान में इन्होंने कर्ण से कवच और कुंडल मांग लिया जिससे शकुनी और दुर्योधन का कर्ण को सेनापति बनाने की चाल नाकामयाब हुई.

शकुनी ने जुए में जब पांडवों को हरा दिया और 12 वर्ष का वनवास और एक साल का अज्ञातवास दिया तब इंद्र ने अज्ञातवास के दौरान अर्जुन की पहचान छिपाने के लिए गजब की चाल चली.

इंद्र ने दिव्यास्त्र प्राप्त करने के लिए अर्जुन को स्वर्ग बुलाया यहां अर्जुन को उर्वशी नाम की अप्सरा से नपुंसक होने का शाप मिल गया.

अर्जुन के दिव्य धनुष गांडीव की 7 विशेषताएं, जिसे जान आप रह जाएंगे आश्चर्यचकित !

कुरुक्षेत्र के मैदान में लड़े गए भीषण युद्ध में अर्जुन ने अपने दिव्य अस्त्र गांडीव के दम पर न केवल कौरवों की विशाल सेना बल्कि उस पक्ष में उपस्थित महान योद्धाओं को भी परास्त कर विजयी हासिल करी.

दिव्य धनुष गांडीव के कारण ही महाभारत युग में सभी लोग अर्जुन को महान धनुधर मानते थे. अर्जुन ने अपने इस प्रिय अस्त्र के लिए यह प्रतिज्ञा ली थी की जो भी व्यक्ति इस गांडीव धनुष को उनसे मांगेगा, वह उसी क्षण उसकी हत्या कर देंगे.

आइये जानते है की आखिर इस धनुष में ऐसी क्या खूबी थी जिसके आवाज मात्र से शत्रु भयभीत हो जाते थे.

1 . प्रभु श्री राम को गांडीव धनुष भगवान विष्णु के अंशावतार परशुराम जी से उस वक्त प्राप्त हुआ था जब देवी सीता के स्वयम्बर में श्री राम ने शिव धनुष तोड़ा तथा तब वहां परशुराम जी पधारे थे.

यह धनुष श्री राम जी से अर्जुन के पास कैसे पहुंचा इससे पहले यह जान लेते है की यह दिव्य धनुष आया कहा से था.

2 . विष्णुधर्मोत्तर पुराण के अनुसार यह कथा मिलती है की इस दिव्य धनुष का निर्माण ब्र्ह्मा जी ने किया था तथा बाद में इस धनुष को उन्होंने संहारकर्ता भगवान शिव को प्रदान किया.

भगवान शिव ने यह दिव्य धनुष पाताल में राक्षसों के बढ़ते पाप को रोकने के लिए तथा उनके संहार के लिए परशुराम को दिया था.

यदि चाहते है माँ लक्ष्मी की कृपा तो सुबह करें सिर्फ ये एक काम !

हमारे सनातन धर्म में भक्तो द्वारा अनेक देवी देवताओ को पूजा जाता है, तथा सभी देवी-देवताओ का अपना विशेष स्थान एवं महत्व है. परन्तु सभी देवी देवताओ में से कुछ देवी देवताओ की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्त कुछ भी करने को तैयार है.

वे भक्तो की आस्था एवं तपस्या से प्रसन्न होकर उन पर अपनी कृपा कर दे, यही भक्तो की कामना रहती है.

भगवान विष्णु की धर्म पत्नी माता लक्ष्मी का महत्व भी कुछ ऐसा ही है, माता लक्ष्मी का आशीर्वाद एवं उनकी कृपा प्राप्त हो जाए यह हर किसी का स्वप्न रहता है. क्योकि यदि माता लक्ष्मी एक बार अपनी कृपा भक्त पर बरसा देती है तो उस भक्त को कभी कंगाली का सामना नहीं करना पड़ता.

माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शास्त्रों में अनेक बाते कही गई है. माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए उन्हें किस मन्त्र, किस उपाय एवं किस प्रकार के कर्मो से प्रसन्न किया जा सकता है, ये सभी बाते शास्त्रों में वर्णित है.

देवी लक्ष्मी के केवल मन्त्र को ही नहीं बल्कि उनके श्रृंगार के समान सहित उनके धारण किये गए आभूषणो को भी पूजनीय बतलाया गया है. माता लक्ष्मी के द्वारा धारण किये गए सिंदूर को पवित्र एवं पूजनीय माना गया है. अनेक शुभ कार्यो एवं त्योहारों में माता लक्ष्मी के पद चिन्हों की पूजा करी जाती है.

यदि अंगद नहीं करता मंदोदरी का अपमान तो राम के साथ युद्ध में विजयी हो जाता रावण, अनसुनी कथा !

माता सीता को रावण की कैद से मुक्त करने के लिए भगवान श्री राम ने वानर सेना के साथ लंका पर चढ़ाई कर दी. लंका पहुंचने से पूर्व उनके सामने एक विशाल सागर बाधा के रूप में सामने आई परन्तु श्री राम ने नल-नील की सहायता से उस विशाल सागर पर एक सेतु का निर्माण करवाया.

रावण की सेना बहुत ही विशाल एवं मायावी थी इसके साथ ही उसके पास एक से बढ़कर एक योद्धा थे. राम की सेना में भी एक से बढ़कर एक योद्धा थे उनमे से ही एक पराक्रमी योद्धा था अंगद.

अंगद वानर राज बाली का पुत्र था तथा वह अपने पिता के समान ही बलशाली एवं बुद्धिमान था.

राम एवं रावण के बीच हुए इस भयंकर युद्ध में रावण के सभी प्रमुख वीर योद्धा मारे गए, अब केवल रावण ही शेष रह गया था. तब रावण ने प्रभु राम से युद्ध में विजयी प्राप्त करने के लिए एक बहुत ही विशाल यज्ञ का आयोजन करवाया.

इस यज्ञ में रावण द्वारा विद्वान महृषियो को आमंत्रित किया गया. यहाँ तक की स्वर्ग से देवी देवताओ को इस यज्ञ को सम्पन्न करने के लिए बुलाया गया. रावण के भय से देवताओ को उस यज्ञ में सम्म्लित होना पड़ा.

देवराज इंद्र रावण की नजर से छुपते हुए प्रभु राम के पास पहुंचे तथा उन्होंने श्री राम को रावण के यज्ञ के विषय में बतलाया. तब भगवान श्री राम ने अंगद को रावण के इस यज्ञ को रोकने के लिए कुछ वानरों के साथ भेजा.

रावण को महृषियो ने यज्ञ से पूर्व यह चेतावनी दी थी की चाहे कुछ भी हो जाए उसे यज्ञ के सम्पन होने के बाद ही उठना है, अगर वह भूल से भी यज्ञ सम्पन होने से पूर्व अथवा यज्ञ के बीच में उठ जाए तो उसे यज्ञ का फल प्राप्त नहीं होगा .