बचपन से जिसके हाथ में होती है यह छोटी सी रेखा कोई नहीं रोक सकता उसे जनता पर राज करने से

घर में खुशियां बनी रहें, इसके लिए हम हर संभव प्रयास करते हैं, लेकिन फिर भी लाभ नहीं होता। सोचिए ऐसा क्यों हो रहा है? इसका कारण घर में रखा टूटा सामान भी हो सकता है। वास्तु और ज्योतिषशास्‍त्र में ऐसे कई उपाय बताए गए हैं, जो घर को खुशहाल और संपन्न बनाते हैं। धार्मिक ग्रंथों  के अनुसार, घर में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं रखनी चाहिए जिससे घर में नकारात्मक ऊर्जा हावी हो।

बस बाल्टी भर पानी का ये उपाय रातोरात बना देगा आपको करोड़पति

हमारे घर के अंदर सही वातावरण के निर्माण में वास्तु का बहुत महत्व होता है। वास्तु पूरी तरह से वास्तुपुरुष द्वारा नियंत्रित होता है जो घर में अच्छे और स्वस्थ वातावरण का निर्माण करता है। अगर घर का निर्माण या रहने के दौरान वास्तु के नियमों का पालन ना किया जाए तो इसकी वजह से वास्तु दोष का निर्माण होता है। यहाँ पर इस प्रकर के पौधों के बारे में बताया गया है जिनको घर में रखने से सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।

घर में दूध वाले पौधों को लगाने से बचें क्योंकि ये घर में अस्वस्थ वातावरण का निर्माण करते है।

यदि आपके घर के पास बोनसाई का पौधा हैं तो तुरंत इस पौधे को वहां से हटा दें क्योंकि जैसे जैसे यह बढ़ता है, वैसे ही यह आपकी प्रगति को प्रतिबंधित करता है।

अगर आप वास्तव में अपने घर पर शांति लाना चाहते है तो अपने घर में नींबू, कमल और चमेली जैसे पौधे लगायें जो कि आपके दिन को भी अच्छा बनाते है।

अगर आप अपने घर के अंदर किसी भी तरह का पौधा रखते है तो इसके बारे में एक बात का विशेष ध्यान रखें कि इसकी लम्बाई 3 फ़ीट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

घर में पौधे रखने के लिए सही वास्तु दिशा का प्रयोग करें। आप अपने घर में पौधे रखने के लिए उत्तर, पूर्व और उत्तर पूर्व दिशा का चयन कर सकते है क्योंकि इन दिशाओं में पौधे लगाना शुभ रहता है।

घर में शांति और धन लाने के लिए सफ़ेद लिली का पौधा लगायें। आप इस पौधे को अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए अपने ऑफिस में भी लगा सकते है।

सुबह उठते ही घर के कमरे में दिखे यह तो आ चुके है अच्छे दिन जमकर बरसने वाला है पैसा

आने वाले कल में हमारे साथ क्या होगा अच्छा या बुरा ये कुछ संकेतों से जाना जा सकता है। सुबह का आगाज होते ही हमारी मनचाही इच्छा पूरी होगी या नहीं, इस बात का पता ज्योतिष विज्ञान में बताए गए कुछ खास संकेतो से होता है। घर से बाहर आने पर यदि कोई सुहागन महिला अपने हाथ में पूजा की थाली पकड़े दिख जाए तो समझ जाएं जल्द आप पर धन के देवता मेहरबान होने वाले हैं।

बृहस्पतिवार को अविवाहित कन्या सुबह-सवेरे पीले रंग के वस्त्रों में दिख जाए तो बेइंतहा धन का आगमन होता है।

दाएं हाथ में खुजली हो तो डूबा पैसा वापिस आता है या आकस्मिक धन लाभ होता है।

शुक्रवार की सुबह घर से निकलने पर केसरियां या सफेद रंग की गाय का दर्शन हो जाए तो अपने ऊपर महलक्ष्मी की विशेष कृपा समझें।

कोई किन्नर नई नवेली दुल्हन की तरह सजा दिखाई दे तो आर्थिक पक्ष मजबूत होता है।

सुबह आंख खुलने पर पहली नजर दूध अथवा दही से भरे पात्र पर पड़ जाए तो दिन मंगलमय व्यतित होता है।

सुबह नींद खुलने पर शंख अथवा मंदिर से घंटियों, भजन और आरती की ध्वनि सुनाई दे तो सारा दिन किसी भी तरह की कोई परेशानी सिर नहीं उठाती।

सुबह के समय गन्ना दिखने पर आर्थिक हालात में सुधार होता है।

नारियल, हंस, शंख, मोर सुबह के वक्त दिख जाएं तो सौभाग्य सूचक होता है।

यात्रा पर जाते समय दाएं हाथ बंदर, कुता, सांप अथवा कोई पक्षी दिख जाए तो यात्रा सुखद व आनंददायक होती है।

घर में पूजा के बाद बोले ये 4 शब्द आपकी कोई भी मनोकमना मिनटों में होगी पूरी

हिन्दू धर्म में पूजा और फिर आरती का बहुत महत्व है। ऐसी मान्यता है कि नित्य पूजा अर्चना और ईश्वर से आराधना से घर में सकारात्मक ऊर्जा का फैलाव होता है। सबसे अहम कि आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में पूजा हमारी भावनाओं तथा हमारे मनोबल को और अधिक ताकत देती है। इसलिए हमारे घर में प्रतिदन पूजा हो, इसकी व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन यह बहुत कम लोगों को पता है कि पूजन के आखिर में धार्मिक कर्म विशेषकर देव पूजा तथा आरती के अंत में की जाने वाली चार कामनाएं करने का भी विधान प्रचलित है। धार्मिक भावों से सराबोर ये सिर्फ चार बातें व्यवहारिक जीवन में आने वाले हर मुश्किल वक्त में समस्याओं, व्यवधानों तथा बुरे विचारों से हमें छुटकारा दिलाती हैं। ये उपाय बेहद सरल भी हैं।

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धर्म की जय हो।

अधर्म का नाश हो।

प्राणियों में सद्भावना हो।

विश्व का कल्याण हो।

प्रतिदिन भगवान की पूजा तथा आरती के बाद अगर आप ये चार पंक्तियां बोलते हैं तो ये चार गूढ़ अर्थ वाली बातें हैं और ये आपको सकारात्मकता प्रदान कर हर बुरे विचारों तथा कष्ट से छुटकारा दिलवाने में कारगर साबित हो सकता है। पहली पंक्ति में धर्म का गुणगान हमें कार्य के प्रति सत्यता, निष्ठा, समर्पण का भाव जगाता है तो वहीं अधर्म के नाश की पंक्ति हमें ईष्या, द्वेष, स्वार्थ से अलग रहने के प्रति संकल्पित करता है। तीसरी पंक्ति हमें मिलजुल कर रहने की प्रेरणा देती है तथा अंत में समस्त जग के कल्याण की बातें करते हैं।

शब्द ब्रह्म होता है और हमारे हर शब्द इस वायुमंडल में विद्वमान होता है। कहने का तात्पर्य यह है कि अगर हम सच्चे भाव से इन चार पंक्तियों को आप रोज पूजा के बाद बोलते हैं तो आपके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ना शुरू हो जाता है।

जिस घर में होती हे ये 5 चीज़े उस घर से माँ लक्ष्मी चली जाती है हमेशा के लिए दूर

 

अगर अचानक आपके दिन बदलने लगें, अच्छे दिन बुरे दिनों में बदल जाएं तो आप सम्भल जाएं। अगर आपके साथ ऐसा होने लगे तो अपने ही घर में रखी चीजों पर ध्यान दें। अक्सर घर में रखी कुछ चीजें एक समय के बाद बुरा असर देने लगती है।
भारतीय वास्तुशास्त्र अनुसार घर में क्या रखना चाहिए और क्या नहीं? यह जानना जरूरी है। कई बार एक छोटी सी वस्तु से ही व्यक्ति का भाग्य रुका रह जाता है या उसको किसी प्रकार की विपत्ति का सामना करना पड़ता है। याद रखें निर्जीव वस्तु में अपनी एक ऊर्जा होती है।

पिछली बार हमने आपको बताया था कि घर में कौन-सी वस्तुएं रखें जिससे जीवन हो सुखमयी। इस बार हम बताने जा रहे हैं कि ऐसी कौन-सी 13 वस्तुएं हैं, जो घर में नहीं रखना चाहिए जिससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है और जीवन दुखमयी बन जाता है। अंतिम पांच वस्तुओं के बारे में आप जानकर हैरान रह जाएंगे।

टूटे-फूटे बर्तन, दर्पण, इलेक्ट्रॉनिक सामान, तस्वीर, फर्नीचर, पलंग, घड़ी, दीपक, झाड़ू, मग, कप आदि कोई सा भी सामान घर में नहीं रखना चाहिए। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है और व्यक्ति मानसिक परेशानियां झेलता है। यह भी माना जाता है कि इससे वास्तु दोष तो उत्पन्न होता ही है, लक्ष्मी का आगमन भी रुक जाता है।

ये तस्वीरें न रखें : कहते हैं कि महाभारत युद्ध का चित्र, नटराज की मूर्ति, ताजमहल का चित्र, डूबती हुई नाव या जहाज, फव्वारे, जंगली जानवरों के चित्र और कांटेदार पौधों के चित्र घर में नहीं लगाना चाहिए। कहते हैं कि इससे मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है और लगातार इन चित्रों को देखते रहने से नकारात्मक भावों का ही विकास होता है जिसके चलते हमारे जीवन में अच्‍छी घटनाएं घटना बंद हो जाती हैं।

कहा जाता है कि महाभारत एक युद्ध का चित्र है जिससे घर में क्लेश बढ़ता है। नटराज की मूर्ति या‍ चित्र में शिव तांडव नृत्य मुद्रा में दर्शाए गए हैं, जो कि विनाश का प्रतीक है इसलिए इसे घर में नहीं रखना चाहिए। ताजमहल एक कब्रगाह अर्थात यह मौत से जुड़ा है इसलिए इसके रहने से भी मानसिकता नकारात्मक हो जाती है। डूबते जहाज का चित्र आपके सौभाग्य को भी डुबो देगा। इससे रिश्तों में बदलाव आ जाता है।

फव्वारे के चित्र का असर यह होगा कि जिस तरह घर में समृद्धि या पैसा आता है उसी तरह वह व्यर्थ बह जाएगा। बहते पानी के साथ आपका पैसा भी बह जाएगा। उसी तरह जंगली या हिंसक जानवरों के चित्र लगाने से आपके घर के लोग भी उसी स्वभाव के होने लगेंगे। कैक्टस या कांटोंभरे पौधों का चित्र भी आपके ‍जीवन में कांटे बो देगा।

चित्र या तस्वीर लगाते वक्त ध्यान रखें वास्तु का। यदि कलाकृतियों के नाम पर कुछ ऐसी वस्तुएं या पेंटिंग हैं जिसमें सूखे ठूंठ हो, मानवरहित उजाड़ शहर हो, बिखरा हुआ घर हो, सूखा पहाड़ हो या वे सभी मृतप्राय: सजावटी वस्तुएं हों, जो मानी तो जाती हैं कलात्मक लेकिन वास्तु शास्त्र अनुसार ये सभी नकारात्मक ऊर्जा पैदा करती हैं।

घर में पूजा करते समय 1 मिनट का ये काम घर छोड़ तुरंत भागेगी गरीबी और दरिद्रता

 

अगर आप रोज पूजा करते हैं और आपका मन अशांत रहता है तो इसका मतलब है कि आप कि पूजा-पाठ में कहीं कुछ गलत हो रहा है. मन की शांति और जिस भी मनोकामना से पूजा की जा रही है, उसकी पूर्ति के लिए परे विधान से पूजा का किया जाना जरूरी है. यहां जानते हैं कि पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखें और कुछ जरूरी नियमों का पालन कैसे करें…

1. शिवजी, गणेशजी और भैरवजी को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए.

2. तुलसी का पत्ता बिना स्नान किए नहीं तोड़ना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिना नहाए ही तुलसी के पत्तों को तोड़ता है तो पूजन में ऐसे पत्ते भगवान द्वारा स्वीकार नहीं किए जाते हैं.

3. तुलसी के पत्तों को 11 दिनों तक बासी नहीं माना जाता है. इसकी पत्तियों पर हर रोज जल छिड़कर पुन: भगवान को अर्पित किया जा सकता है.

4. रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रान्ति तथा संध्या काल में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए.

5. सूर्य देव को शंख के जल से अर्घ्य नहीं देना चाहिए.

6. दूर्वा (एक प्रकार की घास) रविवार को नहीं तोड़नी चाहिए.

7. बुधवार और रविवार को पीपल के वृक्ष में जल अर्पित नहीं करना चाहिए.

8. प्लास्टिक की बोतल में या किसी अपवित्र धातु के बर्तन में गंगाजल नहीं रखना चाहिए. अपवित्र धातु जैसे एल्युमिनियम और लोहे से बने बर्तन. गंगाजल तांबे के बर्तन में रखना शुभ रहता है.

9. केतकी का फूल शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए.

10. किसी भी पूजा में मनोकामना की सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए.

किसी भी शनिवार की शाम 1 कटोरी हींग का ये बड़ा उपाय साक्षात् माँ लक्ष्मी का देखे चमत्कार

 

हींग का उपयोग प्रायः किचन में खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए लोग जानते हैं। हींग का उपयोग आयुर्वेद में औषधी के रूप में किया जाता है। लेकिन शायद बहुत कम लोग ही जानते हैं कि छोटी सी यह चीज बड़ी-बड़ी बाधाओं को भी चुटकी में हल करता है।

दरअसल हींग का प्रयोग तंत्र विद्या में भूत-प्रेत की बाधाओं को शांत करने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसका उपयोग नकारात्मक उर्जा को खत्म करने के लिए होता है। आज हम आपको हींग के चमत्कारी लाभ के बारे में बता रहे हैं।

सफलता के लिए
किसी भी नए कम शुरू करने से पहले या किसी इंटरव्यू में जाने से पहले इस काम को करने से सभी सफल होता है। इसके लिए आपको घर से निकलने से पहले हाथ में चुटकी भर हींग लें। फिर मुख्य द्वार पे पहुंचते ही अपने माथे के ऊपर से तीन बार घुमाकर उत्तर दिशा की ओर फेंक दें। अब बिना पीछे देखे आगे बढ़ जाएं, आपका काम हर हाल में बनेगा।

कर्ज मुक्ति के लिए
रोजाना अपने नहाने के पानी में थोड़ी सी हींग मिलाएं। इसके घुल जाने पर इस पानी से स्नान करें। आप ऐसा भी कर सकते हैं कि थोड़े से पानी में हींग घोलकर इसे अपने नहाने के पानी में मिला लें और इससे स्नान करें। इस प्रयोग को लगातार 21 या 41 दिनों तक करें। ऐसा करने से आपको सभी प्रकार के कर्ज से मुक्ति मिलेगी।

जिस हाथ में होती है ये रेखा खुद भगवान करते है उन लोगो पर धन वर्षा

 

अनेक जातक-जातिकाओं की महत्वाकांक्षा होती है राजसुख प्राप्त करने की। वे जानना चाहते हैं कि उनके हाथ में भी राजयोग है या नहीं। ऐसे महत्वाकांक्षी जातकों के लिए हमारे हस्त रेखा के विद्वान महर्षियों ने अनेक राजयोगों के संबंध में सामुद्रिक शास्त्रों में वर्णन किया है जिसमें मुख्य योग मंत्री, मुख्यमंत्री, राजदूत, राज्याधिकारी, राज्यपाल, न्यायाधीश, वकील आदि योग निम्न प्रकार के हैं-

1. जिसकी हथेली के मध्य घोड़ा, घड़ा, पेड़, दंड या स्तंभ का चिह्न हो, वह राजसुख भोगने वाला, नगर सेठ के समान धनी होता है। जिसका ललाट चौड़ा और विशाल, नेत्र सुंदर, मस्तक गोल और भुजाएं लंबी हों, वह भी राजसुख भोगता है।

2. जिसके हाथ में धनुष, चक्र, माला, कमल, ध्वजा, रथ, आसन अथवा चतुष्कोण हो, उसके ऊपर लक्ष्मी सदा प्रसन्न रहती है।

3. जिसके हाथ में अनामिका के मूल में पुण्य रेखा हो और मणिबंध से शनि रेखा मध्यमा उंगली पर जाए तो वह राजसुख भोगता है

4. जिसके अंगुष्ठ में यव चिह्न हो साथ ही मछली, छाता, अंकुश, वीणा, सरोवर, हाथी का चिह्न हो, वह यशस्वी एवं करोड़ों मुद्राओं का स्वामी होता है।

5. जिसके हाथ में तलवार, पहाड़, हल, चिह्न हो उसके पास लक्ष्मी की कमी नहीं होती है।

6. जिसके हाथ की सूर्य रेखा मस्तक रेखा से मिली हो और मस्तक रेखा स्पष्ट सीधी होकर गुरु की ओर झुकने से चतुष्कोण का निर्माण होता हो, वह मुख्यमंत्री होता है।

7. जिसके हाथ में गुरु, सूर्य पर्वत उच्च हो, शनि और बुध रेखा पुष्ट एवं स्पष्ट और सीधी हो, वह राज्यपाल होता है।

8. जिसके हाथ में शनि पर त्रिशूल चिह्न हो, चन्द्र रेखा का भाग्य रेखा से संबंध हो या भाग्य रेखा हथेली के मध्य से प्रारंभ होकर उसकी एक शाखा गुरु पर्वत पर और एक सूर्य पर्वत पर जाए, वह राज्याधिकारी होता है।

यदि घर के पास दिखाई दे ये चमत्कारी पौधा तो माँ लक्ष्मी ने भेजा है करोड़पति बनने का पैगाम

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यदि घर की औरत करे ये 1 काम तो आपके पति मानेंगे आपकी हर बात लट्टू की तरह नाचेंगे आस पास

शनिदेव को कर्मफलदाता का दर्जा दिया गया है। ऐसी मान्यता है कि अगर शनि देव रुष्ट हो जाएं तो राजा को रंक और रंक को राजा बना देते हैं। उन्‍हें खुश करने के लिए लोग हर तरह के प्रयत्न करते हैं। इनका दिन शनिवार है इसलिए इस रोज किया गया कार्य पूरी सावधानी के साथ करना चाहिए क्योंकि शनिदेव जितने ज्यादा प्रसन्न होंगे उतना फलदायी परिणाम मिलेगा। तो आइए जानते हैं शनिदेव को प्रसन्न करने के कुछ विशेष उपाय-

अगर आप शनिदेव की पूजा करते हैं तो उस समय काले वस्त्र को धारण करना काफी शुभ माना जाता है।

सरसों के तेल में लोहे की कील डालकर पीपल की जड़ में तेल चढ़ाने से शनिदेव जल्दी ही प्रसन्न हो जाते हैं और भक्त की मनोकामना पूरी करते हैं। जब भी शनिवार के दिन तेल दान करें तो उसमें अपनी परछाई जरूर देखें। परछाई दिखने के बाद ही उसे दान करें।

इस दिन काले कुते और कौए को तेल की चुपड़ी रोटी और गुलाब जामुन खिलाना लाभकारी होता है।

शनिवार के दिन शनि देव का व्रत महिला अथवा पुरूष कोई भी कर सकता है। स्नान करने के पश्चात पीपल पेड़ या शमी के पेड़ के नीचे गोबर से लीप लें और वह बेदी बनाकर कलश और शनिदेव की मूर्ति स्थापित करें। शनिदेव की प्रतिमा को काले पुष्प, धुप, दीप, तेल से बने पदार्थों का प्रसाद चढाएं। पीपल के पेड़ को सूत का धागा लपेटते हुए सात बार परिक्रमा करें और साथ ही पेड़ की भी पूजा करें। इसके बाद हाथ में चावल और फूल ले कर भगवान शनिदेव की व्रत कथा सुने और पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद सभी को बांटे। महीने के पहले शनिवार को उड़द का भात, दूसरे शनिवार को खीर, तीसरे शनिवार को खजला और अंतिम शनिवार को घी और पूरी से शनिदेव को भोग लगाएं। ज्योतिष और वास्तु विद्वान कहते हैं शनिदेव की प्रतिमा घर पर नहीं रखनी चाहिए।