आज धनतेरस की शाम एक लॉन्ग का उपाय 7 दिन के अंदर चमत्कार

हर इंसान बड़ा बनना और पैसा कमाना चाहता है. वह चाहता है कि उसके पास इतना पैसा हो जिससे वह अपनी और अपने परिवार की ज़रूरतों को पूरा कर सके. लेकिन कोई भी चीज़ पाने के लिए मेहनत की आवश्यकता होती है.

ऐसे बहुत ही कम लोग होते हैं जो बिना मेहनत किये नाम कमा लेते हैं. ऐसे लोगों की किस्मत उनके साथ होती है. लेकिन सबके साथ ऐसा नहीं होता. समाज में एक अमीर और सफल व्यक्ति बनने के लिए कड़ी मेहनत की ज़रुरत होती है. क्या आपने बिना मेहनत किये किसी को अमीर बनते देखा है?

शायद नहीं, क्योंकि ऐसा होता ही नहीं है. बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि बिना मेहनत किये फल नहीं मिलता. उनका मानना है कि यदि व्यक्ति का कर्म अच्छा होगा उसे सफलता अपने आप मिलेगी.

लेकिन कई बार कड़ी मेहनत करने के बावजूद लोग सफल नहीं होते. वह कुछ भी कर लें हमेशा निराशा ही हाथ लगती है. इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिसे करने पर सफलता अवश्य मिलेगी और आपकी सारी मनोकामना पूरी हो जायेगी.

एक लौंग करेगा जादू

जी हां आपने सही पढ़ा. किचन में रखा बस एक छोटा सा लौंग आपको आर्थिक समस्याओं से मुक्ति दिला सकता है. इस उपाय में ज़्यादा मेहनत करने की भी आवश्यकता नहीं है. इसके लिए आपको बताये गए बस कुछ सरल नियमों का पालन करना है.

लौंग हर किचन में उपलब्ध होता है लेकिन आप इस बात से अनजान हैं कि ये छोटा सा लौंग आपके कितने काम आ सकता है. यदि आपका कोई काम अटका पड़ा है, नौकरी में प्रमोशन नहीं मिल रहा या बिज़नेस में नुकसान हो रहा है, तो इस उपाय को करने से सारी समस्याओं से मुक्ति मिल जायेगी. तो आईये जानते हैं क्या है वह उपाय और कैसे उसे करना है.

उपाय की विधि

धनतेरस के दिन पांच लौंग को लेकर उसे लाल रंग के कपड़े में लपेट लें. उसके बाद घर के पूजा स्थान पर बैठकर महालक्ष्मी और कुबेर जी को ध्यान में रखकर धन प्राप्ति के लिए अराधना करें.

अराधना समाप्त हो जाने के बाद इस लाल रंग के कपड़े को अपनी तिजोरी या फिर जहां आप पैसा रखते हैं, वहां रख दें. ध्यान रहे इस उपाय के बारें में किसी को पता न चल पाए. यह उपाय आपको बिना किसी को बताये करना है.

मन में सच्ची श्रद्धा रखें और ठान लें कि आपको जो करना है वो करना ही है. तभी आपको इस उपाय का फल मिलेगा. यह उपाय करने के पश्चात आप देखेंगे कि सात दिनों के अंदर ही आपकी आर्थिक स्थिति सुधर रही है. धनतेरस के दिन में इस उपाय को करना बेहद प्रभावशाली होता है , अगर आप धन तेरस को इस उपाय को नहीं कर पाए तो आप इस उपाय को किसी भी गुरुवार, शुक्रवार या शनिवार के दिन भी कर सकते हैं

दिवाली पर झाडू खरीदना होता है शुभ,जानिए इससे जुड़ी 5 मान्यताएं

जिस प्रकार घर में हर चीज का अपना महत्व और स्थान होता है ठीक उसी तरह से झाडू का भी महत्वपूर्ण स्थान है। दीपावली के दिन झाडू खरीदना शुभ माना जाता है क्योंकि झाडू घर के अंदर से सारी नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता को दूर कर देता है। शास्त्रों में कहा गया है कि झाडू का अपमान करने से देवी लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। आइए जानते हैं झाडू से जुड़ी कुछ धार्मिक मान्यताओं के बारें में।

दिवाली के दिन 4 में से 1 उपाय इतना आएगा पैसा संभाल नहीं पाओगे

हिन्दु धर्म में दिवाली का खास महत्व है। इस रात कुछ वास्तु उपाय करने से आपके जीवन की बड़ी से बड़ी समस्याएँ दूर हो सकती है। दिवाली के मौके पर वास्तु के कुछ खास उपाय करने से जीवन की बहुत सारी परेशानियाँ दूर हो सकती है।

दीवाली को दुर्भाग्य दूर करते है ये वास्तु टिप्स

# दिवाली में पांच दिन पहले से पूजा के समय सुबह और शाम पूजा करते वक़्त अपने घर की खिड़कियों को खुला हुआ रखे, इसके अलावा रोज सुबह नहाने के बाद अपने पूजा घर में लाल कुमकुम से स्वस्तिक बनाये।

# अपने घर के मंदिर में रखे सभी भगवानो की स्थापना उत्तर दिशा की ओर करे.और भगवान् गणेशजी की मूर्ति को माँ लक्ष्मी के दाहिनी ओर स्थापित करे, जिससे आपके घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती है।

# दिवाली के समय कभी भी काले रंग के कपडे नहीं पहनने चाहिए,ऐसा करने से माँ लक्ष्मी नाराज हो जाती है और आपको धन से जुडी समस्याएँ सामने आने लगती है।

# इन दिनों में रोज अपने घर में नमक के पानी से अपने पुरे घर में छिड़काव करे, ऐसा करने से आपके घर की सभी नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

धनतेरस राशि अनुसार करें खरीदारी, सालभर नहीं रहेगी पैसों की कमी

कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतरेस का पर्व मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती हैं और इसी दिन से 5 दिनों तक दीपावली का पर्व भी आरम्भ हो जाता है। धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के प्रणेता भगवान धनवंतरी के पूजन के साथ कुछ नई चीज खरीदने का खास महत्व होता है। ज्योतिषचार्यो के अनुसार राशि के अनुसार अगर चीजों की खरीदारी की जाय तो सालभर कभी भी पैसों की कमी नहीं रहेगी।

धनतेरस वाले दिन घर में लाये ये चमत्कारी पत्थर, साक्षात् मेहरबान होगी माँ लक्ष्मी

हर साल दीपावली के त्यौहार में हम मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं। जिससे हम सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य आदि प्राप्त कर सकें। लोग इसके लिए बहुत तैयारियां और बहुत से जतन करते हैं। लेकिन आज हम आपके लिए एक ऐसा अनोखा उपाय लेकर आए हैं, जिसे जानकर आपको जितनी हैरानी होगी उतनी ही खुशी भी होगी।

जी हां हम बात कर रहे हैं एक चमत्कारी पत्थर की जो लक्ष्मी जी को अति प्रिय है। हालांकि अधिकतर लोगों को इसकी महत्ता का ज्ञान नहीं है, लेकिन जो लोग जानते हैं वह इसका भरपूर उपयोग करते हैं। इस पत्थर का नाम है गोमती चक्र।

यह पत्थर सामान्यतया नदियों में या पुराने तालाबों में पाया जाता है। इसका एक भाग उथला हुआ तथा दूसरा भाग चपटा हुआ चक्र के समान होता है। इसलिए इसे गोमती चक्र के नाम से जाना जाता है। इस चक्र की सबसे पहली खासियत तो यह है कि इसे माँ लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। आगे आप इस चक्र के अद्भुत गुणों के बारे में जानेंगे।

गोमती चक्र में अद्भुत ऊर्जा समाई हुई होती है। इसमें नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने की क्षमता होती है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जिस व्यक्ति को आर्थिक तंगी, रुपए पैसे की कमी या हानि जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है,

A young businessman looking frustrated at the office

उन्हें 11 गोमती चक्रों को अच्छी तरह धोकर उनका विधिवत पूजन करके पीले कपड़े में बांधकर दरवाजे पर लटकाना चाहिए तथा 11 गोमती चक्रों का पूजन करके लाल कपड़े में बांधकर धन के स्थान पर रख देना चाहिए।

इससे ना सिर्फ धन में वृद्धि होगी बल्कि खर्च भी नियंत्रित होंगे और धन पर किसी की बुरी नजर भी नहीं लगेगी। अगर आप चाहें तो एक अभिमंत्रित गोमती चक्र को सोने की अंगूठी में पिरोकर भी धारण कर सकते हैं। इससे वह हर वक्त आपके साथ रहेगा।

दोस्तों यह उपाय बेहद कारगर है और सबसे अच्छी बात यह है कि गोमती चक्र बाजार में बेहद सस्ते दामों में उपलब्ध होते हैं, जिन्हें आसानी से खरीदा जा सकता है। केवल ज्योतिष में ही नहीं बल्कि तांत्रिकी में भी गोमती चक्र के अद्भुत गुणों का विस्तृत वर्णन देखने को मिलता है।

मंगलवार को आ रही है धनतेरस बस 1 दीपक में लॉन्ग जला कर डाल देना रातो रात देखे चमत्कार

दीपावली के दिन प्रत्येक व्यक्ति, वो चाहे व्यवसाय से हो, सेवा कार्य से हो या नौकरी से, प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यवसायिक स्थान एवं घर पर मां लक्ष्मी एवं गणेश जी का विधिवत पूजन कर धन की देवी लक्ष्मी से सुख-समृद्धि एवं गणेश जी से बुद्धि की कामना करता है

पूजन सामग्री:

महालक्ष्मी पूजन में रोली, , कुमकुम, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, दीपक, रुई, कलावा (मौलि), नारियल, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, धनिया, फल, फूल, जौ, गेहूँ, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, घृत, पंचामृत, दूध, मेवे, खील, बताशे, गंगाजल, यज्ञोपवीत, श्वेत वस्त्र, इत्र, चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, लक्ष्मी व गणेश जी का चित्र या प्रतिमा, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, मिष्ठान्न, 11 दीपक इत्यादि वस्तुओं को पूजन के समय रखना चाहिए।

(पूजा की विधि)

दीप स्थापना:
सबसे पहले पवित्रीकरण करें। आप हाथ में पूजा के जलपात्र से थोड़ा-सा जल ले लें और अब उसे मूर्तियों के ऊपर छिड़कें। साथ में मंत्र पढ़ें। इस मंत्र और पानी को छिड़ककर आप अपने आपको पूजा की सामग्री को और अपने आसन को भी पवित्र कर लें।

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।

अब पृथ्वी पर जिस जगह आपने आसन बिछाया है, उस जगह को पवित्र कर लें और मां पृथ्वी को प्रणाम करके मंत्र बोलें:

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

Diwali thali in front of idols of Lord Ganesha and Goddess Lakshmi

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥
पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः

अब आचमन करें
ॐ केशवाय नमः
ॐ नारायणाय नमः
ॐ माधवाय नमः

हाथों को धो लें

ॐ हृषिकेशाय नमः

आचमन आदि के बाद आंखें बंद करके मन को स्थिर कीजिए और तीन बार गहरी सांस लीजिए। यानी प्राणायाम कीजिए क्योंकि भगवान के साकार रूप का ध्यान करने के लिए यह आवश्यक है। फिर पूजा के प्रारंभ में स्वस्तिवाचन किया जाता है। उसके लिए हाथ में पुष्प, अक्षत और थोड़ा जल लेकर स्वतिनः इंद्र वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए परम पिता परमात्मा को प्रणाम किया जाता है। फिर पूजा का संकल्प किया जाता है। संकल्प हर एक पूजा में प्रधान होता है।

संकल्प:

आप हाथ में अक्षत लेकर, पुष्प और जल ले लीजिए। कुछ द्रव्य भी ले लीजिए। द्रव्य का अर्थ है कुछ धन। ये सब हाथ में लेकर संकल्प मंत्र को बोलते हुए संकल्प कीजिए कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं, जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों।

सबसे पहले गणेशजी व गौरी का पूजन कीजिए। उसके बाद वरुण पूजा यानी कलश पूजन करनी चाहिए। हाथ में थोड़ा सा जल ले लीजिए और आह्वान व पूजन मंत्र बोलिए और पूजा सामग्री चढ़ाइए। फिर नवग्रहों का पूजन कीजिए। हाथ में अक्षत और पुष्प ले लीजिए और नवग्रह स्तोत्र बोलिए। इसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन किया जाता है।

हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प ले लीजिए। 16 माताओं को नमस्कार कर लीजिए और पूजा सामग्री चढ़ा दीजिए। 16 माताओं की पूजा के बाद रक्षाबंधन होता है। रक्षाबंधन विधि में मौलि लेकर भगवान गणपति पर चढ़ाइए और फिर अपने हाथ में बंधवा लीजिए और तिलक लगा लीजिए। अब आनंदचित्त से निर्भय होकर महालक्ष्मी की पूजा प्रारंभ कीजिए।

आरती –
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।
एक दंत दयावंत चार भुजाधारी ।
माथे पर तिलक सोहे, मुसे की सवारी ।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा ।
लड्डुवन का भोग लगे, संत करे सेवा ।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।
अंधन को आंख देत, कोढ़ियन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ।।
सुर श्याम शरण आये सफल कीजे सेवा ।। जय गणेश देवा
जय गणेश जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।

आरती:
ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….
उमा, रमा, ब्रम्हाणी, तुम जग की माता
सूर्य चद्रंमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….
दुर्गारूप निरंजन, सुख संपत्ति दाता
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धी धन पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….
तुम ही पाताल निवासनी, तुम ही शुभदाता
कर्मप्रभाव प्रकाशनी, भवनिधि की त्राता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….
जिस घर तुम रहती हो, ताँहि में हैं सद्गुण आता
सब सभंव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….
तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता
खान पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….
शुभ गुण मंदिर, सुंदर क्षीरनिधि जाता
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता
उर आंनद समाता, पाप उतर जाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….
स्थिर चर जगत बचावै, कर्म प्रेर ल्याता
तेरा भगत मैया जी की शुभ दृष्टि पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

देवी लक्ष्मी खुद घर चलकर आएँगी आपके मंदिर में रख ले बस ये 1 चीज़

दिवाली में माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लोग ना जाने कौन-कौन सी विधि अपनाते हैं। इन विधियों में बहुत सारी विधियां ऐसी होती हैं जिसको सामान्य लोग को अपनाना थोड़ा असंभव सा प्रतीत होता है।

लक्ष्मी को प्रसन्न करने शास्त्रों में वैसे तो बहुत सारे यंत्रों की चर्चा की गई है लेकिन महामेरु श्री यंत्र इन सभी यंत्रों में सबसे प्रभावशाली यंत्र है। यह यंत्र महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

महामेरु श्री यंत्र महालक्ष्मी के पराविद्या का साक्षात स्वरूप है। इस यंत्र की स्थापना से सौभग्य के द्वार खुलते हैं। इस यंत्र की अधिष्ठात्री देवी श्री ललिता हैं। ऐसा कहा जाता है कि जब श्रृष्टि पर कुछ नहीं था तब माता लक्ष्मी के विचार से एक मेरु उत्त्पन्न हुआ।

माता लक्ष्मी के विचार से उत्त्पन्न यह यंत्र ही मेरु श्री यंत्र कहलाया। इस यंत्र में ब्रह्मा, विष्णु सहित सभी देवी-देवतों का वास है।\

इस यंत्र की पूजा करने से सभी सुखों की प्राप्ति होती है। जिस तरह मंत्र की शक्ति उसके शब्दों में होती है वैसे ही यंत्र की शक्ति उसकी रेखाओं और बिन्दुओं में होती है।

श्री यंत्र में 9 त्रिकोण होते हैं जिसे शिव के 9 मूल प्रकृतियों के संकेत के रूप में देखा जाता है। इस 9 त्रिकोण से मिलकर ही 45 त्रिभुज बनते हैं जो 45 देवताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इस यंत्र के बीच भाग में एक बिंदु होता है जो ककी समाधि का सूचक होता है। यह बिंदु शिव और शक्ति का संयुक्त रूप होता है। इस यंत्र में कुल मिलाकर 9 चक्र होते हैं जो देवियों का प्रतीक होता है।
श्री यंत्र के प्रकार और विशेषता

पारद श्री यंत्र- यह यंत्र सिद्धि और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए रखा जाता है।
मेरु पृष्ठ अष्टधातु- इस यंत्र को परिवार में सुख शांति और धन पाने के लिए रखा जाता है।
स्फटिक श्री यंत्र- इस यंत्र को शांति, विद्या और समृद्धि के लिए रखा जाता है
स्वर्ण यंत्र- इस यंत्र को व्यवसाय में सफलता के लिए रखा जाता है।\
पिरामिड श्री यंत्र- यह यंत्र धन-धान्य और स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है।
तांबे का श्री यंत्र- धन व समृद्धि के लिए यह यंत्र बेहद लाभदायक माना जाता है।

कैसे रखें यंत्र को

एक लाल कपड़ा बिछाकर उस पर महामेरु रखें। उसके एक तरफ जल का कलश रखें और उस पर ‘श्रीं’ यानी लक्ष्मी के बीज मंत्र का उच्चारण करें। फिर अंगूठे, रिंग फिंगर और मिडिल फिंगर से कुमकुम चढ़ाएं। इस तरह 11 दिन तक इसका अभिषेक करें। फिर इसे अपने धन स्थान पर रखें। कभी धन खत्म नहीं होगा।

भूलकर भी न खरीदें ये 5 चीजें, मालामाल की जगह हो जाएंगे कंगाल

17 अक्टूबर को धनतेरस है और उसके बाद दिवाली का त्योहार है। धनतेरस पर नए सामान की खरीदने की परंपरा है और यह काफी पुरानी है। ऐसी मान्यता है भगवान धनवंतरि जब समुद्र मंथन से उत्पन्न थे तब उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। इस दिन खरीदारी करने से धन में 13 गुना की बढ़ोत्तरी होती है। लेकिन धनतेरस पर कुछ चीजों को खरीदने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं कौन सी वस्तु नहीं खरीदनी चाहिए।

धनतेरस के दिन शीशे का सामान नहीं खरीदना चाहिए क्योंकि इसका संबंध राहु से होता है और राहु को नीच ग्रह माना जाता हैं।

दिवाली से 1 दिन पहले घर में रख दे ये पौधा घर की सारी दरिद्रता होगी घर के बाहर

हर कोई धन की देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद पाना चाहता है। लक्ष्मी जी कृपा पाने के लिए व्यक्ति क्या क्या न नहीं करता, तरह तरह के टोने टोटके करता है, पूजा पाठ, दान-धर्म करता है। लेकिन जो बाते आज हम आपको बताने जा रहे है वो बाते शायद ही आप जानते होंगे…

कभी कभी ऐसा होता है की लाख प्रयास करने के बाद भी आपके कामों में बार-बार रुकावट आती है या कभी आपकी किस्मत आपका साथ नहीं देती तो ऐसे में आपको निराश होने की ज़रूरत नहीं है।

ज्योतिषशास्त्र में एक ऐसा उपाय बताया गया है जिसको करने से आपके जीवन की सारी समस्याएँ दूर हो जाती है,आज हम आपको ऐसा ही उपाय बताने जा रहे है जिससे आप परेशानियों से आसानी से पीछा छुड़ा सकते है…

अगर आपकी किस्मत आपका साथ नहीं दे रही है इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए अपने घर की छत पर अशोक का एक छोटा सा पौधा लगाए,अब रोज नहाने के बाद इस पौधे में एक लोटा जल चढ़ाये।

जल चढ़ाते वक़्त ये सोचे की आपके अंदर की सारी नकारात्मकता पौधे के अंदर चली जाये वास्तु में अशोक के पौधे को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसा माना जाता है की अगर आप अशोक के पौधे को घर में लगाकर नियमित रूप से उसमे जल डालते है तो इससे आपके जीवन की सारी समस्याएँ दूर हो जाती है और आपको आपके हर कार्य में सफलता मिलती है।

इस भोग के बिना अधूरी है लक्ष्मी पूजा इस दिवाली जरूर चढ़ाये

दिवाली का त्योहार हर कोई पूरे जोश और उत्साह से मनाता है। घरों की सफाई के बाद नए कपड़ों की खरीदारी, गहने पहनकर हर कोई मां लक्ष्मी की पूजा करता है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर भ्रमण के लिए निकलती हैं।

हर कोई मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार, पूजा और प्रसाद चढ़ाता है। मगर, अाज हम आपको ऐसे पांच प्रसाद के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके बिना मां लक्ष्मी की पूजा अधूरी मानी जाती है।

लक्ष्मी माता का प्रिय फल होने के कारण ही नारियल को श्रीफल कहा गया है। मां लक्ष्मी को नारियल का लड्डू, कच्चा नारियल और जल से भरा नारियल अर्पित करने वाले पर वह प्रसन्न होती हैं।

मां लक्ष्मी को पानी में उगने वाला फल मखाना बहुत प्रिय है। इसका कारण यह है कि यह पानी में एक कठोर आवरण में बढ़ता है और इसलिए यह हर तरह से शुद्ध और पवित्र होता है।\

पानी में ही पैदा होने वाला एक और फल सिंघाड़ा भी मां लक्ष्मी के पसंदीदा फलों में से एक है। यह मौसमी फल है और सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद भी है। चंद्रमा को देवी लक्ष्मी का भाई माना जाता है।

चंद्रमा को सफेद वस्तु, औषधियों, 16 कलाओं का राजा माना जाता है। बताशे का संबंध भी चंद्रमा से होता है और यही वजह है कि बताशे मां लक्ष्मी को भी प्रिय हैं। इसीलिए दिवाली पर बताशे और चीनी के खिलौने का प्रसाद मां लक्ष्मी को लगाया जाता है।

धन की देवी कही जाने वाली माता लक्ष्मी को पान बहुत पसंद है। इसलिए पूजा के बाद देवी को पान का भोग जरूर लगाना चाहिए। इसके अलावा आप अपनी श्रद्धा और भक्ति के अनुसार, मां को फल, मिठाई, मेवे का भोग लगा सकते हैं।